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Jind News: कक्षा तीन की बुनियादी शिक्षा का होगा राष्ट्रीय मूल्यांकन
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16जेएनडी18: राजेश वशिष्ठ।
जींद। देश में बुनियादी साक्षरता को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2026 में फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी आयोजित करने की घोषणा की है। इस राष्ट्रीय अध्ययन का संचालन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद एनसीईआरटी की ओर से किया जाएगा।
यह सर्वेक्षण कक्षा तीन के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का व्यापक मूल्यांकन करेगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्रगति को मापेगा। विशेषज्ञों के अनुसार कक्षा तीन तक का चरण बच्चों के शैक्षणिक जीवन की नींव तय करता है। बच्चे पढ़ना सीखते हैं और आगे की कक्षाओं में पढ़कर सीखना शुरू करते हैं।
यदि इस अवस्था में पढ़ने और गणित की बुनियादी समझ मजबूत नहीं होती तो आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है। एफएलएस का उद्देश्य यह जानना है कि बच्चे भाषा में पढ़ने, समझने और लिखने और गणित में जोड़-घटाव और संख्या ज्ञान में कितने सक्षम हैं।
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यह अध्ययन पूरे देश में सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में यादृच्छिक सैंपलिंग के आधार पर किया जाएगा ताकि परिणाम निष्पक्ष और प्रतिनिधिक हों।
मूल्यांकन मुख्य रूप से वन-ऑन-वन पद्धति से होगा। डिजिटल टैबलेट और विशेष ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह किया जाएगा जबकि दूरदराज क्षेत्रों में पेपर-आधारित विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
हजारों फील्ड इन्वेस्टिगेटर को प्रशिक्षित कर बच्चों का मित्रवत वातावरण में आकलन कराया जाएगा। यह नई शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन के तहत किए गए प्रयासों की प्रगति का मध्यावधि मूल्यांकन करेगा। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव, शिक्षक प्रशिक्षण और उपचारात्मक शिक्षण की रणनीति तय की जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। स्कूलों को कक्षा तीन के विद्यार्थियों का डेटा अद्यतन रखने, शांत कक्ष उपलब्ध कराने और अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं कि यह कोई पास-फेल परीक्षा नहीं है।
शिक्षकों को बच्चों में भयमुक्त वातावरण तैयार करने, नियमित अभ्यास कराने और कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित करने को कहा गया है।
वर्जन
एफएलएस 2026 केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भारत के शैक्षिक भविष्य का रोडमैप है। यह अध्ययन सुनिश्चित करेगा कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे और विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार हो सके। -राजेश वशिष्ठ जिला समन्वय एफएलएन, जींद।
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यह सर्वेक्षण कक्षा तीन के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का व्यापक मूल्यांकन करेगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्रगति को मापेगा। विशेषज्ञों के अनुसार कक्षा तीन तक का चरण बच्चों के शैक्षणिक जीवन की नींव तय करता है। बच्चे पढ़ना सीखते हैं और आगे की कक्षाओं में पढ़कर सीखना शुरू करते हैं।
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यदि इस अवस्था में पढ़ने और गणित की बुनियादी समझ मजबूत नहीं होती तो आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है। एफएलएस का उद्देश्य यह जानना है कि बच्चे भाषा में पढ़ने, समझने और लिखने और गणित में जोड़-घटाव और संख्या ज्ञान में कितने सक्षम हैं।
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यह अध्ययन पूरे देश में सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में यादृच्छिक सैंपलिंग के आधार पर किया जाएगा ताकि परिणाम निष्पक्ष और प्रतिनिधिक हों।
मूल्यांकन मुख्य रूप से वन-ऑन-वन पद्धति से होगा। डिजिटल टैबलेट और विशेष ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह किया जाएगा जबकि दूरदराज क्षेत्रों में पेपर-आधारित विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
हजारों फील्ड इन्वेस्टिगेटर को प्रशिक्षित कर बच्चों का मित्रवत वातावरण में आकलन कराया जाएगा। यह नई शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन के तहत किए गए प्रयासों की प्रगति का मध्यावधि मूल्यांकन करेगा। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव, शिक्षक प्रशिक्षण और उपचारात्मक शिक्षण की रणनीति तय की जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। स्कूलों को कक्षा तीन के विद्यार्थियों का डेटा अद्यतन रखने, शांत कक्ष उपलब्ध कराने और अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं कि यह कोई पास-फेल परीक्षा नहीं है।
शिक्षकों को बच्चों में भयमुक्त वातावरण तैयार करने, नियमित अभ्यास कराने और कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित करने को कहा गया है।
वर्जन
एफएलएस 2026 केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भारत के शैक्षिक भविष्य का रोडमैप है। यह अध्ययन सुनिश्चित करेगा कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे और विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार हो सके। -राजेश वशिष्ठ जिला समन्वय एफएलएन, जींद।