फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   most of schools, industries and public offices have not fire safty in jind

जिले के 747 स्कूलों, 100 से अधिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नहीं है आग से बचाव के उपाय

Sun, 01 Mar 2020 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 12:30 AM IST
विज्ञापन
most of schools, industries and public offices have not fire safty in jind
नागरिक अस्पताल का पुरान भवन, जहां अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। - फोटो : Jind
जींद। जिले मेें अधिकतर उद्योगों और अन्य प्रतिष्ठानों में आग से सुरक्षा के नाम पर कोई तैयारी नहीं है। यहां तक की जिले के सभी सार्वजनिक भवन आग से सुरक्षित नहीं है। जिले में 747 सरकारी स्कूल व 100 से अधिक कोचिंग सेंटर बिना फायर सेफ्टी की एनओसी के ही चल रहे हैं। हालांकि हर बार हादसा होने पर प्रशासन इन भवनों में अग्नि सुरक्षा के लिए तमाम इंतजाम करने का दावा करता है, लेकिन हर बार यह दावे हवा-हवाई साबित होते हैं।
विज्ञापन

दो महीने पहले जिला दमकल केंद्र की ओर से जिले के तमाम ऐसे भवनों का सर्वेक्षण करवाया गया। इस दौरान सामने आया कि एकाध भवन को छोड़कर अधिकतर में अग्नि सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो, जान व माल की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं हैं। सबसे हैरान की बात है कि शिक्षण संस्थाओं तक में आग से निपटने के लिए इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में अग्निशमन विभाग ने अभी सिर्फ 70 प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजे हैं।
विज्ञापन

अस्पताल से लेकर लघुसचिवालय तक असुरक्षित
जिले में अधिकतर सार्वजनिक कार्यालय आग से असुरक्षित हैं। इनमें जींद मुख्यालय पर स्थित लघुसचिवालय से लेकर जिला अस्पताल तक में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगे हुए हैं। हालांकि दोनों ही भवनों में अग्नि सुरक्षा के लिए इंतजाम किए गए हैं, लेकिन वे चालू हालत में नहीं हैं। वहीं नागरिक अस्पताल के पुराने भवन में अग्नि सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है अग्नि सुरक्षा एनओसी की स्थिति
दो माह पहले हुए सर्वेक्षण में सामने आया कि जिले में 152 औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से महज 40 में ही आग से बचाने के लिए सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं। वहीं जिला में 747 सरकारी स्कूल में हैं। इनमें से किसी में भी अग्नि सुरक्षा के लिए उपाय नहीं किए गए हैं।
डेढ़ साल में चार बड़े हादसे
पिछले डेढ़ साल में चार बड़े हादसे आग लगने से हो चुके हैं। इन सभी में आग लगने पर पता चला कि यहां अग्नि सुरक्षा के नाम पर कोई तैयारी नहीं है। डेढ़ साल पहले औद्योगिक क्षेत्र में हरियाणा लेदर केमिकल फैक्टरी में आग लगी थी। इसमें दो कर्मचारी झुलस गए थे। इसके बाद भिवानी रोड स्थित एक कॉटन मिल में आग लगी। इसमें कोई जानी नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन काफी कपास जल गई। रधाना गांव स्थित एक फैक्टरी में आग लगने से भारी नुकसान हुआ था। पिछले ही साल सफीदों रोड पर गत्ता फैक्टरी में गेहूं के फानों से आ लग गई थी।
मार्केट में आ चुकी हैं सेंसर आधारित तकनीक, यहां परंपरागत भी नहीं
आग पर काबू पाने के लिए वर्तमान में काफी आधुनिक तकनीक आ चुकी हैं। इनमें सेंसर आधारित स्प्रिंकलर तकनीक है। इसमें इस प्रकार से व्यवस्था की जाती है कि एक खास तापमान होने पर वाल्व अपने आप ही खुल जाते हैं और पानी की बौछारें शुरू हो जाती है। लेकिन जींद जिले के बड़े प्रतिष्ठानों में अभी तक परंपरागत पानी से आग बुझाने की व्यवस्था तक नहीं है।
70 को भेजा नोटिस : सहायक दमकल अधिकारी
दमकल विभाग समय-समय पर सभी भवनों का सर्वेक्षण करता है। दिसंबर में जिलेभर की औद्योगिक इकाइयों का सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद उद्योगों में एनओसी के लिए प्रक्रिया शुरू हुई है। शहर में कमर्शिलय भवनों का भी सर्वेक्षण किया है। इनमें बड़े शोरूम, मॉल शामिल हैं। इनमें भी सुरक्षा की व्यवस्था नहीं हैं। 70 लोगों को नोटिस भेजा है। बाकियों को इनको नोटिस भेजे जा रहे हैं। - सुनील वर्मा, सहायक दमकल केंद्र अधिकारी।

सभी भवनों का होगा निरीक्षण : एडीसी
यह बेहद गंभीर मामला है। इसको लेकर प्रशासन विशेषतौर पर काम करेगा। जल्द ही सभी सरकारी भवनों की फायर विजिट करवाई जाएगी। इसके हिसाब से उन भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण लगाए जाएंगे। - डॉ. सत्येंद्र दूहन, एडीसी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed