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Jind News: पराली प्रबंधन और प्राकृतिक खेती अपनाने का दिया संदेश
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18जेएनडी02: किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करते हुए कृषि विशेषज्ञ। स्रोत : कर्मच
जुलाना। कृषि विभाग जुलाना और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पांडू पिंडारा के संयुक्त तत्वावधान में गांव किनाना में वीरवार को खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि जागरुकता शिविर में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, पराली प्रबंधन और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धीरज ने कहा कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए अंधाधुंध खाद डालने के बजाय मिट्टी की जांच करवाकर आवश्यकतानुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे खेती की लागत कम होगी और जमीन की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवि ने किसानों को सरकार की क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और मिट्टी के उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
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आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर भूमि की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है। सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) अनिल कुमार ने प्राकृतिक खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।
शिविर में किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की और समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर रणजीत, रविंद्र, अशोक, सुलतान मौजूद रहे।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धीरज ने कहा कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए अंधाधुंध खाद डालने के बजाय मिट्टी की जांच करवाकर आवश्यकतानुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे खेती की लागत कम होगी और जमीन की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवि ने किसानों को सरकार की क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (सीआरएम) योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और मिट्टी के उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
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आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर भूमि की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है। सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) अनिल कुमार ने प्राकृतिक खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।
शिविर में किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की और समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर रणजीत, रविंद्र, अशोक, सुलतान मौजूद रहे।