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पुरुषों ने दिल्ली बॉर्डर तो महिलाएं संभाल रहीं घर और खेती : सिक्किम
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खेत में काम करती महिला किसान।
- फोटो : Jind
उचाना/नरवाना। कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग के लिए खटकड़ टोल पर 45 दिनों से किसानों का धरना जारी है। यहां पर किसानों की भीड़ निरंतर बढ़ रही है। आसपास के गांवों से ट्रैक्टरों में किसान व महिलाएं धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। वाल्मीकि समाज ने धरना स्थल पर पहुंच कर किसान आंदोलन को समर्थन दिया। महिला किसान नेता सिक्किम सफा खेड़ी ने कहा कि इस आंदोलन में पुरुषों के बराबर महिलाओं की भागीदारी रही है। परिवार के सदस्य दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के साथ धरना दे रहे हैं तो महिलाएं खेत का काम संभाल रही हैं। केंद्र सरकार को यह कृषि कानून रद्द करने होंगे।
सर्व जातीय खेड़ा खाप प्रधान सतबीर पहलान बरसोला ने कहा कि किसान अपनी एकता साबित करते हुए अपने मकानों पर भाकियू का झंडा लगाएं। गांवों में टीमें बना कर मकानों पर भाकियू का झंडा लगाओ अभियान चलाया जाएगा। पहलवान ने कहा कि किसान यह तय कर चुका है कि जब तब कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक घर वापसी नहीं होगी। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों के लिए बनाए गए हैं। जब किसान इन कानूनों को नहीं चाहते हैं तो क्यों इन कानूनों को लागू करने पर सरकार अड़ी है। किसान शंातिपूर्वक तरीके से अपना धरना जारी रखेगा। किसान आंदोलन को हर किसी का समर्थन आज मिल रहा है। हर राज्य में किसान अपने-अपने स्तर पर प्रदर्शन कर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
वाल्मीकि समाज ने किसान आंदोलन का किया समर्थन
कृषि कानूनों के विरोध में बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसानों का धरना और क्रमिक अनशन जारी है। सोमवार को वाल्मीकि समाज ने किसान आंदोलन का समर्थन किया और 31 हजार रुपये का सहयोग किया। वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और अन्नदाता 36 बिरादरी का होता है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज किसानों के साथ है। सोमवार को क्रमिक अनशन पर पांच युवाओं ने भागीदारी दर्ज की। किसान नेता सुनील बद्दोवाल ने कहा कि बद्दोवाल टोल पर किसानों की सख्यां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सरकार किसानों की बातें नहीं मानकर अन्नदाता को परेशान कर रही है। देश का किसान लगातार शहादत दे रहा है। उन्होंने सिंगवाल के किसान कर्मवीर की शहादत पर कहा कि सरकार को किसानों की सुध लेनी चाहिए और जल्द से जल्द कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने मृतक किसान के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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सर्व जातीय खेड़ा खाप प्रधान सतबीर पहलान बरसोला ने कहा कि किसान अपनी एकता साबित करते हुए अपने मकानों पर भाकियू का झंडा लगाएं। गांवों में टीमें बना कर मकानों पर भाकियू का झंडा लगाओ अभियान चलाया जाएगा। पहलवान ने कहा कि किसान यह तय कर चुका है कि जब तब कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक घर वापसी नहीं होगी। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों के लिए बनाए गए हैं। जब किसान इन कानूनों को नहीं चाहते हैं तो क्यों इन कानूनों को लागू करने पर सरकार अड़ी है। किसान शंातिपूर्वक तरीके से अपना धरना जारी रखेगा। किसान आंदोलन को हर किसी का समर्थन आज मिल रहा है। हर राज्य में किसान अपने-अपने स्तर पर प्रदर्शन कर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
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वाल्मीकि समाज ने किसान आंदोलन का किया समर्थन
कृषि कानूनों के विरोध में बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसानों का धरना और क्रमिक अनशन जारी है। सोमवार को वाल्मीकि समाज ने किसान आंदोलन का समर्थन किया और 31 हजार रुपये का सहयोग किया। वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि किसान देश का अन्नदाता है और अन्नदाता 36 बिरादरी का होता है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज किसानों के साथ है। सोमवार को क्रमिक अनशन पर पांच युवाओं ने भागीदारी दर्ज की। किसान नेता सुनील बद्दोवाल ने कहा कि बद्दोवाल टोल पर किसानों की सख्यां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सरकार किसानों की बातें नहीं मानकर अन्नदाता को परेशान कर रही है। देश का किसान लगातार शहादत दे रहा है। उन्होंने सिंगवाल के किसान कर्मवीर की शहादत पर कहा कि सरकार को किसानों की सुध लेनी चाहिए और जल्द से जल्द कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने मृतक किसान के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

किसान आंदोलन के समर्थन में सहायता राशि देते वाल्मीकि समाज के लोग। संवाद- फोटो : Jind

बद्दोवाल टोल पर क्रमिक अनशन पर रहने वाले युवा नारेबाजी करते हुए। - फोटो : Jind
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