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हरियाणवी लोक संस्कृति हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा : प्रो. सैनी
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फोटो 09जेएनडी18-सीआरएसयू में चल रही कार्यशाला में मौजूद छात्राएं और आयोजक। स्रोत विवि
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं हरियाणा तथा ओम विद्या एंटरटेनमेंट ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय हरियाणवी एवं लूर नृत्य कार्यशाला का मंगलवार को समापन हो गया।
कार्यशाला में प्रसिद्ध नृत्य प्रशिक्षक ओवी पवनराज एवं भोजराज ने प्रतिभागियों को हरियाणवी और लूर नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को पारंपरिक नृत्य शैलियों, भाव-भंगिमाओं और लोकनृत्यों से जुड़ी सांस्कृतिक विशेषताओं से भी अवगत करवाया गया।
कुलपति प्रो. डॉ. राम पाल सैनी ने कहा कि हरियाणवी लोक संस्कृति हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से हमारी परंपराएं, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्य भावी पीढ़ी तक पहुंचते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने के साथ लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपनी लोक परंपराओं के प्रति जागरूक रहें और इनके संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय योगदान दें।
उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा तथा ओम विद्या एंटरटेनमेंट ग्रुप के प्रयासों की सराहना की। डायरेक्टर डीवाईसीए डॉ. अनिल कुमार तथा ओएसडी टू वाइस चांसलर डॉ. विजय कुमार भी मौजूद रहे।
ओम विद्या एंटरटेनमेंट ग्रुप के निदेशक ओवी पवनराज ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. राम पाल सैनी और कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को हरियाणवी संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से जोड़ने और लोकनृत्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने भविष्य में भी लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।
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कार्यशाला में प्रसिद्ध नृत्य प्रशिक्षक ओवी पवनराज एवं भोजराज ने प्रतिभागियों को हरियाणवी और लूर नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को पारंपरिक नृत्य शैलियों, भाव-भंगिमाओं और लोकनृत्यों से जुड़ी सांस्कृतिक विशेषताओं से भी अवगत करवाया गया।
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कुलपति प्रो. डॉ. राम पाल सैनी ने कहा कि हरियाणवी लोक संस्कृति हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से हमारी परंपराएं, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्य भावी पीढ़ी तक पहुंचते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने के साथ लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपनी लोक परंपराओं के प्रति जागरूक रहें और इनके संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय योगदान दें।
उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा तथा ओम विद्या एंटरटेनमेंट ग्रुप के प्रयासों की सराहना की। डायरेक्टर डीवाईसीए डॉ. अनिल कुमार तथा ओएसडी टू वाइस चांसलर डॉ. विजय कुमार भी मौजूद रहे।
ओम विद्या एंटरटेनमेंट ग्रुप के निदेशक ओवी पवनराज ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. राम पाल सैनी और कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को हरियाणवी संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से जोड़ने और लोकनृत्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने भविष्य में भी लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।