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साहित्य व शिक्षा एक-दूसरे के पूरक : धर्मदेव
Wed, 06 Aug 2025 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 06 Aug 2025 12:18 AM IST
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05जेएनडी26: श्री संत साहित्य सम्मान से सम्मानित होते सागरनामा साहित्यिक मंच के सदस्य। साहित्य
- फोटो : दुकान पर राखी देखतीं युवतियां।
जींद। सागरनामा साहित्यिक मंच ने हांसी में 3 अगस्त को चौथा स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम का संचालन मंच की उपाध्यक्ष रश्मि विद्यार्थी ने किया। इसमें मुख्यातिथि के तौर पर हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी व विशिष्ट अतिथि के तौर पर पवन कुमार रापड़िया ने शिरकत की।
इसमें डॉ. धर्मदेव ने कहा कि साहित्य और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। जब साहित्य संवेदनशीलता सिखाता है तब शिक्षक उसे संस्कारों के साथ जीवन में उतारने का माध्यम बनते हैं। सागरनामा मंच की यह पहल सराहनीय है कि उसने लेखकों और शिक्षकों दोनों को साथ मंच पर स्थान दिया। सागरनामा मंच के संस्थापक युवा गजलकार सुरेंद्र सागर ने कहा कि सागरनामा मंच की स्थापना एक सपने से हुई थी।
ऐसा मंच जो लेखनी को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखे, बल्कि समाज तक पहुंचाए। गुरविंदर बंगा ने कहा साहित्य केवल शब्दों का सजावटी खेल नहीं, बल्कि समाज की अंतरात्मा की आवाज है। जब मंच शिक्षा, साहित्य और संवेदनशीलता को एकत्र करता है, तब वह केवल आयोजन नहीं, एक सांस्कृतिक क्रांति का प्रारंभ बनता है। मंच की उपाध्यक्ष रश्मि विद्यार्थी ने कहा कि यह मंच निरंतर रचनात्मक संवाद, साहित्यिक चर्चाओं, ऑनलाइन लेखन कार्यशालाओं और युवा प्रतिभाओं को मंच देने जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहता है।
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इसमें डॉ. धर्मदेव ने कहा कि साहित्य और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। जब साहित्य संवेदनशीलता सिखाता है तब शिक्षक उसे संस्कारों के साथ जीवन में उतारने का माध्यम बनते हैं। सागरनामा मंच की यह पहल सराहनीय है कि उसने लेखकों और शिक्षकों दोनों को साथ मंच पर स्थान दिया। सागरनामा मंच के संस्थापक युवा गजलकार सुरेंद्र सागर ने कहा कि सागरनामा मंच की स्थापना एक सपने से हुई थी।
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ऐसा मंच जो लेखनी को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखे, बल्कि समाज तक पहुंचाए। गुरविंदर बंगा ने कहा साहित्य केवल शब्दों का सजावटी खेल नहीं, बल्कि समाज की अंतरात्मा की आवाज है। जब मंच शिक्षा, साहित्य और संवेदनशीलता को एकत्र करता है, तब वह केवल आयोजन नहीं, एक सांस्कृतिक क्रांति का प्रारंभ बनता है। मंच की उपाध्यक्ष रश्मि विद्यार्थी ने कहा कि यह मंच निरंतर रचनात्मक संवाद, साहित्यिक चर्चाओं, ऑनलाइन लेखन कार्यशालाओं और युवा प्रतिभाओं को मंच देने जैसी गतिविधियों में सक्रिय रहता है।
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