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जुलाना के किसान की टीकरी बॉर्डर पर हृदय गति रुकने से मौत
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किसान देवेंद्र का फाइल फोटो।
- फोटो : Jind
लगातार 9 माह से टीकरी बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे जुलाना के किसान की हृदय गति रुकने से रविवार को मौत हो गई। किसान के शव का सोमवार को बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम होगा।
जुलाना के वार्ड नंबर तीन निवासी 39 वर्षीय देवेंद्र किसान आंदोलन के दौरान लगातार 9 माह से दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहा था। देवेंद्र अपनी वृद्ध माता का इकलौता सहारा था। उसके पिता की मौत होने के कारण वही खेतीबाड़ी करता था। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू होने से लेकर अब तक वह टीकरी बार्डर पर धरना दे रहा था। रविवार दोपहर में देवेंद्र की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। देवेंद्र अविवाहित था। वह अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहता था। उसका भाई उससे अलग रहता है। जुलाना में चल रहे लंगर पर जैसे ही किसान की मौत की खबर लगी तो किसानों में मातम छा गया। देवेंद्र की मौत पर किसान नेताओं ने शोक प्रकट किया है।
सरकार किसानों के प्रति निर्दयी हो गई है। किसानों की लगातार शहादत हो रही है, लेकिन उसके कानों पर जूं तक नही रेंग रही है। 9 माह में लगभग 650 किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली सीमा पर शहीद हो चुके हैं। सरकार किसानों पर लाठी चलवाकर अन्याय कर रही है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द किसानों की मांगों को माने। किसान किसी भी सूरत में हार नहीं मानने वाले हैं। -गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन।
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जुलाना के वार्ड नंबर तीन निवासी 39 वर्षीय देवेंद्र किसान आंदोलन के दौरान लगातार 9 माह से दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर धरना दे रहा था। देवेंद्र अपनी वृद्ध माता का इकलौता सहारा था। उसके पिता की मौत होने के कारण वही खेतीबाड़ी करता था। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू होने से लेकर अब तक वह टीकरी बार्डर पर धरना दे रहा था। रविवार दोपहर में देवेंद्र की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। देवेंद्र अविवाहित था। वह अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहता था। उसका भाई उससे अलग रहता है। जुलाना में चल रहे लंगर पर जैसे ही किसान की मौत की खबर लगी तो किसानों में मातम छा गया। देवेंद्र की मौत पर किसान नेताओं ने शोक प्रकट किया है।
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सरकार किसानों के प्रति निर्दयी हो गई है। किसानों की लगातार शहादत हो रही है, लेकिन उसके कानों पर जूं तक नही रेंग रही है। 9 माह में लगभग 650 किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली सीमा पर शहीद हो चुके हैं। सरकार किसानों पर लाठी चलवाकर अन्याय कर रही है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द किसानों की मांगों को माने। किसान किसी भी सूरत में हार नहीं मानने वाले हैं। -गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन।
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