फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   jind, harayana,health, health department, dengu, mosquito, fever, harayana

सांसत में फंस गई लोगों की ‘जान’

Fri, 12 Aug 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
अमर उजाला ब्यूरो, जींद Updated Fri, 12 Aug 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन

 एक गाड़ी की व्यवस्था न होने के कारण शहर के बाशिंदों पर डेंगू-मलेरिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि इस संभावित खतरे से निपटने की जिम्मेदारी वाले स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद आजकल-आजकल का राग अलाप रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि डेंगू-मलेरिया से निपटने के लिए उसकी व्यापक योजना तैयार है। वहीं नगर परिषद अभी तक गंभीरता नहीं दिखा रहा। शहर में फॉगिंग को लेकर कोई तैयारी नहीं हुई है। ऐसे में शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में मच्छर जनित रोगों के पनपने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बरसात के दिनों में विभागों में आपसी तालमेल की कमी और पल्ला झाड़ने की आदत आम आदमी पर भारी पड़ सकती है। वर्ष 2015 में स्वास्थ्य विभाग के पास मलेरिया के 45 केस आए थे। इनमें से अगस्त माह तक मलेरिया के 18 केस सामने आ चुके थे। जबकि इस साल जुलाई और अगस्त माह में कुल 10  केस मलेरिया के आ चुके हैं। आठ केस जुलाई और दो केस अगस्त में पॉजिटिव मिले हैं। अभी तक डेंगू का कोई केस नहीं आया है, पिछले साल अगस्त माह में एक डेंगू पॉजिटिव मिला था।
विज्ञापन



वर्ष         जनसंख्या        मलेरिया के केस    डेंगू के केस
विज्ञापन
विज्ञापन

2006        1279214           5944         5
2007        1290832           7235         4
2008        1295397           6558        11
2009        1330494           3607         0    
2010        1357045            583          1
2011        1364861            656         3
2012        1373431            771        17
2013        1378663            322        48
2014        1386809              51        01
2015        1389777              45        668
2016        1393742              10        00

डेंगू के लक्षण
तेज बुखार होना, आंखों के पिछले भाग में दर्द होना, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, शरीर पर खसरे जैसे दाने निकलना, उल्टी आना, जी मचलना, सिर के अगले हिस्से में तेज दर्द, भूख कम लगना।

बचाव और रोकथाम
मच्छरों को नष्ट करने के लिए घरों में कीटनाशकों का छिड़काव। घरों में और आसपास गड्ढों, नालियों, बेकार पड़े खाली डिब्बों, पानी की टंकियों, गमलों, टायर ट्यूब में पानी एकत्रित न होने दें। सप्ताह में एक बार पानी से भरी टंकियों, मटके, कूलर आदि को खाली करके सुखा दें। पेयजल स्रोतों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता से टेमोफोस नामक दवाई समय-समय पर डालें। पानी के स्थायी स्रोतों में मछलियां छुड़वाने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें। जहां जलभराव होने से रोका न जा सके वहां पानी पर मिट्टी का तेल या जला हुआ तेल (मोबिल ऑयल) छिड़कें। खिड़कियों, दरवाजों में जालियां लगवा लें। मच्छर दानी का इस्तेमाल करें या मच्छर निवारक क्रीम, सरसों का तेल आदि इस्तेमाल करें।

सात में से पांच मशीनें नपा को सौंपी
स्वास्थ्य विभाग के पास फॉगिंग के लिए सात मशीनें थी, इनमें से पांच मशीनें नगर परिषद को देे दी हैं। शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग करवाने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है। दो मशीनों से स्वास्थ्य विभाग वहां पर फॉगिंग करवाएगा, जहां से संदिग्ध केस सामने आते हैं। नोडल अधिकारी डा. आरएस तंवर के अनुसार पूरे जिले में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए सब सेंटरों पर 164 टीमों का गठन किया है। एक टीम में एक सुपरवाइजर और पांच कर्मचारी हैं। शहर के लिए 14 टीमें लगी हैं।

प्लेटलेट्स टेस्ट की ही सुविधा
पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 668 केस सामने आए थे। जिले में करीब आधा दर्जन लोगों की मौत डेंगू के कारण हुई थी। हालांकि सामान्य अस्पताल में डेंगू की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अलग से लैब बनाई है। लैब में प्रतिदिन 70 के करीब सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। प्लेटलेट्स की जांच के लिए भी मशीन है। डेंगू की जांच के लिए प्लेटलेट्स टेस्ट और सिरोलाजी कन्फर्म टेस्ट होते हैं। लैब में केवल प्लेटलेट्स टेस्ट की ही सुविधा है।



एक सप्ताह में मिलेगा वाहन
शहर में फॉगिंग करवाने के लिए वाहन का इंतजाम किया जा रहा है। अभी तक वाहन का इंतजाम नहीं हो पाया है। इस सप्ताह के अंत तक वाहन का इंतजाम कर फॉगिंग का काम शुरू करवा दिया जाएगा। - अशोक कुमार, स्वास्थ्य निरीक्षक, नगर परिषद, जींद


लार्वा खत्म करने के लिए रोडवेज से पांच ड्रम काले तेल के मंगवाए हैं। जहां-जहां भी जलभराव है वहां पर काला तेल डलवाया जा रहा है। छप्पड़ और तालाबों में गंबुजिया मछलियां डालने का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं विभाग को जिन गांवों में स्प्रे करवाने के निर्देश मिले थे, उन गांवों में डेल्टा मैनथिल के स्प्रे का एक राउंड पूरा हो चुका है अब दूसरा राउंड चल रहा है। - डा. आरएस तंवर, नोडल अधिकारी नागरिक अस्पताल, जींद


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed