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मानव जीवन मनुष्यों की भलाई के लिए है : सुखदेव महाराज
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18जेएनडी17-11 दिवसीय अखंड जाप कार्यक्रम में भजन करती महिलाएं। स्रोत संगठन
जींद। महान शक्ति संगठन कला धाम की तरफ से महाज्ञानी प्यारे महान कलाधारी महाराज की प्रेरणा से सुख शांति व विश्व कल्याण के लिए रामराये गेट पर रहे 11 दिवसीय अखंड जाप एवं महा ब्रह्मज्ञान यज्ञ के सातवें दिन अखंड जाप किया।
इस दौरान ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि अपने पूर्ण पारब्रह्म सतगुरु पर सच्ची श्रद्धा, अटूट निश्चय और पक्का विश्वास ही शिष्य को अमृत की प्राप्ति करवाते हैं। सतगुरु से प्राप्त सत्य गूढ़ ज्ञान द्वारा धर्म के सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही परमपिता प्रभु की प्राप्ति संभव है। परोपकार केवल वहीं है, जो बिना किसी इच्छा और निस्वार्थ भाव से संपूर्ण तन-मन-धन से समर्पित होकर सभी मनुष्यों की भलाई और विश्व कल्याण के लिए कार्य करें।
सुखदेव महाराज ने कहा कि यह मानव जीवन भगवान ने स्वार्थ के लिए नहीं दिया बल्कि सभी मनुष्यों की भलाई और परोपकार के लिए ही दिया है, इसलिए सभी मनुष्यों को सत्य के संग द्वारा परमपिता से जुड़ कर सारे विश्व में ही प्रभु प्रेम, आनंद और खुशियों को बांट कर परोपकारी बनना चाहिए। परमपिता प्रभु भगवान परोपकारी को अपने सच्चे प्रेम, वास्तविक आनंद और असली माल से मालोमाल बना देते हैं। सुखदेव महाराज ने महामंत्र जय निराधार जय कलाकार की पावन ध्वनि से अखंड जाप करवाते हुए कहा कि सेवा, सिमरन और दान, ये तीनों कर्म है उत्तम योनि के। जिसने प्रभु प्रेम और सत्य को जीवन में उतार लिया, उसने ही संसार के सभी दुखों से छुटकारा पा लिया। हर समय दुखी एवं लाचार जीवों की भलाई के लिए तत्पर रहना चाहिए और शुभ कार्य करते हुए कभी मन में अहंकार नहीं आना चाहिए।
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इस दौरान ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि अपने पूर्ण पारब्रह्म सतगुरु पर सच्ची श्रद्धा, अटूट निश्चय और पक्का विश्वास ही शिष्य को अमृत की प्राप्ति करवाते हैं। सतगुरु से प्राप्त सत्य गूढ़ ज्ञान द्वारा धर्म के सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही परमपिता प्रभु की प्राप्ति संभव है। परोपकार केवल वहीं है, जो बिना किसी इच्छा और निस्वार्थ भाव से संपूर्ण तन-मन-धन से समर्पित होकर सभी मनुष्यों की भलाई और विश्व कल्याण के लिए कार्य करें।
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सुखदेव महाराज ने कहा कि यह मानव जीवन भगवान ने स्वार्थ के लिए नहीं दिया बल्कि सभी मनुष्यों की भलाई और परोपकार के लिए ही दिया है, इसलिए सभी मनुष्यों को सत्य के संग द्वारा परमपिता से जुड़ कर सारे विश्व में ही प्रभु प्रेम, आनंद और खुशियों को बांट कर परोपकारी बनना चाहिए। परमपिता प्रभु भगवान परोपकारी को अपने सच्चे प्रेम, वास्तविक आनंद और असली माल से मालोमाल बना देते हैं। सुखदेव महाराज ने महामंत्र जय निराधार जय कलाकार की पावन ध्वनि से अखंड जाप करवाते हुए कहा कि सेवा, सिमरन और दान, ये तीनों कर्म है उत्तम योनि के। जिसने प्रभु प्रेम और सत्य को जीवन में उतार लिया, उसने ही संसार के सभी दुखों से छुटकारा पा लिया। हर समय दुखी एवं लाचार जीवों की भलाई के लिए तत्पर रहना चाहिए और शुभ कार्य करते हुए कभी मन में अहंकार नहीं आना चाहिए।
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