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संसद में बिल पास होने पर खुशी, लेकिन जश्न नहीं मनाएंगे : पालवां
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दरोली खेड़ा गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक करते किसान नेता।
- फोटो : Jind
उचाना। उपमंडल कार्यालय में विभिन्न मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा उचाना का धरना जारी है। किसान नेता आजाद पालवां ने कहा कि जब तक किसान व मजदूरों की सभी मांगें नहीं मानी जातीं, जजपा और भाजपा के नेताओं का विरोध जारी रहेगा। संसद में बिल पास होने पर खुशी है, लेकिन जश्न नहीं मनाएंगे।
उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई भी जजपा या भाजपा का नेता हलके के गांवों में आएगा तो उसका विरोध किया जाएगा। जानबूझ कर भाईचारे को खराब करने के लिए गठबंधन सरकार के नेता गांव में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन किसान व मजदूरों के लिए ऐतिहासिक है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। आज के दिन कृषि कानून वापस लेने के लिए बिल संसद में पास हुए। आज के दिन खुशी है, लेकिन जश्न नहीं मनाएंगे, क्योंकि हमारे 700 से अधिक किसान इस आंदोलन में मौत का ग्रास बन चुके हैं। एमएसपी किसान का हक है। किसान मेहनत कर फसल को तैयार कर मंडी लाता है। एमएसपी पर जब तक कानून नहीं बनेगा, किसान को फसल का उचित भाव नहीं मिलेगा। आज खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। सत्ता में आने से पहले तो किसान हित में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है। पालवां कहा कि भाजपा सत्ता में आने से पहले स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा करती थी। केंद्र में सात साल से अधिक समय भाजपा को हो गया है, लेकिन स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की गई। किसान व मजदूर की तपस्या से एक साल से अधिक समय जन आंदोलन हो हो चुका है। किसान सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ चुके हैं। केंद्र सरकार संयुक्त मोर्चा द्वारा लिखी गई चिट्ठी की मांगों को मानते हुए एमएसपी पर कानून बनाने सहित अन्य मांगों को पूरा करें, ताकि किसान व मजदूर घर वापसी करें। एक साल घर छोड़कर अपनी मांगों को लेकर किसान व मजदूर धरने दे रहे हैं।
दरोली खेड़ा में किसानों ने की बैठक
दरोली खेड़ा गांव में किसानों ने ग्रामीणों के साथ बैठक की। आजाद पालवां ने बताया कि एक दिसंबर को गांव में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आने की की सूचना मिली है। गांव के लोगों से उपमंडल कार्यालय में चल रहा धरना कमेटी के सदस्य निवेदन करने आए हैं कि दुष्यंत चौटाला को गांव में नहीं बुलाएं। जब तक किसान आंदोलन चलेगा, जजपा व भाजपा के नेताओं का विरोध किसान व मजदूर करेंगे। दुष्यंत चौटाला एक दिसंबर को अगर दरोली खेड़ा आते हैं तो उसका विरोध करेंगे।
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उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई भी जजपा या भाजपा का नेता हलके के गांवों में आएगा तो उसका विरोध किया जाएगा। जानबूझ कर भाईचारे को खराब करने के लिए गठबंधन सरकार के नेता गांव में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन किसान व मजदूरों के लिए ऐतिहासिक है, जो हमेशा याद रखा जाएगा। आज के दिन कृषि कानून वापस लेने के लिए बिल संसद में पास हुए। आज के दिन खुशी है, लेकिन जश्न नहीं मनाएंगे, क्योंकि हमारे 700 से अधिक किसान इस आंदोलन में मौत का ग्रास बन चुके हैं। एमएसपी किसान का हक है। किसान मेहनत कर फसल को तैयार कर मंडी लाता है। एमएसपी पर जब तक कानून नहीं बनेगा, किसान को फसल का उचित भाव नहीं मिलेगा। आज खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। सत्ता में आने से पहले तो किसान हित में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है। पालवां कहा कि भाजपा सत्ता में आने से पहले स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा करती थी। केंद्र में सात साल से अधिक समय भाजपा को हो गया है, लेकिन स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की गई। किसान व मजदूर की तपस्या से एक साल से अधिक समय जन आंदोलन हो हो चुका है। किसान सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ चुके हैं। केंद्र सरकार संयुक्त मोर्चा द्वारा लिखी गई चिट्ठी की मांगों को मानते हुए एमएसपी पर कानून बनाने सहित अन्य मांगों को पूरा करें, ताकि किसान व मजदूर घर वापसी करें। एक साल घर छोड़कर अपनी मांगों को लेकर किसान व मजदूर धरने दे रहे हैं।
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दरोली खेड़ा में किसानों ने की बैठक
दरोली खेड़ा गांव में किसानों ने ग्रामीणों के साथ बैठक की। आजाद पालवां ने बताया कि एक दिसंबर को गांव में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के आने की की सूचना मिली है। गांव के लोगों से उपमंडल कार्यालय में चल रहा धरना कमेटी के सदस्य निवेदन करने आए हैं कि दुष्यंत चौटाला को गांव में नहीं बुलाएं। जब तक किसान आंदोलन चलेगा, जजपा व भाजपा के नेताओं का विरोध किसान व मजदूर करेंगे। दुष्यंत चौटाला एक दिसंबर को अगर दरोली खेड़ा आते हैं तो उसका विरोध करेंगे।
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