{"_id":"68e014e31de3770be70e9426","slug":"government-procurement-of-paddy-did-not-take-place-in-jind-mandi-even-today-jind-news-c-199-1-sroh1006-141960-2025-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: जींद मंडी में आज भी नहीं हुई धान की सरकारी खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: जींद मंडी में आज भी नहीं हुई धान की सरकारी खरीद
Fri, 03 Oct 2025 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 03 Oct 2025 11:54 PM IST
विज्ञापन
03जेएनडी17-अनाज मंडी जींद में पहुंची धान की फसल। संवाद
जींद। जिले में अब तक 4 हजार मीट्रिक टन धान की आवक हुई। वहीं जींद की अनाज मंडी में आज भी सरकारी खरीद नहीं हुई। जिले में धान की सर्वाधिक आवक नरवाना मंडी में रही, जहां अब तक 1650 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है।
इसके अलावा पिल्लूखेड़ा मंडी में 1178 मीट्रिक टन, उचाना मंडी में 515 मीट्रिक टन, सफीदों में 18 मीट्रिक टन, धमतान मंडी में 637 मीट्रिक टन, अलेवा मंडी में 411 मीट्रिक टन, सफीदों मंडी में 18 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है।
डीसी ने किसानों से आह्वान किया कि पराली को जलाने के बजाय इसे आय का साधन बनाएं। पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है जिससे फसल उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत किसान पराली को बेचकर अथवा उससे विभिन्न उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
विज्ञापन
पराली का वैज्ञानिक एवं समुचित प्रबंधन किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा। पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा तथा वायु प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाएगा। साथ ही इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम होंगे और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
वर्जन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड व हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद की जा रही है। मंडियों में किसानों के लिए पर्याप्त सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी, जींद
विज्ञापन
इसके अलावा पिल्लूखेड़ा मंडी में 1178 मीट्रिक टन, उचाना मंडी में 515 मीट्रिक टन, सफीदों में 18 मीट्रिक टन, धमतान मंडी में 637 मीट्रिक टन, अलेवा मंडी में 411 मीट्रिक टन, सफीदों मंडी में 18 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है।
विज्ञापन
डीसी ने किसानों से आह्वान किया कि पराली को जलाने के बजाय इसे आय का साधन बनाएं। पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है जिससे फसल उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत किसान पराली को बेचकर अथवा उससे विभिन्न उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
विज्ञापन
पराली का वैज्ञानिक एवं समुचित प्रबंधन किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा। पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा तथा वायु प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाएगा। साथ ही इससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम होंगे और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
वर्जन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड व हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद की जा रही है। मंडियों में किसानों के लिए पर्याप्त सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी, जींद