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Jind News: 26 शहीदों की प्रतिमाओं का इंतजार, दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे परिवार

Sun, 26 Jul 2026 12:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 12:08 AM IST
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Families await statues of 26 martyrs; have been making rounds of government offices for two years.
25जेएनडी09: अमर उजाला फाउंडेशन के संवाद कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सैनिक। संवाद
जींद। कारगिल विजय दिवस पर देश शहीदों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करता है। शहादत के बाद उनके परिवारों और वीर नारियों की समस्याओं की सुनवाई नहीं होती। इंडियन वेटरन्स एसोसिएशन के प्रधान कैप्टन आरएस रेढू ने अमर उजाला फाउंडेशन के संवाद कार्यक्रम में शहीद परिवारों की अनदेखी का यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
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आरएस रेढू ने बताया कि जिले में कुल 78 अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं स्थापित की जानी थीं। इनमें से 26 शहीदों की प्रतिमाएं आज भी स्थापित नहीं हो पाई हैं। सरकारी व्यवस्था के अनुसार, शहादत के छह माह के भीतर प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए लेकिन कई परिवारों को अपनी मांग पूरी कराने के लिए करीब दो साल से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाई है। हालांकि, अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। इस मौके पर इंडियन वेटरन्स संगठन से जुड़े पूर्व सैनिक केएस लोहान, बलवान सिंह, ईश्वर सिंह, शमशेर सिंह, जोगिंद्र सिंह, धर्मबीर सिंह एहलावत, सतबीर लाठर, राममेहर खर्ब और अमरनाथ जागलान मौजूद रहे।
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डीडीपीओ ने बजट नहीं होने की कही बात
पूर्व सैनिकों ने बताया कि शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित कराने के लिए वे जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) से भी मिले थे। वहां उन्हें बजट उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि जिस देश में शहीदों के सम्मान की बात बड़े स्तर पर की जाती है, वहां प्रतिमा स्थापना के लिए बजट का अभाव गंभीर विषय है। पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग की कि लंबित 26 प्रतिमाओं को जल्द स्थापित किया जाए।
पार्थिव शरीर के सामने एक दिन झुकने से सम्मान पूरा नहीं होता
इंडियन वेटरन्स संगठन से जुड़े पूर्व सैनिकों ने कहा कि शहीद के पार्थिव शरीर के सामने एक दिन झुकने से सम्मान पूरा नहीं होता। सच्चा सम्मान शहीद के परिवार का सम्मान करने और उनके लिए लगातार काम करने से होगा। वीर नारियों और वीर माताओं की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए। पूर्व सैनिकों ने मांग की कि वीरांगनाओं को एचकेआरएनएल के तहत उनके गृह जिले और उनके ही खंड में नौकरी दी जाए। इससे उन्हें नौकरी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और वे परिवार की जिम्मेदारियां भी आसानी से निभा सकेंगी।

11 जिलों की वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित करेगा संगठन
इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन की ओर से प्रदेश के 11 जिलों की वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए जुलाना में एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संगठन से जुड़े पूर्व सैनिकों ने कहा कि वीर नारियों और वीर माताओं का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं है यह समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। शहीद परिवारों की समस्याओं को लगातार उठाया जाता रहेगा।
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