{"_id":"635c26124afbd6547a7e75ac","slug":"eye-irritation-aqi-reached-334-jind-news-rtk6619675200","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंखों में होने लगी जलन, एक्यूआई पहुंचा 334","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंखों में होने लगी जलन, एक्यूआई पहुंचा 334
विज्ञापन
डीसी निवास के सामने ग्रीन बेल्ट में कूड़े में लगाई गई आग। संवाद।
- फोटो : Jind
जींद। जिले में बढ़ा वायु प्रदूषण अब शारीरिक नुकसान पहुंचाने लगा है। जहरीली होती जा रही हवा के कारण लोगों की आंखों में जलन होने लगी है तथा नागरिक अस्पताल में अस्थमा के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। इसके साथ-साथ बच्चों पर भी इसका असर पड़ने लगा है। शहर में जलने वाला कूड़ा, पराली तथा उडने वाली धूल इसका मुख्य कारण है। शुक्रवार को दिनभर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 334 व 371 के बीच घूमता रहा। चिकित्सकों के अनुसार बुजुर्गों को सुबह की सैर से भी अब बचना चाहिए।
शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर 334 रहा तो वीरवार को एक्यूआई 327, बुधवार को 302, मंगलवार को 276 रहा। 200 से ज्यादा एक्यूआई सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिवाली पर आतिशबाजी के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। शुक्रवार को दिन का आगाज तेज धूप से हुआ। जैसे-जैसे शाम होने लगी तो आसमान में धुआं सा छाने लगा और एक स्मॉग की चादर बन गई। इसका कारण दीपावली पर्व पर चलाए गए पटाखों को माना जा रहा है। वहीं किसान खेतों में पराली को भी जला रहे हैं। स्मॉग छाने के चलते शाम को दोपहिया वाहन चालकों को आंखों में जलन भी महसूस हुई। वहीं जींद की बात की जाए तो अबतक जिले में 121 जगहों पर फसल अवशेष जलाए जाने के मामले सामने हरसेक पर आ चुके हैं। नागरिक अस्पताल में पहले औसतन 50 के आसपास अस्थमा रोगी आते थे, जिनकी अब संख्या बढ़कर 250 तक पहुंच गई। जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा की दिक्कत है, उनको इस मौसम में और अधिक परेशानी होती है।
वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन के मामले सामने आ रहे हैं। लोगों को धूल भरे स्थान पर जाने से बचना चाहिए। इस मौसम में हमेशा चश्मा लगाए रखना चाहिए। दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट जरूर लगाना चाहिए। दिन में कम से कम चार बार आंखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए।
विज्ञापन
-डॉ. गीतांशु, नेत्र रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
विज्ञापन
शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर 334 रहा तो वीरवार को एक्यूआई 327, बुधवार को 302, मंगलवार को 276 रहा। 200 से ज्यादा एक्यूआई सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिवाली पर आतिशबाजी के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। शुक्रवार को दिन का आगाज तेज धूप से हुआ। जैसे-जैसे शाम होने लगी तो आसमान में धुआं सा छाने लगा और एक स्मॉग की चादर बन गई। इसका कारण दीपावली पर्व पर चलाए गए पटाखों को माना जा रहा है। वहीं किसान खेतों में पराली को भी जला रहे हैं। स्मॉग छाने के चलते शाम को दोपहिया वाहन चालकों को आंखों में जलन भी महसूस हुई। वहीं जींद की बात की जाए तो अबतक जिले में 121 जगहों पर फसल अवशेष जलाए जाने के मामले सामने हरसेक पर आ चुके हैं। नागरिक अस्पताल में पहले औसतन 50 के आसपास अस्थमा रोगी आते थे, जिनकी अब संख्या बढ़कर 250 तक पहुंच गई। जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा की दिक्कत है, उनको इस मौसम में और अधिक परेशानी होती है।
विज्ञापन
वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन के मामले सामने आ रहे हैं। लोगों को धूल भरे स्थान पर जाने से बचना चाहिए। इस मौसम में हमेशा चश्मा लगाए रखना चाहिए। दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट जरूर लगाना चाहिए। दिन में कम से कम चार बार आंखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए।
विज्ञापन
-डॉ. गीतांशु, नेत्र रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।