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Jind News: सीआरएसयू में ज्योतिबा फुले और डॉ. आंबेडकर जयंती पर प्रदर्शनी
Thu, 16 Apr 2026 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:01 AM IST
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15जेएनडी27: सीआरएसयू में प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कुलसचिव प्रो.सीमा गुप्ता और अन्य। स्रोत व
- फोटो : 1
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। प्रदर्शनी में चित्रों, पोस्टरों और लेखों के माध्यम से दोनों महान विभूतियों के जीवन संघर्ष, सामाजिक आंदोलनों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि फुले और डॉ. आंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही इन महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करना और उन्हें समानता व मानवता के मूल्यों के प्रति जागरूक करना है।
कुलसचिव प्रो. सीमा गुप्ता ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य हैं। यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं है बल्कि युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर समाज की असमानताओं को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश सिंहमार ने बताया कि प्रदर्शनी का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को महान विचारकों के जीवन से जोड़कर उनमें सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। इस अवसर पर शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक बताया।
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कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि फुले और डॉ. आंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही इन महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करना और उन्हें समानता व मानवता के मूल्यों के प्रति जागरूक करना है।
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कुलसचिव प्रो. सीमा गुप्ता ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य हैं। यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं है बल्कि युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर समाज की असमानताओं को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राकेश सिंहमार ने बताया कि प्रदर्शनी का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को महान विचारकों के जीवन से जोड़कर उनमें सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था। इस अवसर पर शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक बताया।