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रेलवे फाटकों पर जाम की समस्या से मिलेगा छुटकारा

Sat, 23 Jul 2016 01:02 AM IST
jind
jind Updated Sat, 23 Jul 2016 01:02 AM IST
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electric railway gate, jind
मश्‍ाीन चलाता रेलवे का कमऱ्र्मचारी - फोटो : bureau
रेलवे फाटकों पर ट्रेन के इंतजार में लगने वाले लंबे जाम से अब लोगों को छुटकारा मिलेगा। शहर के बीचोंबीच भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में दिल्ली-बठिंडा रेलवे सेक्शन पर तीन रेलवे क्रासिंग पर बिजली चालित फाटक लगाए गए हैं। भारतीय रेलवे की स्पीड में फाटक सबसे बड़ी बाधा हैं। इलेक्ट्रिक फाटक लगने के बाद ट्रेन भी अपनी पूरी स्पीड के साथ दौड़ेंगी, वहीं यात्रियों को भी फाटकों पर ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।
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दरअसल दिल्ली-बठिंडा रेलवे लाइन काफी व्यस्त रहती हैं। इस रेलवे लाइन पर प्रतिदिन 70 से अधिक ट्रेनों के फेरे होते हैं। इस रेलवे लाइन पर पुरानी हांसी रोड फाटक, भिवानी रोड फाटक, रोहतक-भिवानी रोड फाटक पर ज्यादा ट्रैफिक रहता है। इन तीनों ही रेलवे फाटकों का नियंत्रण बिशनपुरा रेलवे स्टेशन से है। अगर तीनों में से एक भी रेलवे फाटक पर कोई तकनीकी खराबी आ जाए, तो तीनों फाटकों पर यातायात प्रभावित होता है। रेलवे फाटक को लगाते या खोलते समय अक्सर रेलवे फाटक की तार टूट जाती हैं या फिर अन्य तकनीकी कारण आ जाता है। तकनीकी खराबी के कारण अगर फाटक बंद नहीं हो पाता, तो इस स्थिति में ट्रेन को उससे पिछले स्टेशन पर रोकना पड़ता है या फिर ट्रेन की गति धीमी करनी पड़ती है। इस वजह से कई बार ट्रेन अपने निर्धारित समय से लेट हो जाती हैं। वहीं कई बार ट्रेन के गुजर जाने के बाद तकनीकी कारण से फाटक नहीं खुलता है, जिससे वहां वाहनों की काफी लंबी लाइन लग जाती है। बिजली चालित लिफ्ट सिस्टम लगा देने से अब समय की बचत होगी। इलेक्ट्रिक सिग्नल से ट्रेन को समय से दौड़ाने में मदद मिलेगी। फिलहाल फाटक को खोलने में कर्मचारी को दो से तीन मिनट लग जाता है, वहीं बिजली चालित फाटक बटन दबाने से ही पलभर में काम करेगा।
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आठ घंटे में गुजरती हैं 26 गाड़ियां

रेलवे अधिकारियों के अनुसार सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक इस रूट पर 26 गाड़ियां आती हैं। इससे दिन के समय हर 20 मिनट में एक गाड़ी आती है। वहीं तीनों रेलवे क्रॉसिंग पर दिन भर में करीब 40 हजार वाहन निकलते हैं। इनमें से अधिकतर को फाटक समय से पहले बंद होने पर ट्रेन आने का इंतजार करना पड़ता है।
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इमरजेंसी में भी काम करेगा रेलवे फाटक
इलेक्ट्रिक फाटक के खराब होने की संभावना काफी कम हैं। अगर किसी वजह से तकनीकी खराबी आ भी जाए, तो भी फाटक को बंद करने का विकल्प मौजूद रहेगा। तीनों फाटकों पर रेलवे द्वारा इमरजेंसी गेट भी लगाए गए हैं, जो इलेक्ट्रिक फाटक के काम नहीं करने की दशा में लगाए जाएंगे।

फाटक बंद होने से पहले बजेगा सायरन
इलेक्ट्रिक फाटक बंद होने से पहले सायरन बजेगा और रेड लाइट जलेगी।, जिससे लोगों को दूर से ही पता चल जाएगा कि फाटक बंद हो रहा है। सुरक्षा के लिहाज से भी ये महत्वपूर्ण साबित होगा।   

जाम की समस्या से मिलेगा छुटकारा
अक्सर रेलवे क्रासिंग पर जाम की स्थिति बन जाती है। इलेक्ट्रिक फाटक लगने से ट्रेनें भी समय से चलेंगी और रेलवे फाटकों पर जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- रामजी, स्थानीय निवासी

सुरक्षा की दृष्टि से है महत्वपूर्ण
भिवानी व हांसी रोड पर कई बार फाटक खराब होने की वजह से शहर तक जाम लग जाता है। इलेक्ट्रिक फाटक लगने के बाद इस समस्या से निजात मिलेगी, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है।
- जय कुमार गोयल, स्थानीय निवासी

आधुनिकीकरण की दिशा में रेलवे का सराहनीय कदम
तीनों ही रेलवे फाटकों पर ट्रैफिक ज्यादा है। रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए यह कदम काफी सराहनीय है। इससे भारतीय रेलवे को नई गति मिलेगी और ट्रेन अपने निर्धारित समय पर चल सकेंगी।

- सतीश भारद्वाज, स्थानीय निवासी

जल्द शुरू होंगे इलेक्ट्रिक फाटक
तीन रेलवे क्रासिंग पर बिजली चालित फाटक लगाए गए हैं। जल्द ही ये फाटक शुरू होंगे। बिजली चालित फाटक लगने से समय की बचत होगी। यह सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी अहम है।
- जीपी गुप्ता, सीनियर सेक्शन इंजीनियर
रेलवे।
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