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मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु
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जयंती देवी मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। सावन माह के पहले सोमवार को शहर के सभी मंदिरों में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। शिवरात्रि के पर्व पर जैसे भीड़ मंदिर में होती है, वैसी ही भीड़ इस बार सावन के पहले सोमवार को हुई।
भगवान शंकर की पूजा करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। जयंती देवी मंदिर के पुजारी पंडित नवीन कुमार शास्त्री ने कहा कि सावन माह में शिव की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव पूजा से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के सोमवार को व्रत करने से भी लाभ होता है। उन्होंने कहा कि शिव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूर्ण करते हैं। सावन का पहला सोमवार व्रत 26 जुलाई को आया है। इसके बाद दूसरा सावन सोमवार व्रत दो अगस्त, तीसरा सावन सोमवार व्रत नौ अगस्त तथा चौथा सावन सोमवार व्रत 16 अगस्त को होगा। शहर के एतिहासिक जयंती देवी मंदिर, प्राचीन भूतेश्वर मंदिर, हरि कैलाश मंदिर, वनखंड महादेव मंदिर, ठिठारी महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की सुबह से ही मंदिरों के बाहर लाइन भी लगी। इसके लिए मंदिर प्रशासन द्वारा पहले ही तैयारी की गई थी। मंदिर में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज करवाया गया।
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि धर्म के साक्षात स्वरूप भगवान शिव हैं। श्रावण मास के सोमवार को रुद्राभिषेक संपन्न करने से समस्त दुखों का निवारण होता है व अक्षय लक्ष्मी की उपलब्धि होती है। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव का एक नाम रुद्र भी है। रुद्र का अर्थ है दैहिक, दैविक और भौतिक दुखों का निवारण करने वाले और रुद्र को अभिषेक प्रिय है। इसलिए श्रावण के महीने में जल, दूध, दही, शहद आदि विभिन्न द्रव्यों से शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक अभिषेक किए जाने की परंपरा है।
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भगवान शंकर की पूजा करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे थे। जयंती देवी मंदिर के पुजारी पंडित नवीन कुमार शास्त्री ने कहा कि सावन माह में शिव की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान शिव पूजा से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के सोमवार को व्रत करने से भी लाभ होता है। उन्होंने कहा कि शिव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूर्ण करते हैं। सावन का पहला सोमवार व्रत 26 जुलाई को आया है। इसके बाद दूसरा सावन सोमवार व्रत दो अगस्त, तीसरा सावन सोमवार व्रत नौ अगस्त तथा चौथा सावन सोमवार व्रत 16 अगस्त को होगा। शहर के एतिहासिक जयंती देवी मंदिर, प्राचीन भूतेश्वर मंदिर, हरि कैलाश मंदिर, वनखंड महादेव मंदिर, ठिठारी महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की सुबह से ही मंदिरों के बाहर लाइन भी लगी। इसके लिए मंदिर प्रशासन द्वारा पहले ही तैयारी की गई थी। मंदिर में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं के हाथों को सैनिटाइज करवाया गया।
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आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि धर्म के साक्षात स्वरूप भगवान शिव हैं। श्रावण मास के सोमवार को रुद्राभिषेक संपन्न करने से समस्त दुखों का निवारण होता है व अक्षय लक्ष्मी की उपलब्धि होती है। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव का एक नाम रुद्र भी है। रुद्र का अर्थ है दैहिक, दैविक और भौतिक दुखों का निवारण करने वाले और रुद्र को अभिषेक प्रिय है। इसलिए श्रावण के महीने में जल, दूध, दही, शहद आदि विभिन्न द्रव्यों से शिवलिंग का श्रद्धापूर्वक अभिषेक किए जाने की परंपरा है।
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