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सड़क हादसे का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट दिखाकर बीमा क्लेम लेने का मामला
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जींद। प्रदेश में कैंसर पीड़ितों की सड़क हादसे में मौत दिखाकर बीमा क्लेम लेने के मामले में सोनीपत एसटीएफ ने जिन सात लोगों के नाम जिला स्वास्थ्य विभाग को सौंपे थे, उनकी मौत की तारीख नहीं होने के कारण उनकी पोस्टमार्टम संबंधी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। इससे साफ है कि यह बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा है। जानकारों के अनुसार बीमा कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम नहीं दिया जा सकता। अब स्वास्थ्य विभाग अपनी यह रिपोर्ट जल्द ही सोनीपत एसटीएफ को सौंपेगा।
49 लोगों की फर्जी तरीके से सड़क हादसे में दिखाई गई मौत
बताते चलें कि एसटीएफ ने कैंसर पीड़ित लोगों की मौत को सड़क हादसे में दिखाकर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये का फर्जी क्लेम पास करवाने का मामला पकड़ा। इसमें सामने आया है कि ऐसे 49 लोग हरियाणा से हैं, जिनकी मौत फर्जी तरीके से सड़क हादसे में दिखाई गई है। एसटीएफ ने जिला स्वास्थ्य विभाग को जिन लोगों के नाम सौंपे, उनमें से सात लोग जींद जिले के हैं। एसटीएफ ने इन सात लोगों की पोस्टमार्टम से संबंधी रिपोर्ट की जानकारी मांगी है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इन लोगों की मौत किस तारीख को हुई, इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में विभाग को इन लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट संबंधी जानकारी देने में परेशानी आ रही है। अस्पताल प्रशासन के पास इस संबंध का कोई रिकॉर्ड नहीं होने से यह मामला सीधे-सीधे फर्जी साबित हो रहा है। मंगलवार तक विभाग अपनी रिपोर्ट एसटीएफ को सौंप देगा।
देवरड़ गांव के बलबीर के हुए थे छह बीमे
वर्ष 2016 में जिले के गांव देवरड़ निवासी बलबीर का मरने का बीमा करवाया गया था। बीमा करवाने के बाद उसका फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाया गया। इसके बाद उसका 30 लाख रुपये का बीमा क्लेम किया गया। चार नवंबर 2016 को देवरड़ गांव के ही जनार्दन शर्मा ने इसका पता चलने पर सीएम विंडो पर शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। बलबीर के विभिन्न छह कंपनियों से अलग-अलग बीमे करवाए गए थे।
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क्या कहते हैं जीवन बीमा निगम के एजेंट
भारतीय जीवन बीमा निगम के एजेंट सुरेश डाबोदिया ने कहा कि इस मामले में बीमा एजेंट की मिलीभगत जरूर होगी। बीमा एजेंट की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता। इस प्रकार के मामले को एक गिरोह ने मिलकर अंजाम दिया है। इसमें क्लेम के पैसे गिरोह के लोग आपस में मिलकर बांटते हैं। यदि बीमा एजेंट अपनी कंपनी के प्रति वफादार व बीमित व्यक्ति के प्रति जवाबदेह हो तो ऐसा कोई फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता। पैसे के लालच में ऐेसे बीमा एजेंट अपनी कंपनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
एक-दो दिन में सौंप दी जाएगी रिपोर्ट
एसटीएफ द्वारा जो रिपोर्ट मांगी गई थी, वह लगभग तैयार है। लोगों की मौत की तारीख नहीं होने के कारण इस बारे में कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। फिर भी जो हमारे पास जानकारी थी, वह उपलब्ध करवा दी जाएगी। एक-दो दिन में रिपोर्ट एसटीएफ को सौंप दी जाएगी।
-डॉ. जेके मान, आरएमओ, नागरिक अस्पताल, जींद।
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49 लोगों की फर्जी तरीके से सड़क हादसे में दिखाई गई मौत
बताते चलें कि एसटीएफ ने कैंसर पीड़ित लोगों की मौत को सड़क हादसे में दिखाकर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये का फर्जी क्लेम पास करवाने का मामला पकड़ा। इसमें सामने आया है कि ऐसे 49 लोग हरियाणा से हैं, जिनकी मौत फर्जी तरीके से सड़क हादसे में दिखाई गई है। एसटीएफ ने जिला स्वास्थ्य विभाग को जिन लोगों के नाम सौंपे, उनमें से सात लोग जींद जिले के हैं। एसटीएफ ने इन सात लोगों की पोस्टमार्टम से संबंधी रिपोर्ट की जानकारी मांगी है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इन लोगों की मौत किस तारीख को हुई, इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसे में विभाग को इन लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट संबंधी जानकारी देने में परेशानी आ रही है। अस्पताल प्रशासन के पास इस संबंध का कोई रिकॉर्ड नहीं होने से यह मामला सीधे-सीधे फर्जी साबित हो रहा है। मंगलवार तक विभाग अपनी रिपोर्ट एसटीएफ को सौंप देगा।
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देवरड़ गांव के बलबीर के हुए थे छह बीमे
वर्ष 2016 में जिले के गांव देवरड़ निवासी बलबीर का मरने का बीमा करवाया गया था। बीमा करवाने के बाद उसका फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाया गया। इसके बाद उसका 30 लाख रुपये का बीमा क्लेम किया गया। चार नवंबर 2016 को देवरड़ गांव के ही जनार्दन शर्मा ने इसका पता चलने पर सीएम विंडो पर शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। बलबीर के विभिन्न छह कंपनियों से अलग-अलग बीमे करवाए गए थे।
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क्या कहते हैं जीवन बीमा निगम के एजेंट
भारतीय जीवन बीमा निगम के एजेंट सुरेश डाबोदिया ने कहा कि इस मामले में बीमा एजेंट की मिलीभगत जरूर होगी। बीमा एजेंट की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता। इस प्रकार के मामले को एक गिरोह ने मिलकर अंजाम दिया है। इसमें क्लेम के पैसे गिरोह के लोग आपस में मिलकर बांटते हैं। यदि बीमा एजेंट अपनी कंपनी के प्रति वफादार व बीमित व्यक्ति के प्रति जवाबदेह हो तो ऐसा कोई फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता। पैसे के लालच में ऐेसे बीमा एजेंट अपनी कंपनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
एक-दो दिन में सौंप दी जाएगी रिपोर्ट
एसटीएफ द्वारा जो रिपोर्ट मांगी गई थी, वह लगभग तैयार है। लोगों की मौत की तारीख नहीं होने के कारण इस बारे में कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। फिर भी जो हमारे पास जानकारी थी, वह उपलब्ध करवा दी जाएगी। एक-दो दिन में रिपोर्ट एसटीएफ को सौंप दी जाएगी।
-डॉ. जेके मान, आरएमओ, नागरिक अस्पताल, जींद।