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बाजारों में अतिक्रमण दिन भर रेंगता रहता है शहर
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 09 Oct 2014 12:18 AM IST
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प्रशासन की लापहरवाही त्यौहारी सीजन में लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बाजार में हो रहे अतिक्रमण के कारण आए दिन जाम लगता है, लेकिन नगर परिषद और पुलिस इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। इसका खामियाजा बाजार में खरीदारी करने आए लोगों को भुगतना पड़ता है।
दिवाली का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ जाती है। ऐसे में शहर के बाजारों के दुकानदार भी दुकानों के बाहर तक सामान रख रहे हैं। यही अतिक्रमण शहर में जाम का कारण बन रहा है। अतिक्रमण के कारण शहर की गलियां पूरी तरह से सिकुड़ चुकी हैं। इसके साथ ही दुकानों के आगे अस्थाई दुकानें भी सज चुकी हैं। हालांकि कोर्ट ने शहर से अतिक्रमण को हटवाने के लिए कई बार नोटिस भी दी चुकी है, बावजूद अतिक्रमण कम होने के बजाये लगातार पैर पसार रहा है।
शहर के इंदिरा बाजार, पंजाबी बाजार, मेन बाजार, बैंक रोड मार्केट और फव्वारा चौक मार्केट मुख्य हैं। यहां पहले से ही गलियां तंग हैं, लेकिन दुकानों के आगे सामान रखने से दिन भर जाम लगा रहता है। कुछ दुकानदारों ने तो अपनी दुकानों के आगे की खाली जगह भी किराये पर अस्थाई दुकानें लगा दी हैं और इसके बदले में दुकानदार उन लोगों से किराया वसूल रहे हैं। शहर में बढ़ते अतिक्रमण के कारण यहां हर वक्त जाम की स्थिति रहती है राहगीरों का बाजार से निकलना मुश्किल को गया है लेकिन नगर परिषद इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत के आदेशों के बावजूद भी बाजार से अतिक्रमण खत्म नहीं हुआ है।
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नगर परिषद के आगे ही अतिक्रमण
यूं तो पूरा शहर अतिक्रमण की चपेट में है, लेकिन नगर परिषद, जिसका काम अतिक्रमण हटाना है, वहीं सबसे अधिक अतिक्रमण है। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन के ढीले रवैये के कारण ही अतिक्रमण बढ़ रहा है।
बॉक्स
बड़े वाहनों के प्रवेश पर लगे रोक
बाजार में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगानी चाहिए। बड़े वाहनों के कारण बाजार में जाम की स्थिति बनती है। इसके लिए यहां एक पुलिस कर्मी की स्थाई तौर पर ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। दुकानदारों को भी दुकान के आगे अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। दुकानदारों को भी बाजार से अतिक्रमण खत्म करने में अपना सहयोग देना चाहिए। शहर में आने वाले लोगों के वाहनों के खड़े करने के लिए बाजार के पास एक पार्किंग बनाई जाए, ताकि बाजार में खरीदारी करने के लिए आने वाले लोग यहां अपने वाहन खड़े कर सकें।
सुधीर जिंदल, प्रधान
घी-चीनी यूनियन, जनता बाजार
हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
जींद शहर की समस्याओं के समाधान को लेकर अन्ना टीम प्रयासरत है। शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अन्ना टीम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभी मामला चंडीगढ़ हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसमें हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी तथा जींद के डीसी को पार्टी बनाया गया है। वहीं अन्ना टीम ने अपने चुनावी एजेंडे में भी अतिक्रमण के मुद्दे को शामिल किया हुआ है।
हितेश हिंदुस्तानी, सदस्य
नप अधिकारियों ने साधी चुप्पी
शहर में बढ़ते अतिक्रमण के बारे में जब नगर परिषद के स्वच्छता अधीक्षक अशोक कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को टालते हुए इस बारे में नगर परिषद के एमई सुमित कुमार से संपर्क करने को कहा। जब एमई से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल स्वीच ऑफ मिला
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दिवाली का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ जाती है। ऐसे में शहर के बाजारों के दुकानदार भी दुकानों के बाहर तक सामान रख रहे हैं। यही अतिक्रमण शहर में जाम का कारण बन रहा है। अतिक्रमण के कारण शहर की गलियां पूरी तरह से सिकुड़ चुकी हैं। इसके साथ ही दुकानों के आगे अस्थाई दुकानें भी सज चुकी हैं। हालांकि कोर्ट ने शहर से अतिक्रमण को हटवाने के लिए कई बार नोटिस भी दी चुकी है, बावजूद अतिक्रमण कम होने के बजाये लगातार पैर पसार रहा है।
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शहर के इंदिरा बाजार, पंजाबी बाजार, मेन बाजार, बैंक रोड मार्केट और फव्वारा चौक मार्केट मुख्य हैं। यहां पहले से ही गलियां तंग हैं, लेकिन दुकानों के आगे सामान रखने से दिन भर जाम लगा रहता है। कुछ दुकानदारों ने तो अपनी दुकानों के आगे की खाली जगह भी किराये पर अस्थाई दुकानें लगा दी हैं और इसके बदले में दुकानदार उन लोगों से किराया वसूल रहे हैं। शहर में बढ़ते अतिक्रमण के कारण यहां हर वक्त जाम की स्थिति रहती है राहगीरों का बाजार से निकलना मुश्किल को गया है लेकिन नगर परिषद इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत के आदेशों के बावजूद भी बाजार से अतिक्रमण खत्म नहीं हुआ है।
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नगर परिषद के आगे ही अतिक्रमण
यूं तो पूरा शहर अतिक्रमण की चपेट में है, लेकिन नगर परिषद, जिसका काम अतिक्रमण हटाना है, वहीं सबसे अधिक अतिक्रमण है। इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन के ढीले रवैये के कारण ही अतिक्रमण बढ़ रहा है।
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बड़े वाहनों के प्रवेश पर लगे रोक
बाजार में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगानी चाहिए। बड़े वाहनों के कारण बाजार में जाम की स्थिति बनती है। इसके लिए यहां एक पुलिस कर्मी की स्थाई तौर पर ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। दुकानदारों को भी दुकान के आगे अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। दुकानदारों को भी बाजार से अतिक्रमण खत्म करने में अपना सहयोग देना चाहिए। शहर में आने वाले लोगों के वाहनों के खड़े करने के लिए बाजार के पास एक पार्किंग बनाई जाए, ताकि बाजार में खरीदारी करने के लिए आने वाले लोग यहां अपने वाहन खड़े कर सकें।
सुधीर जिंदल, प्रधान
घी-चीनी यूनियन, जनता बाजार
हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
जींद शहर की समस्याओं के समाधान को लेकर अन्ना टीम प्रयासरत है। शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अन्ना टीम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभी मामला चंडीगढ़ हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसमें हरियाणा सरकार के चीफ सेक्रेटरी तथा जींद के डीसी को पार्टी बनाया गया है। वहीं अन्ना टीम ने अपने चुनावी एजेंडे में भी अतिक्रमण के मुद्दे को शामिल किया हुआ है।
हितेश हिंदुस्तानी, सदस्य
नप अधिकारियों ने साधी चुप्पी
शहर में बढ़ते अतिक्रमण के बारे में जब नगर परिषद के स्वच्छता अधीक्षक अशोक कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को टालते हुए इस बारे में नगर परिषद के एमई सुमित कुमार से संपर्क करने को कहा। जब एमई से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल स्वीच ऑफ मिला