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प्रकाश सिंह कमेटी ने भी सफीदों विधायक जसबीर देशवाल को दी क्लीन चिट

Thu, 02 Jun 2016 01:03 AM IST
jind
jind Updated Thu, 02 Jun 2016 01:03 AM IST
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रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट पर सफीदों विधायक जसबीर देशवाल ने कहा कि इससे साफ हो गई है नवीन नामक युवक की मौत पुलिस फायरिंग में हुई थी। विधायक के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 फरवरी को सफीदों में हुई हिंसा की शुरुआत कुछ जाट युवकों के दुकानों में तोड़फोड़ से हुई। विधायक के अनुसार इसका विरोध करते हुए लगभग तीन से चार हजार गैर जाट लोगों ने विधायक के घर के बाहर एक विरोध मार्च निकाला जो बाद में उग्र भीड़ में तब्दील हो गया। इस उग्र भीड़ ने पहले जाट धर्मशाला में तोड़फोड़ व आगजनी की व बाद में विधायक जसबीर देशवाल की कोठी पर हमला बोल दिया। कोठी के बाहर खड़ी विधायक की दो कारों को आग के हवाले कर दिया व मोटरसाइकिलें फूंक दीं। इस उग्र भीड़ ने कोठी पर पत्थरबाजी व फायरिंग की। रिपोर्ट में बताया गया है कि उग्र भीड़ को शांत कराने के लिए मौके पर मौजूद प्रशासन ने काफी मशक्कत की, लेकिन भीड़ को बेकाबू होते देख और विधायक के परिवार की जान बचाने के लिए एसडीएम ने पुलिस को फायरिंग करने के आदेश दे दिए। इस पुलिस फायरिंग में सफीदों निवासी नवीन व छापर गांव के युवक बीर सिंह को गोली लगी। जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस वालों को भी गंभीर चोटें आईं। रिपोर्ट में एफआईआर संख्या 70 का तो जिक्र है जिसमें पुलिस फायरिंग में दो युवकों के मारे जाने की बात लिखी है जबकि मृतक नवीन के परिवार की तरफ  से विधायक के खिलाफ  हत्या का मुकदमा संख्या 71 दर्ज कराने का पूरी रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं है।
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डीसी का बयान भी ऐसा ही
विधायक के अनुसार रिपोर्ट में डीसी विनय सिंह का भी बयान भी यही कह रहा है।  रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस फायरिंग से उग्र भीड़ तितर-बितर हो गई और सफीदों थाने की तरफ बढ़ गई जहां उसने थानाध्यक्ष के फैमिली क्वार्टर व खड़ी कई मोटर साइकिलों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए पुलिस ने 246 राउंड फायर किए। विधायक जसबीर देशवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैं सच्चाई के साथ हूं। हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। जब तक सफीदों की जनता का भरोसा मेरे साथ है। सफीदों में हुई हिंसा का जो भी दोषी हो उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। रिपोर्ट में डीएसपी हरेंद्र कुमार ने अपना पक्ष रखा है कि सफीदों की हिंसा को रोकने के लिए उन्हें जींद मुख्यालय से कोई भी अतिरिक्त पुलिस फोर्स नहीं मिली थी। रिपोर्ट में डीएसपी हरेंद्र कुमार के बारे में लिखा है कि डीएसपी ने समय रहते अपराधियों पर कार्रवाई नहीं की। डीएसपी के इस पक्षपात रवैये को देखते हुए उनकी जांच जिले से बाहर के किसी वरिष्ठ अधिकारी या मुख्यालय से करवानी चाहिए।
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