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बस चालकों ने जेब से पैसे लगाकर ठीक करवाया रास्ता, धूल उड़ने से परेशान किसान ने भरा पानी, पांच गाड़ियां फंसी
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रेलवे लाइन के पास बस चालकों द्वारा बनाए गए वैकल्पिक रास्ते पर किसान द्वारा पानी भरने से दलदल के क?
- फोटो : Jind
गोहाना रोड पर रेलवेे लाइन के पास निर्माणाधीन कच्चे रास्ते पर वाहनों के आवागमन की वजह से उड़ रही धूल से परेशान किसान ने ट्यूबवेल चलाकर रास्ते पर पानी कर दिया। जिसकी वजह से मिट्टी नीचे बैठ गई। बुधवार रात दस बजे जब इस रास्ते से वाहन निकल रहे थे तो दो ट्रक और तीन कैंटर समेत पांच वाहन वहां पर फंस गए। क्रेन की सहायता से चार वाहनों को जहां निकालने में 12 घंटे लग गए और एक ट्रक को निकालने में 14 घंटे लगे।
दरअसल गोहाना रोड पर निर्माण कार्य चलने के कारण यह रोड पिछले चार महीने से बंद पड़ा है, लेकिन प्राइवेट बस संचालक व रोडवेज कर्मचारी प्रदीप, आजाद, विजेंद्र, अनिल, आनंद, सतीश, राहुल व संदीप के अनुसार उन्होंने रेलवे लाइन के पास 40 हजार रुपये खर्च कर एक वैकल्पिक रास्ते का निर्माण करवाया। रेलवे लाइन के पास आधा दर्जन किसानों के घर हैं। रास्ता शुरू होने से वहां से गुजरने वाले वाहनों की वजह से उड़ने वाले धूल की वजह से किसान परेशान हो गए।
किसानों ने कहा कि धूल उड़ने की वजह से उनकी फसल और पशुओं पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने बस संचालकों से बार-बार आग्रह किया कि वे गोहाना के लिए कोई अन्य रास्ता खोल लें, जिससे उनको परेशानी न हो, लेकिन बस संचालकों ने किसानों की बात नहीं मानी। धूल से परेशान होकर किसानों ने ट्यूबवेल चलाकर रास्ते पर पानी भर दिया। वहीं बस संचालकों ने पानी छोड़कर रास्ता बंद करने वाले किसान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चार महीने पहले जब गोहाना रोड बंद हो गया था तो प्राइवेट बस संचालकों व रोडवेज कर्मचारियों ने 40 हजार रुपये एकत्रित कर रेलवे लाइन के पास वैकल्पिक रास्ते का निर्माण करवाया था। किसानों ने पिछले चार महीने में चार बार ट्यूबवेल से पानी छोड़कर यह रास्ता बंद कर दिया। इसके मरम्मत के लिए हर बार कम से कम चार हजार रुपये लगे। अब चौथी बार जब किसानों ने रास्ता बंद कर दिया तो प्राइवेट बस संचालकों का सब्र धैर्य दे गया और वे किसानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर डीसी कार्यालय पहुंच गए।
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14 घंटे में निकला ट्रक
वीरवार को गोहाना से लुधियाना के लिए ट्रक लेकर निकले थे। रात दस बजे पिंडारा स्थित रेलवे लाइन के पास कच्चे रास्ते से जब ट्रक लेकर निकले तो रास्ते में पानी भरा हुआ था। जब ट्रक पानी से लेकर निकालने लगे तो ट्रक धंस गया। ट्रक निकालने में क्रेन की सहायता लेनी पड़ी। ट्रक 14 घंटे के बाद निकला। वहीं जब पानी से ट्रक निकला तो एक टायर भी पंक्चर हो चुका था। इस कारण और लेट हो गए। लेट होने पर 15 हजार रुपये जुर्माना के तौर पर भी देने पड़ेंगे।
-विनोद, ट्रक संचालक।
वाहनों को निकालने के लिए दो जेसीबी बुलाई गई थी। ट्रक को निकालते समय एक जेसीबी भी मिट्टी में धंस गई थी। फिर बड़ी मुश्किल से दूसरी जेसीबी की सहायता से फंसी हुई जेसीबी को निकाला गया। रातभर से पांच वाहन रास्ते में फंस गए थे। इन्हें निकालने के लिए 14 घंटे लगे। जाम से निकलने के लिए ट्रक चालकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ी। 14 घंटे बाद निकाले गए ट्रक चालक से क्रेन वालों ने सात हजार रुपये लिए।
डीसी कार्यालय में अधिकारियों को ज्ञापन देकर गए बस मालिक
रास्ते को दोबारा से शुरू करवाने व रास्ते में पानी छोड़ने वाले किसान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बस मालिक और चालक डीसी कार्यालय पहुंचे। इस दौरान डीसी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे तो उन्होंने उनके पीए को ज्ञापन देकर चले गए। पीए ने बस संचालकों को डीसी को ज्ञापन देने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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दरअसल गोहाना रोड पर निर्माण कार्य चलने के कारण यह रोड पिछले चार महीने से बंद पड़ा है, लेकिन प्राइवेट बस संचालक व रोडवेज कर्मचारी प्रदीप, आजाद, विजेंद्र, अनिल, आनंद, सतीश, राहुल व संदीप के अनुसार उन्होंने रेलवे लाइन के पास 40 हजार रुपये खर्च कर एक वैकल्पिक रास्ते का निर्माण करवाया। रेलवे लाइन के पास आधा दर्जन किसानों के घर हैं। रास्ता शुरू होने से वहां से गुजरने वाले वाहनों की वजह से उड़ने वाले धूल की वजह से किसान परेशान हो गए।
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किसानों ने कहा कि धूल उड़ने की वजह से उनकी फसल और पशुओं पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने बस संचालकों से बार-बार आग्रह किया कि वे गोहाना के लिए कोई अन्य रास्ता खोल लें, जिससे उनको परेशानी न हो, लेकिन बस संचालकों ने किसानों की बात नहीं मानी। धूल से परेशान होकर किसानों ने ट्यूबवेल चलाकर रास्ते पर पानी भर दिया। वहीं बस संचालकों ने पानी छोड़कर रास्ता बंद करने वाले किसान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चार महीने पहले जब गोहाना रोड बंद हो गया था तो प्राइवेट बस संचालकों व रोडवेज कर्मचारियों ने 40 हजार रुपये एकत्रित कर रेलवे लाइन के पास वैकल्पिक रास्ते का निर्माण करवाया था। किसानों ने पिछले चार महीने में चार बार ट्यूबवेल से पानी छोड़कर यह रास्ता बंद कर दिया। इसके मरम्मत के लिए हर बार कम से कम चार हजार रुपये लगे। अब चौथी बार जब किसानों ने रास्ता बंद कर दिया तो प्राइवेट बस संचालकों का सब्र धैर्य दे गया और वे किसानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर डीसी कार्यालय पहुंच गए।
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14 घंटे में निकला ट्रक
वीरवार को गोहाना से लुधियाना के लिए ट्रक लेकर निकले थे। रात दस बजे पिंडारा स्थित रेलवे लाइन के पास कच्चे रास्ते से जब ट्रक लेकर निकले तो रास्ते में पानी भरा हुआ था। जब ट्रक पानी से लेकर निकालने लगे तो ट्रक धंस गया। ट्रक निकालने में क्रेन की सहायता लेनी पड़ी। ट्रक 14 घंटे के बाद निकला। वहीं जब पानी से ट्रक निकला तो एक टायर भी पंक्चर हो चुका था। इस कारण और लेट हो गए। लेट होने पर 15 हजार रुपये जुर्माना के तौर पर भी देने पड़ेंगे।
-विनोद, ट्रक संचालक।
वाहनों को निकालने के लिए दो जेसीबी बुलाई गई थी। ट्रक को निकालते समय एक जेसीबी भी मिट्टी में धंस गई थी। फिर बड़ी मुश्किल से दूसरी जेसीबी की सहायता से फंसी हुई जेसीबी को निकाला गया। रातभर से पांच वाहन रास्ते में फंस गए थे। इन्हें निकालने के लिए 14 घंटे लगे। जाम से निकलने के लिए ट्रक चालकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ी। 14 घंटे बाद निकाले गए ट्रक चालक से क्रेन वालों ने सात हजार रुपये लिए।
डीसी कार्यालय में अधिकारियों को ज्ञापन देकर गए बस मालिक
रास्ते को दोबारा से शुरू करवाने व रास्ते में पानी छोड़ने वाले किसान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बस मालिक और चालक डीसी कार्यालय पहुंचे। इस दौरान डीसी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे तो उन्होंने उनके पीए को ज्ञापन देकर चले गए। पीए ने बस संचालकों को डीसी को ज्ञापन देने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।