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Jind News: धान की खरीद में 200 से 300 रुपये कम दाम मिलने का आरोप, जांच की मांग
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नरवाना। नरवाना अनाज मंडी में धान की खरीद को लेकर किसानों में रोष है। सर्वजातीय बिनैण खाप के प्रवक्ता संदीप दनौदा ने आरोप लगाया कि नमी और गुणवत्ता के नाम पर किसानों की धान सरकारी रेट से करीब 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम में खरीदी जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।
दनौदा ने कहा कि किसानों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सरकारी खरीद व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें फसल का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुसार हो रही है तो किसानों को कम दाम पर फसल बेचने की स्थिति क्यों बन रही है।
उन्होंने नमी जांच का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और किसानों को उनकी फसल में नमी की वास्तविक मात्रा तथा कटौती के नियम स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप गंभीर हैं। यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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स्थानीय नेताओं को मंडी में पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करवाना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि किसानों के बीच पिछली बार की तरह इस बार भी प्रति क्विंटल 110 रुपये लिए जाने की चर्चा है, जिसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से नमी जांच, खरीद रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
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दनौदा ने कहा कि किसानों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सरकारी खरीद व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें फसल का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुसार हो रही है तो किसानों को कम दाम पर फसल बेचने की स्थिति क्यों बन रही है।
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उन्होंने नमी जांच का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और किसानों को उनकी फसल में नमी की वास्तविक मात्रा तथा कटौती के नियम स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप गंभीर हैं। यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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स्थानीय नेताओं को मंडी में पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करवाना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि किसानों के बीच पिछली बार की तरह इस बार भी प्रति क्विंटल 110 रुपये लिए जाने की चर्चा है, जिसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से नमी जांच, खरीद रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।