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Jind News: ननिहाल की यादों से सजी काव्य गोष्ठी
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26जेएनडी11: ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में भाग लेती कवयित्री। स्रोत : कवयित्री
- फोटो : Archive
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। महिला काव्य मंच की जींद इकाई की ओर से ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘गर्मी की छुट्टियां और ननिहाल’ रखा गया। इसमें विभिन्न कवयित्रियों ने बचपन, नानी घर और गर्मी की छुट्टियों से जुड़ी यादों को अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवंत कर दिया।
गोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। राष्ट्रीय महासचिव सीमा शर्मा मुख्य अतिथि रहीं, जबकि अखिल भारतीय साहित्य परिषद जींद इकाई की अध्यक्षा मंजू मानव और रेवाड़ी इकाई की अध्यक्षा डॉ. सुधा यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
मुख्य अतिथि सीमा शर्मा ने आधुनिक जीवन शैली पर कटाक्ष करते हुए कहा मोबाइल ने छीन ली कंचों वाली शाम, बचपन सूना हो गया, खो गई बच्चों वाली बात। वहीं मंजू मानव ने अपने भावपूर्ण मंच संचालन और काव्य प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।
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उन्होंने कहा याद आती हैं मुझको मेरी बचपन की मस्तियां, वो भीगना बारिश में, वो कागज की कश्तियां। डॉ. सुधा यादव ने अपनी कविता में वर्तमान समाज की विडंबनाओं को स्वर देते हुए कहा ऐसा है ना वैसा है, सबको प्यारा पैसा है।
कविता शर्मा, शिखा, शशि शर्मा और डॉ. बबली रानी ने भी छुट्टियों, बचपन और नानी घर की यादों को अपनी रचनाओं में पिरोया। जींद इकाई की अध्यक्षा अनीता शर्मा ने कहा गर्मी की छुट्टियों का मतलब बात-बात पर खिलखिलाना, दादी-नानी, बुआ-मासी से मिलना और मिलाना।
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जींद। महिला काव्य मंच की जींद इकाई की ओर से ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘गर्मी की छुट्टियां और ननिहाल’ रखा गया। इसमें विभिन्न कवयित्रियों ने बचपन, नानी घर और गर्मी की छुट्टियों से जुड़ी यादों को अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवंत कर दिया।
गोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। राष्ट्रीय महासचिव सीमा शर्मा मुख्य अतिथि रहीं, जबकि अखिल भारतीय साहित्य परिषद जींद इकाई की अध्यक्षा मंजू मानव और रेवाड़ी इकाई की अध्यक्षा डॉ. सुधा यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
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मुख्य अतिथि सीमा शर्मा ने आधुनिक जीवन शैली पर कटाक्ष करते हुए कहा मोबाइल ने छीन ली कंचों वाली शाम, बचपन सूना हो गया, खो गई बच्चों वाली बात। वहीं मंजू मानव ने अपने भावपूर्ण मंच संचालन और काव्य प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।
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उन्होंने कहा याद आती हैं मुझको मेरी बचपन की मस्तियां, वो भीगना बारिश में, वो कागज की कश्तियां। डॉ. सुधा यादव ने अपनी कविता में वर्तमान समाज की विडंबनाओं को स्वर देते हुए कहा ऐसा है ना वैसा है, सबको प्यारा पैसा है।
कविता शर्मा, शिखा, शशि शर्मा और डॉ. बबली रानी ने भी छुट्टियों, बचपन और नानी घर की यादों को अपनी रचनाओं में पिरोया। जींद इकाई की अध्यक्षा अनीता शर्मा ने कहा गर्मी की छुट्टियों का मतलब बात-बात पर खिलखिलाना, दादी-नानी, बुआ-मासी से मिलना और मिलाना।