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खटकड़ गांव में आजीविका मिशन के तहत जिला में सबसे ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर कर रही स्वरोजगार संचालित
Updated Sat, 02 Jun 2018 12:25 AM IST
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पवन डाहौला
उचाना।
खटकड़ गांव में आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं स्वरोजगार संचालित कर रही हैं। खटकड़ में लगभग 200 महिलाएं जिले में सबसे ज्यादा 18 स्वयं सहायता समूह बनाकर अनेक प्रकार के कार्य करके अच्छी आमदनी कमा रही हैं।
जो महिलाएं घर में रहकर केवल घर के कार्यों में व्यस्त रहती थीं आज वही महिलाएं पुरुषों के मुकाबले में स्वयं सहायता समूह के तहत बैंक से कर्ज लेकर स्वरोजगार संचालित करके अच्छा पैसा कमाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ बैंक से लिए कर्ज की अदायगी किस्तों में समय पर कर रही हैं। सरकार की ऐसी मुहिम से गरीबी को दूर किया जा सकता है। स्वयं सहायता समूह द्वारा अच्छा कार्य करने पर गांव के ज्योति महिला ग्राम संगठन को जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त मिल चुका है तथा खंड स्तर पर गांव के एकता स्वयं सहायता समूह को प्रथम स्थान मिल चुका है। इसके साथ ग्रामीण महिलाएं सामाजिक उत्थान में भी अपना योगदान बढ़ चढ़कर देती हैं।
440 स्वयं सहायता समूहों में से एक भी डिफाल्टर नहीं
आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से ऊपर उठाने और सबल बनाने के लिए जिले में 440 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। समूहों की महिलाओं को प्रथम चरण में सौ-सौ रुपये का अंशदान एकत्र करने के लिए उनमें बचत के प्रति प्रेरणा पैदा की जाती है। उसके बाद उनको सरकार के सहयोग से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपना छोटा उद्यम शुरू करने के लिए रिवोलविंग फंड के रूप में ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। इस प्रकार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपना स्वरोजगार संचालित करके व्यवसाय शुरू कर आमदनी का जरिया पैदा करती हैं। जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब एक करोड़ बीस लाख रुपये तक का लेन-देन इन समूहों के माध्यम से कर रही हैं। सफल स्वयं सहायता समूह को 2 करोड़ रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकती है। खास बात यह है कि अब तक जिले में एक भी स्वयं सहायता समूह डिफाल्टर नहीं हुआ।
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विश्वकर्मा स्वयं सहायता समूह की संचालिका और गांव की समूह सेविका कविता जांगड़ा ने बताया कि गांव की महिलाएं समूह के माध्यम से आजीविका मिशन के तहत सरकार और बैंक के सहयोग से महिलाओं को आगे बढ़ाकर स्वरोजगार संचालित करके अपना जीवन यापन कर रही हैं। बैंक अब तक सभी समूहों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए लगभग साढ़े 49 लाख रुपये वितरण कर चुका है। इससे सभी समूह की महिलाएं लाभ उठा रही हैं।
खंड उचाना कलस्टर की आईआरपीआई प्रवीण कुमारी शर्मा ने बताया कि वैसे तो उसके कलस्टर के अधीन सभी स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन खटकड़ गांव में सबसे अधिक स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इसमें 18 समूह में लगभग 200 के करीब महिलाएं काम कर रही हैं और उनके द्वारा प्रयास जारी हैं गांव और भी अधिक समूह बनाकर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के साथ-साथ ग्रामीण महिलाएं सामाजिक उत्थान की मुहिम में बढ़ चढ़कर भाग लेती हैं।
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उचाना।
खटकड़ गांव में आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाएं स्वरोजगार संचालित कर रही हैं। खटकड़ में लगभग 200 महिलाएं जिले में सबसे ज्यादा 18 स्वयं सहायता समूह बनाकर अनेक प्रकार के कार्य करके अच्छी आमदनी कमा रही हैं।
जो महिलाएं घर में रहकर केवल घर के कार्यों में व्यस्त रहती थीं आज वही महिलाएं पुरुषों के मुकाबले में स्वयं सहायता समूह के तहत बैंक से कर्ज लेकर स्वरोजगार संचालित करके अच्छा पैसा कमाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ बैंक से लिए कर्ज की अदायगी किस्तों में समय पर कर रही हैं। सरकार की ऐसी मुहिम से गरीबी को दूर किया जा सकता है। स्वयं सहायता समूह द्वारा अच्छा कार्य करने पर गांव के ज्योति महिला ग्राम संगठन को जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त मिल चुका है तथा खंड स्तर पर गांव के एकता स्वयं सहायता समूह को प्रथम स्थान मिल चुका है। इसके साथ ग्रामीण महिलाएं सामाजिक उत्थान में भी अपना योगदान बढ़ चढ़कर देती हैं।
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440 स्वयं सहायता समूहों में से एक भी डिफाल्टर नहीं
आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से ऊपर उठाने और सबल बनाने के लिए जिले में 440 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। समूहों की महिलाओं को प्रथम चरण में सौ-सौ रुपये का अंशदान एकत्र करने के लिए उनमें बचत के प्रति प्रेरणा पैदा की जाती है। उसके बाद उनको सरकार के सहयोग से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपना छोटा उद्यम शुरू करने के लिए रिवोलविंग फंड के रूप में ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। इस प्रकार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपना स्वरोजगार संचालित करके व्यवसाय शुरू कर आमदनी का जरिया पैदा करती हैं। जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब एक करोड़ बीस लाख रुपये तक का लेन-देन इन समूहों के माध्यम से कर रही हैं। सफल स्वयं सहायता समूह को 2 करोड़ रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकती है। खास बात यह है कि अब तक जिले में एक भी स्वयं सहायता समूह डिफाल्टर नहीं हुआ।
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विश्वकर्मा स्वयं सहायता समूह की संचालिका और गांव की समूह सेविका कविता जांगड़ा ने बताया कि गांव की महिलाएं समूह के माध्यम से आजीविका मिशन के तहत सरकार और बैंक के सहयोग से महिलाओं को आगे बढ़ाकर स्वरोजगार संचालित करके अपना जीवन यापन कर रही हैं। बैंक अब तक सभी समूहों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए लगभग साढ़े 49 लाख रुपये वितरण कर चुका है। इससे सभी समूह की महिलाएं लाभ उठा रही हैं।
खंड उचाना कलस्टर की आईआरपीआई प्रवीण कुमारी शर्मा ने बताया कि वैसे तो उसके कलस्टर के अधीन सभी स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन खटकड़ गांव में सबसे अधिक स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इसमें 18 समूह में लगभग 200 के करीब महिलाएं काम कर रही हैं और उनके द्वारा प्रयास जारी हैं गांव और भी अधिक समूह बनाकर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के साथ-साथ ग्रामीण महिलाएं सामाजिक उत्थान की मुहिम में बढ़ चढ़कर भाग लेती हैं।