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सरकार पर अनदेखी का आरोप लगा 15 अगस्त को धर्मपरिर्वन का ऐलान
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:49 PM IST
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स्वतंत्रता दिवस पर अनुसूचित जाति के 1000 लोग अपनाएंगे बौद्ध धर्म : दिनेश
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रदेश सरकार पर दलित परिवारों के साथ भेदभाव व न्याय नहीं दिलवाने का आरोप लगाते हुए दलित ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने 15 अगस्त के मौके पर बौद्ध धर्म अपनाने का ऐलान किया है। कमेटी के संयोजक दिनेश खापड़ के अनुसार इस मौके पर करीब एक हजार लोग बौद्ध धर्म अपनाएंगे। दिनेश खापड़ ने बताया कि भाजपा सरकार की दलित विरोधी मानसिकता के कारण लगातार छह महीने से वे लोग जायज मांगों के लिए धरना दे रहे हैं। खापड़ ने कहा कि जब भी नेपाल व पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ कोई घटना घटती है तो भाजपा, आरएसएस, बजरंगदल, हिंदु वाहिनी जैसे संगठन कानून की मार्यादाओं को तोड़कर प्रदर्शन करते हैं। भाजपा के मंत्री व नेता भी बयानबाजी करते हैं। इसके विपरीत भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। ऐसे में दलित पीड़ित 15 अगस्त को धार्मिक गुलामी से मुक्त हो रहे हैं।
यह हैं मांगें
दिनेश खापड़ ने बताया कि जींद के छात्तर गांव निवासी सीआरपीएफ जवान 2015 में शहीद हुआ था। आज भी उसके परिजनों को सरकारी नौकरी और शहीद के नाम से कोई स्मारक बनाने का इंतजार है। 2017 में डीएफएसी कर्मचारी ईश्वर सिंह की मौत के मामले की सरकार ने सीआई जांच की मांग मानी थी, लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं की गई है। साथ ही ईश्वर सिंह के परिजनों को स्थायी नौकरी की मांग भी सरकार ने मानने के बावजूद पूरी नहीं की है। 1985 में शहीद हुए हरियाणा पुलिस के जवान सूबे सिंह के परिजनों को नौकरी नहीं दी गई है। जींद के एक गांव में दुष्कर्म की शिकार हुई युवती के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और सरकारी नौकरी नहीं दी गई। भाटला गांव में दलितों का सामाजिक बहिष्कार करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। भिवानी जिला के एक गांव में दुष्कर्म का शिकार हुई युवती के परिजनों पर करीब एक दर्जन बार हामले हो चुके हैं, लेकिन पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवा रही है। न ही इस परिवार को हथियारों के लाइसेंस दे रही है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान बने केस वापस लिए जाएं। कुरुक्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म की शिकार हुई युवती की मौत के मामले में सीबीआई जांच करवाई जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। प्रदेश सरकार पर दलित परिवारों के साथ भेदभाव व न्याय नहीं दिलवाने का आरोप लगाते हुए दलित ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने 15 अगस्त के मौके पर बौद्ध धर्म अपनाने का ऐलान किया है। कमेटी के संयोजक दिनेश खापड़ के अनुसार इस मौके पर करीब एक हजार लोग बौद्ध धर्म अपनाएंगे। दिनेश खापड़ ने बताया कि भाजपा सरकार की दलित विरोधी मानसिकता के कारण लगातार छह महीने से वे लोग जायज मांगों के लिए धरना दे रहे हैं। खापड़ ने कहा कि जब भी नेपाल व पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ कोई घटना घटती है तो भाजपा, आरएसएस, बजरंगदल, हिंदु वाहिनी जैसे संगठन कानून की मार्यादाओं को तोड़कर प्रदर्शन करते हैं। भाजपा के मंत्री व नेता भी बयानबाजी करते हैं। इसके विपरीत भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। ऐसे में दलित पीड़ित 15 अगस्त को धार्मिक गुलामी से मुक्त हो रहे हैं।
यह हैं मांगें
दिनेश खापड़ ने बताया कि जींद के छात्तर गांव निवासी सीआरपीएफ जवान 2015 में शहीद हुआ था। आज भी उसके परिजनों को सरकारी नौकरी और शहीद के नाम से कोई स्मारक बनाने का इंतजार है। 2017 में डीएफएसी कर्मचारी ईश्वर सिंह की मौत के मामले की सरकार ने सीआई जांच की मांग मानी थी, लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं की गई है। साथ ही ईश्वर सिंह के परिजनों को स्थायी नौकरी की मांग भी सरकार ने मानने के बावजूद पूरी नहीं की है। 1985 में शहीद हुए हरियाणा पुलिस के जवान सूबे सिंह के परिजनों को नौकरी नहीं दी गई है। जींद के एक गांव में दुष्कर्म की शिकार हुई युवती के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और सरकारी नौकरी नहीं दी गई। भाटला गांव में दलितों का सामाजिक बहिष्कार करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। भिवानी जिला के एक गांव में दुष्कर्म का शिकार हुई युवती के परिजनों पर करीब एक दर्जन बार हामले हो चुके हैं, लेकिन पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवा रही है। न ही इस परिवार को हथियारों के लाइसेंस दे रही है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान बने केस वापस लिए जाएं। कुरुक्षेत्र के एक गांव में दुष्कर्म की शिकार हुई युवती की मौत के मामले में सीबीआई जांच करवाई जाए।
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