{"_id":"5a43eb264f1c1b95188bc4e7","slug":"201514400550-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमारी से हुई तीन वर्षीय बेटे की मौत, पिता ने दिखाया साहस करवाया नेत्रदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमारी से हुई तीन वर्षीय बेटे की मौत, पिता ने दिखाया साहस करवाया नेत्रदान
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
सेक्टर आठ निवासी डॉ. संदीप गोयल ने दुनिया के सामने अनोखी मिशाल पेश की है। डॉ. संदीप गोयल अपने तीन वर्षीय बेटे को नहीं बचा पाऐ, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की आंखें मरणोपरांत दान कर दीं। अब मौत के बाद भी गोयल के बेटे सात्विक की आंखें संसार देख सकेंगी।
डॉ. संदीप गोयल के घर में तीन साल पहले बेटा पैदा होने पर पता चला कि सात्विक को ब्रेन मालफोरमेशन की बीमारी है। बीमारी का पता लगते ही उसके इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई और दिल्ली के एम्स से दवा भी शुरू हो गई। एम्स से सात्विक का इलाज करने वाले डॉक्टर का पीजीआई रोहतक में तबादला होने पर सात्विक का इलाज भी रोहतक से शुरू किया गया। लगातार इलाज के बावजूद सात्विक को आराम नहीं आया और दस दिसंबर को सात्विक की मौत हो गई। जिसके बाद डॉ. संदीप ने हौसला दिखाते हुए बेटे के नेत्र दान करने का फैसला लिया। दादी अंगूरी देवी व दादा सुरेश गोयल ने भी नेत्र दान के इस फैसले का स्वागत किया। माता पिता और परिजनों की इच्छा के मुताबिक पीजीआई के डाक्टरों द्वारा तीन साल के सात्विक के मरणोपरांत नेत्र ले लिए गए। कुछ ही देर बाद सात्विक के दोनों नेत्रों को दो व्यक्तियों को डालकर उनकी जिंदगी में छाएं अंधेरे को उजाले में भर दिया। गौरतलब है कि डॉ. संदीप गोयल पॉलिक्लीनिक में आयुर्वेदिक मेडिकल आफिसर के पद पर तैनात हैं, और उनकी पत्नी रितेश गोयल जींद के नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में आयुर्र्र्र्र्वेदिक मेडिकल अफसर के पद पर तैनात हैं।
विज्ञापन
जींद।
सेक्टर आठ निवासी डॉ. संदीप गोयल ने दुनिया के सामने अनोखी मिशाल पेश की है। डॉ. संदीप गोयल अपने तीन वर्षीय बेटे को नहीं बचा पाऐ, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की आंखें मरणोपरांत दान कर दीं। अब मौत के बाद भी गोयल के बेटे सात्विक की आंखें संसार देख सकेंगी।
डॉ. संदीप गोयल के घर में तीन साल पहले बेटा पैदा होने पर पता चला कि सात्विक को ब्रेन मालफोरमेशन की बीमारी है। बीमारी का पता लगते ही उसके इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई और दिल्ली के एम्स से दवा भी शुरू हो गई। एम्स से सात्विक का इलाज करने वाले डॉक्टर का पीजीआई रोहतक में तबादला होने पर सात्विक का इलाज भी रोहतक से शुरू किया गया। लगातार इलाज के बावजूद सात्विक को आराम नहीं आया और दस दिसंबर को सात्विक की मौत हो गई। जिसके बाद डॉ. संदीप ने हौसला दिखाते हुए बेटे के नेत्र दान करने का फैसला लिया। दादी अंगूरी देवी व दादा सुरेश गोयल ने भी नेत्र दान के इस फैसले का स्वागत किया। माता पिता और परिजनों की इच्छा के मुताबिक पीजीआई के डाक्टरों द्वारा तीन साल के सात्विक के मरणोपरांत नेत्र ले लिए गए। कुछ ही देर बाद सात्विक के दोनों नेत्रों को दो व्यक्तियों को डालकर उनकी जिंदगी में छाएं अंधेरे को उजाले में भर दिया। गौरतलब है कि डॉ. संदीप गोयल पॉलिक्लीनिक में आयुर्वेदिक मेडिकल आफिसर के पद पर तैनात हैं, और उनकी पत्नी रितेश गोयल जींद के नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में आयुर्र्र्र्र्वेदिक मेडिकल अफसर के पद पर तैनात हैं।
विज्ञापन