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शहर के बरसाती पानी की निकासी के लिए 20 करोड़ रुपये की योजना का शुभारंभ, 26 किलोमीटर लंबी निकासी लाइन से किनान ड्रेन में डाला जाए
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शहर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। शहर की सबसे पुरानी जलभराव की समस्या से अब निजात मिल सकती है। इसके लिए नगर परिषद ने 19 करोड़ 97 लाख रुपये की परियोजना शुरू कर दी है। सोमवार को डीसी अमित खत्री ने नारियल फोड़ कर परियोजना का शुभारंभ किया। अब अगले छह महीने में निकासी लाइन बनाने की योजना है और इसके बाद तीन महीने ट्रायल के चलेंगे। कुल मिलाकर अगले बारिश के मौसम में लोगों को जलभराव से राहत मिल सकती है।
गौरतलब है कि शहर में बरसाती पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग की सीवरेज लाइन से ही बारिश का पानी निकाला जाता है। इसके चलते कई जगह बारिश के बाद एक या दो दिन तक जलभराव रहता है। अब अधिकारियों का मानना है कि इस लाइन के शुरू होने से हांसी ब्रांच नहर से पूर्व की ओर के पूरे शहर के बरसाती पानी की निकासी आसानी से हो सकेगी। इसके लिए 26 किलोमीटर लंबी लाइन डाली जा रही है।
1.65 मीटर से 4.60 मीटर तक की गहराई
बरसाती पानी निकासी की लाइन सफीदों रोड सैनी धर्मशाला के पास से शुरू होगी और जेडी सात के साथ-साथ रोहतक रोड पर जाएगी। यहां पर पंप सेट लगाकर बरसाती पानी को ड्रेन में भेजने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में सफीदों रोड पर निकासी लाइन 1.65 मीटर गहरी होगी और रोहतक रोड पर जाते-जाते इसकी गहराई 4.60 मीटर तक हो जाएगी।
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26 किलोमीटर में महज एक बूस्टर
फिलहाल शहर के बरसाती पानी की निकासी के लिए जो डिजाइन बनाया गया है, उसमें सिर्फ रोहतक रोड से ड्रेन में पानी डालने के लिए बूस्टर लगेगा। पूरे चार लाइनों को बस स्टैंड के पास जोड़ा जाएगा, जहां से एक चौड़ी लाइन रोहतक रोड तक जाएगी। आगे चलते अलग-अलग कॉलोनियों की लाइन इसमें जोड़ी जाएगी। नगर परिषद के एमई सतीश गर्ग के अनुसार लाइन का डिजाइन इस प्रकार से बनाया गाया है कि इसमें बरसाती पानी जीरो ग्रेवेटी से चलेगा। ऐेसे में बूस्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जींद में सबसे पहले शुरू हो रहा है काम
शुभारंभ करते हुए डीसी अमित खत्री ने बताया कि अमृत योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 18 शहरों को शामिल किया गया है। अब तक बरसाती पानी निकासी की परियोजना किसी भी शहर में शुरू नहीं हुई है। जींद इस विकास परियोजना को शुरू करने वाला पहला जिला बन गया है।
पांच विभागों से नई मिली एनओसी
हालांकि नगर परिषद ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक इस परियोजना के लिए वन विभाग, रेलवे, पीडब्ल्यूडी, हुडा, एनएचएआई जैसे विभागों से एनओसी नहीं मिली है। इस पर नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम सैनी का कहना है कि एक सप्ताह पहले ही सभी विभागों में एनओसी का आवेदन कर दिया है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जल्द ही एनओसी मिल जाएगी। इसके कारण कहीं भी काम नहीं रुकेगा।
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जींद। शहर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। शहर की सबसे पुरानी जलभराव की समस्या से अब निजात मिल सकती है। इसके लिए नगर परिषद ने 19 करोड़ 97 लाख रुपये की परियोजना शुरू कर दी है। सोमवार को डीसी अमित खत्री ने नारियल फोड़ कर परियोजना का शुभारंभ किया। अब अगले छह महीने में निकासी लाइन बनाने की योजना है और इसके बाद तीन महीने ट्रायल के चलेंगे। कुल मिलाकर अगले बारिश के मौसम में लोगों को जलभराव से राहत मिल सकती है।
गौरतलब है कि शहर में बरसाती पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग की सीवरेज लाइन से ही बारिश का पानी निकाला जाता है। इसके चलते कई जगह बारिश के बाद एक या दो दिन तक जलभराव रहता है। अब अधिकारियों का मानना है कि इस लाइन के शुरू होने से हांसी ब्रांच नहर से पूर्व की ओर के पूरे शहर के बरसाती पानी की निकासी आसानी से हो सकेगी। इसके लिए 26 किलोमीटर लंबी लाइन डाली जा रही है।
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1.65 मीटर से 4.60 मीटर तक की गहराई
बरसाती पानी निकासी की लाइन सफीदों रोड सैनी धर्मशाला के पास से शुरू होगी और जेडी सात के साथ-साथ रोहतक रोड पर जाएगी। यहां पर पंप सेट लगाकर बरसाती पानी को ड्रेन में भेजने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में सफीदों रोड पर निकासी लाइन 1.65 मीटर गहरी होगी और रोहतक रोड पर जाते-जाते इसकी गहराई 4.60 मीटर तक हो जाएगी।
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26 किलोमीटर में महज एक बूस्टर
फिलहाल शहर के बरसाती पानी की निकासी के लिए जो डिजाइन बनाया गया है, उसमें सिर्फ रोहतक रोड से ड्रेन में पानी डालने के लिए बूस्टर लगेगा। पूरे चार लाइनों को बस स्टैंड के पास जोड़ा जाएगा, जहां से एक चौड़ी लाइन रोहतक रोड तक जाएगी। आगे चलते अलग-अलग कॉलोनियों की लाइन इसमें जोड़ी जाएगी। नगर परिषद के एमई सतीश गर्ग के अनुसार लाइन का डिजाइन इस प्रकार से बनाया गाया है कि इसमें बरसाती पानी जीरो ग्रेवेटी से चलेगा। ऐेसे में बूस्टर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जींद में सबसे पहले शुरू हो रहा है काम
शुभारंभ करते हुए डीसी अमित खत्री ने बताया कि अमृत योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 18 शहरों को शामिल किया गया है। अब तक बरसाती पानी निकासी की परियोजना किसी भी शहर में शुरू नहीं हुई है। जींद इस विकास परियोजना को शुरू करने वाला पहला जिला बन गया है।
पांच विभागों से नई मिली एनओसी
हालांकि नगर परिषद ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक इस परियोजना के लिए वन विभाग, रेलवे, पीडब्ल्यूडी, हुडा, एनएचएआई जैसे विभागों से एनओसी नहीं मिली है। इस पर नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम सैनी का कहना है कि एक सप्ताह पहले ही सभी विभागों में एनओसी का आवेदन कर दिया है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जल्द ही एनओसी मिल जाएगी। इसके कारण कहीं भी काम नहीं रुकेगा।