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‘बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्य बरसात से पहले पूरे हों’
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झज्जर। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत जिले के सभी ब्लॉकों में तीन-तीन तालाबों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर साफ कराया जाएगा। मिट्टी की खुदाई कराकर सफाई कराई जाएगी। ताकि संबंधित क्षेत्र में जलभराव की समस्या का समाधान किया जा सके। डीसी शक्ति सिंह ने सोमवार को लघु सचिवालय के सभागार में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा को लेकर आयोजित बैठक अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। कहा कि किसी भी हालत में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी कार्य बरसात से पहले पूरे हो जाने चाहिए।
डीसी ने कहा कि जिले के सभी ब्लॉक में बीडीपीओ की ओर से तीन-तीन ऐसे गांव चिंहित किए जाएं जहां पर तालाब के कारण जलभराव की स्थिति रहती है। एसडीएम भी तालाबों का दौरा कर स्थिति का जायजा लें। यह कार्य दस दिनों के अंदर पूरा किया जाए। पहचाने गए तालाबों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर साफ कराया जाएगा। यह कार्य मई माह के अंत तक पूरा किया जाए। इससे संबंधित क्षेत्र में जलभराव की समस्या से छुटकारा मिल पाएगा। साथ ही पुरानी मिट्टी निकल जाने के बाद भूजल रिचार्ज भी हो सकेगा। उन्होंने कहा कि कई सालों से लगातार पानी भरने के कारण तालाबों में चिकनी मिट्टी की परत जम गई है और इस मिट्टी के कारण भूमिगत रिचार्ज के छिद्र बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ संरक्षण कार्यों को लेकर किसी काम में कोई अड़चन आ रही है तो संबंधित विभाग तुरंत इसकी जानकारी उपलब्ध कराए।ं ऐसा न हो कि बारिश के आने से पहले कार्य पूरा ना हो सके ओर जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। सभी राजस्व अधिकारी ऐसे गांवों की पहचान करें, जिनकी 50 से 70 एकड़ भूमि में लगातार जलभराव होता है। वहां जाकर देखें कि पानी भरने को कारण क्या हैं और समधान के सुझाव के साथ रिपोर्ट दें। सभी एससी और बीडीपीओ संबंधित क्षेत्र की ड्रेन का भी दौरा करें। देखें कि उसमें पॉलिथीन या कूड़ा कहां से जाता है। ऐसे सभी स्थानों पर जालियां लगाई जाएं। बैठक में डीएससी प्रदीप कौशिक, एसडीएम भूपेंद्र सिंह व रविंद्र कुमार, सीटीएम परवेश कादयान, डीआरओ प्रमोद चहल, एसई जे एस नारा, एक्सईएन अरूण मुंजाल, एक्सईएन प्रमोद शर्मा, एक्सईएन प्रतिभा, एक्सईएन रूपेश, एक्सईएन अमित गर्ग, एक्सईएन प्रदीप कुमार, एक्सईएन अनिल रोहिला, बीडीपोओ हरविंद्र, बीडीपोओ उमेद सिंह, बीडीपोओ युद्धवीर सिंह, तहसीलदार नरेंद्र, नायब तहसीलदार शेखर राठी, नायब तहसीलदार ईश्वर व नायब तहसीलदार अशोक आदि अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
इंसेट
उपकरणों को चालू हालत में रखा जाए
डीसी ने कहा कि बाढ़ राहत के कार्यों को लेकर सभी संबंधित विभाग समय रहते तैयारियां कर लें। उपकरणों की मरम्मत कराकर उन्हें चालू हालत में रखा जाए। विभाग को जहां पर अस्थाई बिजली कनेक्शन की जरूरत है, उसकी सूची भी पहले ही तैयार कर ली जाए। राज्य स्तरीय बाढ़ संरक्षण बैठक में जिले से संबंधित कुछ कार्यों को मंजूरी मिली है। अगर किसी कार्य को लेकर संबंधित विभाग को कोई परेशानी आ रही है तो उसकी सूचना दें। संबंधित एसडीएम अपने क्षेत्र का दौरा कर उपकरणों आदि की व्यवस्था का जायजा लें और अगर कोई कमी नजर आती है तो उसे दूर कराएं।
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इंसेट
- नालों की कराई जाए सफाई
उन्होंने कहा कि शहर के नालों की सफाई भी शुरू करा दी जाए। यह ध्यान रखा जाए कि संबंधित ठेकेदार ऊंचाई से शुरूआत करके टेल तक सफाई का काम करे। साथ ही सफाई से पहले, सफाई के दौरान और सफाई होने के बाद के फोटो भी लिए जाए। नियमानुसार कंट्रोल रूम की स्थापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि जिला आपदा प्रबंधन प्लान की समीक्षा करें और उसमें विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध संसाधनों को अपलोड करें। जिले में एमसी स्तर पर तीन-तीन और ब्लॉक स्तर पर दो-दो पोर्टेबल पंप सेट तैयार कराएं, जोकि कम से कम तीन इंच पानी निकालने की क्षमता हों और उनके साथ अन्य सभी उपकरण भी हों।
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डीसी ने कहा कि जिले के सभी ब्लॉक में बीडीपीओ की ओर से तीन-तीन ऐसे गांव चिंहित किए जाएं जहां पर तालाब के कारण जलभराव की स्थिति रहती है। एसडीएम भी तालाबों का दौरा कर स्थिति का जायजा लें। यह कार्य दस दिनों के अंदर पूरा किया जाए। पहचाने गए तालाबों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर साफ कराया जाएगा। यह कार्य मई माह के अंत तक पूरा किया जाए। इससे संबंधित क्षेत्र में जलभराव की समस्या से छुटकारा मिल पाएगा। साथ ही पुरानी मिट्टी निकल जाने के बाद भूजल रिचार्ज भी हो सकेगा। उन्होंने कहा कि कई सालों से लगातार पानी भरने के कारण तालाबों में चिकनी मिट्टी की परत जम गई है और इस मिट्टी के कारण भूमिगत रिचार्ज के छिद्र बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ संरक्षण कार्यों को लेकर किसी काम में कोई अड़चन आ रही है तो संबंधित विभाग तुरंत इसकी जानकारी उपलब्ध कराए।ं ऐसा न हो कि बारिश के आने से पहले कार्य पूरा ना हो सके ओर जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। सभी राजस्व अधिकारी ऐसे गांवों की पहचान करें, जिनकी 50 से 70 एकड़ भूमि में लगातार जलभराव होता है। वहां जाकर देखें कि पानी भरने को कारण क्या हैं और समधान के सुझाव के साथ रिपोर्ट दें। सभी एससी और बीडीपीओ संबंधित क्षेत्र की ड्रेन का भी दौरा करें। देखें कि उसमें पॉलिथीन या कूड़ा कहां से जाता है। ऐसे सभी स्थानों पर जालियां लगाई जाएं। बैठक में डीएससी प्रदीप कौशिक, एसडीएम भूपेंद्र सिंह व रविंद्र कुमार, सीटीएम परवेश कादयान, डीआरओ प्रमोद चहल, एसई जे एस नारा, एक्सईएन अरूण मुंजाल, एक्सईएन प्रमोद शर्मा, एक्सईएन प्रतिभा, एक्सईएन रूपेश, एक्सईएन अमित गर्ग, एक्सईएन प्रदीप कुमार, एक्सईएन अनिल रोहिला, बीडीपोओ हरविंद्र, बीडीपोओ उमेद सिंह, बीडीपोओ युद्धवीर सिंह, तहसीलदार नरेंद्र, नायब तहसीलदार शेखर राठी, नायब तहसीलदार ईश्वर व नायब तहसीलदार अशोक आदि अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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उपकरणों को चालू हालत में रखा जाए
डीसी ने कहा कि बाढ़ राहत के कार्यों को लेकर सभी संबंधित विभाग समय रहते तैयारियां कर लें। उपकरणों की मरम्मत कराकर उन्हें चालू हालत में रखा जाए। विभाग को जहां पर अस्थाई बिजली कनेक्शन की जरूरत है, उसकी सूची भी पहले ही तैयार कर ली जाए। राज्य स्तरीय बाढ़ संरक्षण बैठक में जिले से संबंधित कुछ कार्यों को मंजूरी मिली है। अगर किसी कार्य को लेकर संबंधित विभाग को कोई परेशानी आ रही है तो उसकी सूचना दें। संबंधित एसडीएम अपने क्षेत्र का दौरा कर उपकरणों आदि की व्यवस्था का जायजा लें और अगर कोई कमी नजर आती है तो उसे दूर कराएं।
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- नालों की कराई जाए सफाई
उन्होंने कहा कि शहर के नालों की सफाई भी शुरू करा दी जाए। यह ध्यान रखा जाए कि संबंधित ठेकेदार ऊंचाई से शुरूआत करके टेल तक सफाई का काम करे। साथ ही सफाई से पहले, सफाई के दौरान और सफाई होने के बाद के फोटो भी लिए जाए। नियमानुसार कंट्रोल रूम की स्थापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि जिला आपदा प्रबंधन प्लान की समीक्षा करें और उसमें विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध संसाधनों को अपलोड करें। जिले में एमसी स्तर पर तीन-तीन और ब्लॉक स्तर पर दो-दो पोर्टेबल पंप सेट तैयार कराएं, जोकि कम से कम तीन इंच पानी निकालने की क्षमता हों और उनके साथ अन्य सभी उपकरण भी हों।