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आंदोलनकारियों की हुंकार; खाली नहीं जाएगा किसानों का बलिदान
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आंदोलन में मौत का शिकार हुए किसानों को टीकरी बॉर्डर पर श्रद्धांजलि देते किसान। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर बहादुरगढ़ में धरने पर बैठे हजारों किसानों ने रविवार को जगह-जगह सभाओं का आयोजन कर किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभाओं में खड़े होकर किसानों ने दो मिनट का मौन रखा। आंदोलनकारियों ने सभी मृतकों को शहीद संबोधित करते हुए उनके परिवारों की संभाल करने का आह्वान किया। मंचों से किसानों को संबोधित करते हुए आंदोलन के नेताओं ने कहा कि किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सरकार को तीनों कानून रद्द करने ही होंगे।
मशहूर हरियाणवी गायक कर्मबीर फौजी ने भी टीकरी बार्डर पर किसानों के बीच पहुंचकर सरकार से उनकी मांगें पूरी करने की मांग की। उन्होंने अपना एक गाना सुनाकर किसानों में जोश भरा। कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसानों ने इस मुद्दे पर रविवार को भी टीकरी बार्डर से आरपार की लड़ाई का एलान किया। वक्ताओं ने कहा कि वे चुनाव में बहक गए थे पर अब संभल गए हैं। भविष्य में वे इस तरह से किसी को भी तानाशाही करने जितनी ताकत नहीं देंगे। भाकियू के राष्ट्रीय नेता बलकरन सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन में अब तक जिन किसानों की कहीं भी मृत्यु हुई है, उनकी आत्मा की शांति के लिए पंजाब हरियाणा में गांव-गांव में भी शहीदी दिवस मनाया गया। इधर किसानों के आंदोलन को समर्थन करने वाले भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। पंजाब से रविवार को भी सैकड़ों किसान यहां पहुंचे। हरियाणा के विभिन्न जिलों से भी किसानों ने यहां पहुंचकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। कई हरियाणवी कलाकार टीकरी बार्डर पर पहुंचे और किसानों की आवाज बुलंद करते हुए सरकार से उक्त कानून निरस्त करने की मांग की। साथ में मृतक किसानों के आश्रितों को उचित मुआवजा व नौकरी देने की मांग की।
सभी श्रद्धांजलि सभाओं में मृत किसानों के चित्र लगाए गए थे। आंदोलनकारियों ने इन चित्रों के समक्ष पुष्प अर्पित कर मृत किसानों को श्रद्धांजलि दी। मृतकों की आत्मा की शांति के लिए कई जगह यज्ञ का आयोजन भी किया गया। किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के आश्रितों की सहायता के लिए भी रविवार को हाथ उठे। कैलिफोर्निया में बसे एनआरआई भी किसानों की मदद में उतरे। सिख पंचायत की ओर से कहा गया कि पंचायत मृतक किसानों के परिवारों को एडॉप्ट करेगी। कहा गया कि मृतक किसानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएंगे। किसानों की मदद के लिए लगातार हाथ आगे बढ़ रहे हैं। रविवार को टॉयलेट सीट, स्लीपिंग बैग और देसी गीजर भी किसानों की मदद के लिए पहुंचाए गए।
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आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गनाइजेशन, ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन और आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी और शहीद वेदी को लेकर टीकरी बॉर्डर पर जुलूस निकाला। महिला सांस्कृतिक संगठन की नेता रितु कौशिक ने कहा कि किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उनकी शहादत हमें ताकत और प्रेरणा देती है। मोदी सरकार चाहे जितनी शहादत लें, हम शहादत देने को तैयार हैं। जब तक सरकार किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों व बिजली बिल 2020 वापस नहीं लेती, आंदोलन चलता रहेगा।
एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश कुमार ने कहा कि किसानों की शहादत से किसान आंदोलन जन आंदोलन बन गया है। समाज के हर तबके के शोषित और पीड़ित लोग इस आंदोलन से भारी संख्या में जुड़ गए हैं। खेत मजदूर संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण ने कहा कि किसानों की शहादत को अंजाम तक पहुंचाने के लिए हमारा संगठन हरियाणा के गांव-गांव तक इस आंदोलन की आवाज को ले जा रहा है। फलस्वरूप किसान आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है।
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मशहूर हरियाणवी गायक कर्मबीर फौजी ने भी टीकरी बार्डर पर किसानों के बीच पहुंचकर सरकार से उनकी मांगें पूरी करने की मांग की। उन्होंने अपना एक गाना सुनाकर किसानों में जोश भरा। कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसानों ने इस मुद्दे पर रविवार को भी टीकरी बार्डर से आरपार की लड़ाई का एलान किया। वक्ताओं ने कहा कि वे चुनाव में बहक गए थे पर अब संभल गए हैं। भविष्य में वे इस तरह से किसी को भी तानाशाही करने जितनी ताकत नहीं देंगे। भाकियू के राष्ट्रीय नेता बलकरन सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन में अब तक जिन किसानों की कहीं भी मृत्यु हुई है, उनकी आत्मा की शांति के लिए पंजाब हरियाणा में गांव-गांव में भी शहीदी दिवस मनाया गया। इधर किसानों के आंदोलन को समर्थन करने वाले भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। पंजाब से रविवार को भी सैकड़ों किसान यहां पहुंचे। हरियाणा के विभिन्न जिलों से भी किसानों ने यहां पहुंचकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। कई हरियाणवी कलाकार टीकरी बार्डर पर पहुंचे और किसानों की आवाज बुलंद करते हुए सरकार से उक्त कानून निरस्त करने की मांग की। साथ में मृतक किसानों के आश्रितों को उचित मुआवजा व नौकरी देने की मांग की।
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सभी श्रद्धांजलि सभाओं में मृत किसानों के चित्र लगाए गए थे। आंदोलनकारियों ने इन चित्रों के समक्ष पुष्प अर्पित कर मृत किसानों को श्रद्धांजलि दी। मृतकों की आत्मा की शांति के लिए कई जगह यज्ञ का आयोजन भी किया गया। किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के आश्रितों की सहायता के लिए भी रविवार को हाथ उठे। कैलिफोर्निया में बसे एनआरआई भी किसानों की मदद में उतरे। सिख पंचायत की ओर से कहा गया कि पंचायत मृतक किसानों के परिवारों को एडॉप्ट करेगी। कहा गया कि मृतक किसानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएंगे। किसानों की मदद के लिए लगातार हाथ आगे बढ़ रहे हैं। रविवार को टॉयलेट सीट, स्लीपिंग बैग और देसी गीजर भी किसानों की मदद के लिए पहुंचाए गए।
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आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गनाइजेशन, ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन और आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी और शहीद वेदी को लेकर टीकरी बॉर्डर पर जुलूस निकाला। महिला सांस्कृतिक संगठन की नेता रितु कौशिक ने कहा कि किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उनकी शहादत हमें ताकत और प्रेरणा देती है। मोदी सरकार चाहे जितनी शहादत लें, हम शहादत देने को तैयार हैं। जब तक सरकार किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों व बिजली बिल 2020 वापस नहीं लेती, आंदोलन चलता रहेगा।
एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश कुमार ने कहा कि किसानों की शहादत से किसान आंदोलन जन आंदोलन बन गया है। समाज के हर तबके के शोषित और पीड़ित लोग इस आंदोलन से भारी संख्या में जुड़ गए हैं। खेत मजदूर संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण ने कहा कि किसानों की शहादत को अंजाम तक पहुंचाने के लिए हमारा संगठन हरियाणा के गांव-गांव तक इस आंदोलन की आवाज को ले जा रहा है। फलस्वरूप किसान आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है।

बहादुरगढ़ में रविवार को बालोर चौक पर मृत किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। संवाद- फोटो : Bahadurgarh