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जयपुरी झूलों पर विराजेंगे कान्हा, सजे बाजार
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दुकान पर कान्हा की ड्रेस खरीदती महिला।
- फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि महामारी के चलते इस बार मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं होंगे, लेकिन घरों में कान्हा के जन्म की खुशियां मनाने को लेकर गृहस्थ श्रद्धालुओं में उत्साह है। ठाकुरजी के साज-शृंगार परिधान, मुकुट, जेवर और आकर्षक खिलौनों की खरीदारी शुरू हो गई है। बहादुरगढ़ में श्रद्धालुओं के घरों में जयपुरी झूलों पर कान्हा विराजमान होंगे। दुकानदारों का कहना है कि कोरोना काल में बाजार में महज 20 फीसदी ही खरीदार पहुंच रहे हैं।
इस बार जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को है। इस पर्व में अब केवल एक ही दिन शेष बचा है। बाजारों में ज्यादा चहल-पहले नहीं है। इक्का-दुक्का दुकानों पर ही जन्माष्टमी के पर्व को लेकर मुकुट, झूले और परिधान बिक रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक यह भी पिछले वर्ष का बचा हुआ सामान है। इस बार नया सामान बाजार में नहीं आया है। लकड़ी के झूले बाजार में अबकी बार जयपुर से आए हैं।
दुकानों पर पहुंच रहे हैं केवल 20 फीसदी खरीदार
अबकी बार कोरोना के चलते मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं होंगे। मंदिरों को सजाने की तैयारियां जरूर चल रही हैं। बाजारों में जन्माष्टमी पर्व की खरीदारी के लिए केवल 20 फीसदी ही खरीदार पहुंच रहे हैं। इनमें भी अधिकतर सामान को देखने के बाद ही वापस चले जा रहे हैं। मेन बाजार के दुकानदार विक्रम का कहना है कि सभी त्योहारों पर कोरोना का असर पड़ रहा है। जब तक कोरोना महामारी खत्म नहीं होगी, तब तक त्यौहारों पर खरीदारी नहीं बढ़ेगी।
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बाजार में 100 रुपये से उपलब्ध है कान्हा की ड्रेस
जन्माष्टमी पर्व पर घरों में अपने नन्हें बच्चों को कान्हा बनाने का क्रेज है। इससे बाजारों में कान्हा ड्रेस की खरीदारी महिलाएं खूब कर रही हैं। हर कोई अपने नन्हें बच्चे को कान्हा बनाना चाहता है। बाजार में कान्हा की ड्रेस 100 रुपये से शुरू होकर 500 रुपये तक उपलब्ध है। दुकानदार पर खरीदारी कर रही महिला पिंकी ने कहा कि वे हर वर्ष अपने बच्चे को कान्हा की ड्रेस पहनाती हैं और उन्हें मंदिरों के दर्शन कराती हैं। उनका बच्चा कृष इस बार तीन वर्ष का हो गया है। वह उसे सजाने के लिए ड्रेस खरीदने के लिए बाजार में पहुंची हैं।
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इस बार जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को है। इस पर्व में अब केवल एक ही दिन शेष बचा है। बाजारों में ज्यादा चहल-पहले नहीं है। इक्का-दुक्का दुकानों पर ही जन्माष्टमी के पर्व को लेकर मुकुट, झूले और परिधान बिक रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक यह भी पिछले वर्ष का बचा हुआ सामान है। इस बार नया सामान बाजार में नहीं आया है। लकड़ी के झूले बाजार में अबकी बार जयपुर से आए हैं।
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दुकानों पर पहुंच रहे हैं केवल 20 फीसदी खरीदार
अबकी बार कोरोना के चलते मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं होंगे। मंदिरों को सजाने की तैयारियां जरूर चल रही हैं। बाजारों में जन्माष्टमी पर्व की खरीदारी के लिए केवल 20 फीसदी ही खरीदार पहुंच रहे हैं। इनमें भी अधिकतर सामान को देखने के बाद ही वापस चले जा रहे हैं। मेन बाजार के दुकानदार विक्रम का कहना है कि सभी त्योहारों पर कोरोना का असर पड़ रहा है। जब तक कोरोना महामारी खत्म नहीं होगी, तब तक त्यौहारों पर खरीदारी नहीं बढ़ेगी।
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बाजार में 100 रुपये से उपलब्ध है कान्हा की ड्रेस
जन्माष्टमी पर्व पर घरों में अपने नन्हें बच्चों को कान्हा बनाने का क्रेज है। इससे बाजारों में कान्हा ड्रेस की खरीदारी महिलाएं खूब कर रही हैं। हर कोई अपने नन्हें बच्चे को कान्हा बनाना चाहता है। बाजार में कान्हा की ड्रेस 100 रुपये से शुरू होकर 500 रुपये तक उपलब्ध है। दुकानदार पर खरीदारी कर रही महिला पिंकी ने कहा कि वे हर वर्ष अपने बच्चे को कान्हा की ड्रेस पहनाती हैं और उन्हें मंदिरों के दर्शन कराती हैं। उनका बच्चा कृष इस बार तीन वर्ष का हो गया है। वह उसे सजाने के लिए ड्रेस खरीदने के लिए बाजार में पहुंची हैं।