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Jhajjar-Bahadurgarh News: अब नहीं आती प्यार भरी पाती, डाकिये की साइकिल की घंटी भी नहीं सुनाई देतीं

Mon, 01 Jul 2024 06:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2024 06:20 AM IST
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Now the love pot doesn't come, not even the bell of the postman's bicycle is heard.
-फोटो 55 : संजीव बधवार
बहादुरगढ़। प्रलय के दिनों में कोई रोम बचाएगा, कोई मदीना कोई चांदी बचाएगा, कोई सोना, मैं निपट अकेला कैसे बचाऊंगा तुम्हारा प्रेम पत्र! बद्रीनारायण की चर्चित कविता का यह सवाल अब गैरमौजूं हो गया है। अब डाकिए प्रेम पत्र नहीं लाते, कभी सुख-दुख के साथ रहे डाकिए करीब-करीब पूरी तरह से भुला दिए गए हैं। आधुनिक तकनीक के साथ चिट्ठी के मायने भी बदल गए हैं। अब डाकिया घरों में पहुंचता है तो केवल सरकारी दस्तावेज लेकर।
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बहादुरगढ़ डाकघर में कुल 16 डाकिया तैनात हैं, जो प्रतिदिन शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर लोगों के डाक घरों तक पहुंचाने का काम करते हैं। राष्ट्रीय डाक कर्मचारी दिवस पर डाकियों की खासी पूछ हुआ करती थी। इस मौके पर मिठाई बंटती थी। यह कहते हुए बहादुरगढ़ के डाक विभाग में तैनात बलवान सिंह, नवीन कुमार, नसीब सिंह, जोगेंद्र सिंह के अलावा अन्य कई कर्मचारियों के चेहरों पर घनी उदासी उतर आती है। बहादुरगढ़ के लाइनपार क्षेत्र में पिछले पांच साल से नसीब सिंह डाक बांटने का काम कर रहे हैं। रोहतक निवासी जोगेंद्र ङ्क्षसह बहादुरगढ़ डाक विभाग में 10 साल से, नवीन कुमार 5 साल से तो बलवान सिंह 15 वर्षों से यह काम संभाल रहे हैं।
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15 वर्षों से डाक बांट रहा हूं। का काम करते हैं। शुरूआती दिनों में डाक बांटने के कुछ समय बाद ही लोग उन्हें शक्ल से ही पहचान लिया करते थे। जिस भी घर के सामने से निकला करते थे, लोग टकटकी लगाकर देखते थे, लेकिन आज परिस्थितियां बिल्कुल विपरीत हैं। लोग अपने खतों का नहीं बल्कि सरकारी पार्सलों का इंतजार करते हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक के इस दौर ने पुरानी पीढ़ी से एक कीमती चीज छीन ली है।
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-बलवान सिंह, कर्मचारी



मैं पिछले काफी समय से यहां तैनात हूं। वह दौर काफी अलग था और यह दौर बेहद अलग है। अब खत के बारे में कोई नहीं पूछता, पहले उनसे लोग खत आने के बारे में पूछा करते थे। 10 वर्ष पहले मैंने लोगों के घरों तक चिट्ठियां पहुंचाई है।


-जोगेंद्र सिंह, कर्मचारी



आधुनिक युग चला हुआ है। इस युग में चिट्ठी के मायने बदल गए हैं। न तो विभाग में किसी की चिट्ठी आती है और न ही कोई दूसरे स्थानों पर भेजने के लिए आता है। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया ने सब कुछ बदलकर रख दिया है।

-संजीव बधवार, पोस्टमास्टर



-फोटो 52 : बहादुरगढ़ में झज्जर रोड पर स्थित डाकघर।

-फोटो 53 : बलवान सिंह

-फोटो 54 : जोगेंद्र सिंह

-फोटो 55 : संजीव बधवार

-फोटो 53 : बलवान सिंह

-फोटो 54 : जोगेंद्र सिंह

-फोटो 55 : संजीव बधवार
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