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Haryana Election: बहुकोणीय मुकाबले में फंसी पार्टियां... कैडर वोट से निकलेगी जीत की राह; यहां जाट मतदाता अधिक
Mon, 23 Sep 2024 11:46 AM IST
शाहरुख खान
पंकज रोहिल्ला, अमर उजाला, बहादुरगढ़
पंकज रोहिल्ला, अमर उजाला, बहादुरगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 23 Sep 2024 11:46 AM IST
सार
हरियाणा की इस हॉट सीट पर कैडर वोट से ही जीत की राह निकलेगी। दो निर्दलियों समेत पांचों प्रत्याशियों को मशक्कत करनी पड़ रही है।
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Haryana Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गेटवे ऑफ हरियाणा कहे जाने वाले बहादुरगढ़ में पल-पल बदल रहे माहौल के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक होता जा रहा है। कभी किसी प्रत्याशी का पलड़ा भारी हो रहा है तो कभी कोई प्रचार में आगे निकल रहा है। इस बार यहां मुकाबला बहुकोणीय है, क्योंकि दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने तीन पार्टी प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं।
जीत के लिए पांचों प्रत्याशी मैदान में जी-जान से जुटे हैं। भाजपा ने वर्ष 2014 व 2019 में ब्राह्मण उम्मीदवार नरेश कौशिक को उतारा। एक बार तो वे जीत गए लेकिन पिछली बार कांग्रेस के राजेंद्र जून से हार गए। इस बार उनके छोटे भाई दिनेश कौशिक मैदान में हैं।
नॉन जाट चेहरा होने के चलते भाजपा यहां से खुद को मजबूत मान रही है क्योंकि बाकी उम्मीदवार जाट हैं। इनमें कांग्रेस से राजेंद्र जून, इनेलो-बसपा से स्व. नफे सिंह राठी की पत्नी शीला राठी, आम आदमी पार्टी से कुलदीप छिकारा, निर्दलीय के तौर पर राजेश जून और पंचायती उम्मीदवार रमेश दलाल शामिल हैं।
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राजेंद्र जून, राजेश जून और दिनेश कौशिक एक ही गांव लोवा खुर्द के हैं। राजेंद्र जून सत्ता विरोधी लहर और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के चेहरे के भरोसे जीत के सपने देख रहे हैं। वह तीन बार विधायक भी रह चुके हैं जबकि उनके सामने अधिकतर प्रत्याशी पहली बार चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
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जीत के लिए पांचों प्रत्याशी मैदान में जी-जान से जुटे हैं। भाजपा ने वर्ष 2014 व 2019 में ब्राह्मण उम्मीदवार नरेश कौशिक को उतारा। एक बार तो वे जीत गए लेकिन पिछली बार कांग्रेस के राजेंद्र जून से हार गए। इस बार उनके छोटे भाई दिनेश कौशिक मैदान में हैं।
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नॉन जाट चेहरा होने के चलते भाजपा यहां से खुद को मजबूत मान रही है क्योंकि बाकी उम्मीदवार जाट हैं। इनमें कांग्रेस से राजेंद्र जून, इनेलो-बसपा से स्व. नफे सिंह राठी की पत्नी शीला राठी, आम आदमी पार्टी से कुलदीप छिकारा, निर्दलीय के तौर पर राजेश जून और पंचायती उम्मीदवार रमेश दलाल शामिल हैं।
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राजेंद्र जून, राजेश जून और दिनेश कौशिक एक ही गांव लोवा खुर्द के हैं। राजेंद्र जून सत्ता विरोधी लहर और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के चेहरे के भरोसे जीत के सपने देख रहे हैं। वह तीन बार विधायक भी रह चुके हैं जबकि उनके सामने अधिकतर प्रत्याशी पहली बार चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
बहादुरगढ़ रोहतक लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती है जहां साढ़े तीन महीने पहले हुए चुनाव में कांग्रेस से दीपेंद्र हुड्डा सांसद बने थे। हुड्डा को बहादुरगढ़ से काफी बढ़त मिली थी। राजेंद्र की सबसे बड़ी उम्मीद की वजह भी यही है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी दिनेश कौशिक पीएम नरेंद्र मोदी के नाम व जाट और गैर जाट विभाजन वोटों के सहारे विधानसभा जाने का रास्ता खोज रहे हैं।
दूसरी तरफ इनेलो-बसपा उम्मीदवार शीला राठी भी उम्मीद जता रही हैं कि पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या के बाद बने हालात में जनता उनके प्रति सहानुभूति दिखाएगी। निर्दलीय प्रत्याशी राजेश जून ने 2014 में निर्दलीय ताल ठोककर 28 हजार 432 वोट पाए थे।
इसी के भरोसे वे पार्टी प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वे पिछले डेढ़ साल से प्रचार में जुटे हैं। किसान नेता रमेश दलाल का वर्चस्व भी कई गांवों में दिखाई देता है। बड़े किसान नेता के रूप में उनकी पहचान है। इन पांच प्रत्याशियों में कौन बाजी मारेगा, यह अभी कहना मुश्किल है लेकिन इतना जरूर तय है कि यहां जीत की नैया कैडर वोट के सहारे ही पार होती दिख रही है।
लोग गिना रहे मुद्दे
दयानंद नगर के रहने वाले सुशील शर्मा का कहना है कि भाजपा के 10 साल के शासन में बहादुरगढ़-झज्जर रोड नहीं बनाया जा सका। शहर की अधिकतर सड़कें टूट चुकी हैं। लोगों को गंदा व बदबूदार पानी पीने को मिल रहा है। लाइट व सीवरेज प्रणाली भी दुरुस्त नहीं हो पाई।
दयानंद नगर के रहने वाले सुशील शर्मा का कहना है कि भाजपा के 10 साल के शासन में बहादुरगढ़-झज्जर रोड नहीं बनाया जा सका। शहर की अधिकतर सड़कें टूट चुकी हैं। लोगों को गंदा व बदबूदार पानी पीने को मिल रहा है। लाइट व सीवरेज प्रणाली भी दुरुस्त नहीं हो पाई।
वहीं नई बस्ती निवासी राजेंद्र कुमार का दावा है कि बहादुरगढ़ वासियों को मूलभूत सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं। क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़कों की हालत खस्ता है। शिकायतों के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वर्तमान विधायक भी आमजन की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देते।
जाटों की संख्या ज्यादा
बहादुरगढ़ यूं तो जाट बहुल क्षेत्र है, लेकिन एससी, बीसी, बनिया व पंजाबी भी कम नहीं हैं। जाट मतदाताओं की संख्या 98 हजार व ब्राह्मण की 24 हजार हैं। अनुसूचित जाति के वोटर 34 हजार, पिछड़ा वर्ग के 38 हजार, बनिया 18 हजार, पंजाबी 12 हजार, मुस्लिम 10 हजार और प्रवासी मतदाताओं की संख्या लगभग 8 हजार है।
बहादुरगढ़ यूं तो जाट बहुल क्षेत्र है, लेकिन एससी, बीसी, बनिया व पंजाबी भी कम नहीं हैं। जाट मतदाताओं की संख्या 98 हजार व ब्राह्मण की 24 हजार हैं। अनुसूचित जाति के वोटर 34 हजार, पिछड़ा वर्ग के 38 हजार, बनिया 18 हजार, पंजाबी 12 हजार, मुस्लिम 10 हजार और प्रवासी मतदाताओं की संख्या लगभग 8 हजार है।
पिछले तीन चुनावों के नतीजे
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट मिले |
| 2019 | राजेंद्र जून | कांग्रेस | 55825 |
| 2014 | नरेश कौशिक | भाजपा | 38341 |
| 2009 | राजेंद्र जून | कांग्रेस | 38641 |