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डीएसपी की शिकायत करने पहुंचे थे दलित परिवार, सीआईए इंचार्ज ने मारे धक्के
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:47 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
फरियादी बनकर न्याय पाने के लिए सोमवार को झज्जर लघु सचिवालय में पहुंचे बहादुरगढ़ के दलित समाज के कुछ लोगों के साथ जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों द्वारा धक्का-मुक्की करने और उन्हें बगैर किसी अधिकारी से मिले सचिवालय से बाहर का रास्ता दिखाने का मामला प्रकाश में आया है। डीसी झज्जर के पास फरियाद लेकर पहुंचे दलित समाज के यह लोग बहादुरगढ़ डीएसपी भगतराम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय लघु सचिवालय पहुंचे थे।
लेकिन उस दौरान सचिवालय के द्वितीय तल पर कांफ्रेंस हाल में मीटिंग चल रही थी। 25 सितंबर को राम रहीम मसले पर जिले की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस मीटिंग में जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही बैठक में मौजूद जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने नारेबाजी का शोर सुना तो तुरंत मौके पर मौजूद थाना प्रभारियों को बाहर भेजा। मीटिंग रूम से बाहर आकर जब पुलिस अधिकारी समाज के लोगों से बात कर रहे थे तो एक युवक ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। नारेबाजी कर रहे युवक का सीआईए इंचार्ज ललित कुमार ने मुंह दबाया, जिसके बाद पुलिसकर्मी आपा खो बैठे और सभी को धक्के मारते हुए बाहर ले गए।
ये था मामला
बहादुरगढ़ के दलित समाज के लोग वहां के डीएसपी भगतराम के खिलाफ शिकायत करने आए थे। आरोप था कि समाज के ही रामकुमार नामक व्यक्ति के बेटे प्रदीप की निजी कंपनी में काम करने के दौरान मौत हो गई थी। उसी मसले पर न्याय पाने के लिए उन्होंने जाम लगाया गया था। लेकिन पुलिस ने इस मसले पर बुल्लड़ पहलवान नामक एक सामाजिक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल में डाल दिया। इस मामले में जब समाज के लोगों ने वहां के डीएसपी से मुलाकात की तो उन्हें वहां न्याय मिलने की बजाय दुर्व्यवहार किया गया। इसी मामले में सोमवार को वे झज्जर में डीसी मिलने आए थे। लेकिन उन्हें न्याय मिलने की बजाय पुलिस ने धक्के देकर सचिवालय से बाहर निकाल दिया।
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झज्जर।
फरियादी बनकर न्याय पाने के लिए सोमवार को झज्जर लघु सचिवालय में पहुंचे बहादुरगढ़ के दलित समाज के कुछ लोगों के साथ जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों द्वारा धक्का-मुक्की करने और उन्हें बगैर किसी अधिकारी से मिले सचिवालय से बाहर का रास्ता दिखाने का मामला प्रकाश में आया है। डीसी झज्जर के पास फरियाद लेकर पहुंचे दलित समाज के यह लोग बहादुरगढ़ डीएसपी भगतराम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय लघु सचिवालय पहुंचे थे।
लेकिन उस दौरान सचिवालय के द्वितीय तल पर कांफ्रेंस हाल में मीटिंग चल रही थी। 25 सितंबर को राम रहीम मसले पर जिले की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस मीटिंग में जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही बैठक में मौजूद जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने नारेबाजी का शोर सुना तो तुरंत मौके पर मौजूद थाना प्रभारियों को बाहर भेजा। मीटिंग रूम से बाहर आकर जब पुलिस अधिकारी समाज के लोगों से बात कर रहे थे तो एक युवक ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। नारेबाजी कर रहे युवक का सीआईए इंचार्ज ललित कुमार ने मुंह दबाया, जिसके बाद पुलिसकर्मी आपा खो बैठे और सभी को धक्के मारते हुए बाहर ले गए।
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ये था मामला
बहादुरगढ़ के दलित समाज के लोग वहां के डीएसपी भगतराम के खिलाफ शिकायत करने आए थे। आरोप था कि समाज के ही रामकुमार नामक व्यक्ति के बेटे प्रदीप की निजी कंपनी में काम करने के दौरान मौत हो गई थी। उसी मसले पर न्याय पाने के लिए उन्होंने जाम लगाया गया था। लेकिन पुलिस ने इस मसले पर बुल्लड़ पहलवान नामक एक सामाजिक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल में डाल दिया। इस मामले में जब समाज के लोगों ने वहां के डीएसपी से मुलाकात की तो उन्हें वहां न्याय मिलने की बजाय दुर्व्यवहार किया गया। इसी मामले में सोमवार को वे झज्जर में डीसी मिलने आए थे। लेकिन उन्हें न्याय मिलने की बजाय पुलिस ने धक्के देकर सचिवालय से बाहर निकाल दिया।
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