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थाने में अब नहीं पूछी जाएगी शिकायकर्ता से जाति
Updated Thu, 07 Dec 2017 02:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
शिकायत या सूचना देने वालों से पुलिस थानों और 100 नंबर पर जाति नहीं पूछी जाएगी। डीएसपी हेड क्वार्टर हंसराज ने जाति का उल्लेख न करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि फिर भी कोई पुलिसकर्मी किसी से जाति पूछता है तो व्यक्ति उसकी शिकायत अधिकारियों को कर सकता है। इसके बाद उक्त पुलिसकर्मी के खिलाफ अधिकारी एक्शन लेंगे।
वकील ने दी थी सीएम विंडो में शिकायत
किसी भी पुलिसिया कार्रवाई के दौरान शिकायत देने वाले और आरोपी की जाति पूछी जाती है। यहां तक की जिले में 100 नंबर पर भी यह व्यवस्था है। प्रेम नगर निवासी एडवोकेट नवीन सिंगल ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और सीएम विंडो में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि शिकायत देने वाले से जाति पूछना सही नहीं है। बहुत से लोग जाति बताने में संकोच करते हैं। वैसे भी हाईकोर्ट ने सरकार से रजिस्टर में से जाति का कॉलम हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद जाति पूछी जा रही है। गत 11 नवंबर को एक एक्सीडेंट की सूचना देने पर उनके साथ भी ऐसा हुआ। सरकार इस ओर ध्यान दें।
शिकायत पर लिया संज्ञान
सीएम विंडो में दी गई इस शिकायत पर संज्ञान हुआ और डीएसपी हेड क्वार्टर झज्जर हंसराज ने शिकायकर्त्ता से बात की। इस बातचीत के उपरांत अब डीएसपी हंसराज की ओर से सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इसमें साफ-साफ कहा गया कि 100 नंबर पर कॉल करने वाले व्यक्ति से जाति नहीं पूछनी है। सिर्फ उससे लोकेशन की जानकारी लेनी है। 100 नंबर पर तैनात रहने वाले हरेक कर्मचारी को इस पर ध्यान देना है। यदि जाति पूछी गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। चौकी-थानों में भी यह व्यवस्था लागू होती है।
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आधार कार्ड भी विकल्प
डीएसपी हंसराज की मानें तो केवल निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी ही जाति पूछते हैं। वो इसलिए कि कई बार कुछेक क्षेत्र में एक नाम के एक से अधिक व्यक्ति होते हैं। इस वजह से थोड़ी दिक्कतें होती हैं। इसलिए अब शिकायकर्त्ता के आसपास के मुख्य स्थान व एक-दो प्रमुख लोगों के नाम पूछे जा सकते हैं। वहीं वकील नवीन ने सुझाव दिया है कि डिजिटल युग है तो आधार कार्ड इस दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकता है।
अच्छी पहल
सामाजिक कार्यकर्ता संजीव मलिक ने कहा कि जब जाति का कोई काम ही नहीं है तो क्यों पूछी जाए। जिला पुलिस प्रशासन की यह अच्छी पहल है। निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को भी इस व्यवस्था को बनाने में सहयोग करना चाहिए, तभी यह सार्थक सिद्ध हो पाएगी।
न पूछी जाए जाति : डीएसपी
डीएसपी हंसराज ने कहा कि किसी भी सूचना देने वाले या शिकायतकर्ता से जाति पूछना अनिवार्य नहीं है। यदि फिर भेजी किसी व्यक्ति से जाति पूछी जाती है तो वह व्यक्ति शिकायत करें। उक्त मामले में एक्शन लिया जाएगा।
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बहादुरगढ़।
शिकायत या सूचना देने वालों से पुलिस थानों और 100 नंबर पर जाति नहीं पूछी जाएगी। डीएसपी हेड क्वार्टर हंसराज ने जाति का उल्लेख न करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि फिर भी कोई पुलिसकर्मी किसी से जाति पूछता है तो व्यक्ति उसकी शिकायत अधिकारियों को कर सकता है। इसके बाद उक्त पुलिसकर्मी के खिलाफ अधिकारी एक्शन लेंगे।
वकील ने दी थी सीएम विंडो में शिकायत
किसी भी पुलिसिया कार्रवाई के दौरान शिकायत देने वाले और आरोपी की जाति पूछी जाती है। यहां तक की जिले में 100 नंबर पर भी यह व्यवस्था है। प्रेम नगर निवासी एडवोकेट नवीन सिंगल ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और सीएम विंडो में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि शिकायत देने वाले से जाति पूछना सही नहीं है। बहुत से लोग जाति बताने में संकोच करते हैं। वैसे भी हाईकोर्ट ने सरकार से रजिस्टर में से जाति का कॉलम हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद जाति पूछी जा रही है। गत 11 नवंबर को एक एक्सीडेंट की सूचना देने पर उनके साथ भी ऐसा हुआ। सरकार इस ओर ध्यान दें।
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शिकायत पर लिया संज्ञान
सीएम विंडो में दी गई इस शिकायत पर संज्ञान हुआ और डीएसपी हेड क्वार्टर झज्जर हंसराज ने शिकायकर्त्ता से बात की। इस बातचीत के उपरांत अब डीएसपी हंसराज की ओर से सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इसमें साफ-साफ कहा गया कि 100 नंबर पर कॉल करने वाले व्यक्ति से जाति नहीं पूछनी है। सिर्फ उससे लोकेशन की जानकारी लेनी है। 100 नंबर पर तैनात रहने वाले हरेक कर्मचारी को इस पर ध्यान देना है। यदि जाति पूछी गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। चौकी-थानों में भी यह व्यवस्था लागू होती है।
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आधार कार्ड भी विकल्प
डीएसपी हंसराज की मानें तो केवल निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी ही जाति पूछते हैं। वो इसलिए कि कई बार कुछेक क्षेत्र में एक नाम के एक से अधिक व्यक्ति होते हैं। इस वजह से थोड़ी दिक्कतें होती हैं। इसलिए अब शिकायकर्त्ता के आसपास के मुख्य स्थान व एक-दो प्रमुख लोगों के नाम पूछे जा सकते हैं। वहीं वकील नवीन ने सुझाव दिया है कि डिजिटल युग है तो आधार कार्ड इस दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकता है।
अच्छी पहल
सामाजिक कार्यकर्ता संजीव मलिक ने कहा कि जब जाति का कोई काम ही नहीं है तो क्यों पूछी जाए। जिला पुलिस प्रशासन की यह अच्छी पहल है। निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को भी इस व्यवस्था को बनाने में सहयोग करना चाहिए, तभी यह सार्थक सिद्ध हो पाएगी।
न पूछी जाए जाति : डीएसपी
डीएसपी हंसराज ने कहा कि किसी भी सूचना देने वाले या शिकायतकर्ता से जाति पूछना अनिवार्य नहीं है। यदि फिर भेजी किसी व्यक्ति से जाति पूछी जाती है तो वह व्यक्ति शिकायत करें। उक्त मामले में एक्शन लिया जाएगा।