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गोताखोरों के पास नहीं थी सुरक्षा किट, ग्रामीणों ने तालाब से निकाला शव
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चरखी दादरी। मंदोला निवासी रणजीत का शव ग्रामीणों ने 15 घंटे बाद वीरवार सुबह तालाब से निकाला। मृतक के जीजा विक्रम ने बताया कि सात बजे सूचना देने के बाद देर रात साढ़े 12 बजे दो गोताखोर वहां पहुंचे। सुरक्षा किट न होने का हवाला देकर उन्होंने तालाब में उतरने से मना कर दिया। इसके बाद भी ग्रामीण अपने स्तर पर रात ढाई बजे तक सर्च अभियान चलाते रहे। इसके बाद सुबह पांच बजे दोबारा सर्च अभियान शुरू किया गया। वहीं, मैहड़ा व खेड़ी बूरा के माहिर तैराकों ने सुबह लंबी लकड़ियों की मदद से तालाब में शव ढूंढकर बाहर निकाला।
जिले में एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार आपदा प्रबंधन उपकरणों की कमी खली है। करीब एक सप्ताह पूर्व भी कुएं में उतरे ताऊ और भतीजे की जहरीली गैस के प्रभाव से मौत हो गई थी। उन्हें भी करीब साढ़े तीन घंटे बाद कुएं से बाहर निकाला जा सका था। खास बात यह है कि रणजीत के शव की तरह ही दोनों के शव भी ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बाहर निकाले थे। चरखी दादरी जिले में इन उपकरणों की बेहद दरकार है।
रणजीत के जीजा विक्रम ने बताया कि सूचना देने के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच तो गई थी लेकिन गोताखोरा करीब साढ़े छह घंटे बाद मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी ऑक्सीजन सिलिंडर, मास्क न होने और तालाब की गहराई ज्यादा होने का हवाला देकर रात को पानी में उतरने से इनकार कर दिया। परिजनों ने बताया कि मौके पर पहुंचे तहसीलदार से भी गोताखोरों को बुलाने की मांग की गई थी। इसके बाद वीरवार सुबह परिजनों ने प्रशासन से बातचीत की तो पहले छह बजे, फिर आठ बजे और इसके बाद साढ़े नौ बजे और गोताखोर भेजने का आश्वासन मिला। परिजनों ने बताया कि जब सुबह छह और आठ बजे गोतखोर नहीं पहुंचे तो वहां मौजूद ग्रामीणों ने मैहड़ा व खेड़ी बत्तर गांवों से लोगों को बुलाया। वे करीब 20 फीट लंबी लकड़ी लेकर तालाब में उतरे और तलहटी से शव को बरामद कर लिया। परिजनों ने आरोप लगाए कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। कलियाणा और मंदोला सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण भी सर्च अभियान में जुटे रहे। तालाब की गहराई का सही आकलन न होने और वीरवार सुबह तक शव न मिलने पर ग्रामीणों ने तालाब से पानी निकासी के लिए ट्रैक्टरों का सहारा लिया। ग्रामीणों ने तीन ट्रैक्टरों की मोटरें चलाकर पाइप के जरिए पानी निकालना शुरू किया। दूसरी तरफ ग्रामीणों का सर्च अभियान भी जारी रहा।
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जिले में एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार आपदा प्रबंधन उपकरणों की कमी खली है। करीब एक सप्ताह पूर्व भी कुएं में उतरे ताऊ और भतीजे की जहरीली गैस के प्रभाव से मौत हो गई थी। उन्हें भी करीब साढ़े तीन घंटे बाद कुएं से बाहर निकाला जा सका था। खास बात यह है कि रणजीत के शव की तरह ही दोनों के शव भी ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बाहर निकाले थे। चरखी दादरी जिले में इन उपकरणों की बेहद दरकार है।
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रणजीत के जीजा विक्रम ने बताया कि सूचना देने के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच तो गई थी लेकिन गोताखोरा करीब साढ़े छह घंटे बाद मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी ऑक्सीजन सिलिंडर, मास्क न होने और तालाब की गहराई ज्यादा होने का हवाला देकर रात को पानी में उतरने से इनकार कर दिया। परिजनों ने बताया कि मौके पर पहुंचे तहसीलदार से भी गोताखोरों को बुलाने की मांग की गई थी। इसके बाद वीरवार सुबह परिजनों ने प्रशासन से बातचीत की तो पहले छह बजे, फिर आठ बजे और इसके बाद साढ़े नौ बजे और गोताखोर भेजने का आश्वासन मिला। परिजनों ने बताया कि जब सुबह छह और आठ बजे गोतखोर नहीं पहुंचे तो वहां मौजूद ग्रामीणों ने मैहड़ा व खेड़ी बत्तर गांवों से लोगों को बुलाया। वे करीब 20 फीट लंबी लकड़ी लेकर तालाब में उतरे और तलहटी से शव को बरामद कर लिया। परिजनों ने आरोप लगाए कि प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। कलियाणा और मंदोला सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण भी सर्च अभियान में जुटे रहे। तालाब की गहराई का सही आकलन न होने और वीरवार सुबह तक शव न मिलने पर ग्रामीणों ने तालाब से पानी निकासी के लिए ट्रैक्टरों का सहारा लिया। ग्रामीणों ने तीन ट्रैक्टरों की मोटरें चलाकर पाइप के जरिए पानी निकालना शुरू किया। दूसरी तरफ ग्रामीणों का सर्च अभियान भी जारी रहा।
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