फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Boxer Sagar of Jhajjar Haryana confirmed medal in Commonwealth Games

Commonwealth Games: झज्जर के किसान के बेटे सागर अहलावत का पदक पक्का, जिले में खुशी की लहर

Thu, 04 Aug 2022 11:29 PM IST
भूपेंद्र सिंह राकेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
राकेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 04 Aug 2022 11:29 PM IST
सार

सागर की जीत से जिलेभर में खुशी का माहौल है। युवाओं ने कहा कि सागर गोल्ड मेडल लाएगा। सागर के पिता राजेश अहलावत एक किसान हैं और गांव में जमीन लेकर खेती करते हैं। 

विज्ञापन
Boxer Sagar of Jhajjar Haryana confirmed medal in Commonwealth Games
सागर अहलावत कोच हितेश देशवाल के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के झज्जर जिले के गांव धांधलान में साधारण किसान का बेटा सागर बर्मिंघम में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में अपने मुक्के का दम दिखाकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। सागर सैमुल्स के मुक्केबाज को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गया है। सेमीफाइनल में पहुंचने की खबर सुनते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। 

विज्ञापन


कोच हितेश देशवाल ने बताया कि सागर ने तीनों राउंड में जबरदस्त बढ़त बनाए रखी। हालांकि पहले राउंड में सैमुल्स के खिलाड़ी ने मुक्केबाजी के दांव पेच आजमाए थे लेकिन सागर के पंच के आगे हार मान ली। उन्होंने बताया कि सागर गांव धांधलान से मुक्केबाजी के गुर सीखने के आया था। सागर जिले का एक होनहार व प्रतिभावान खिलाड़ी है। सागर लगातार चार साल तक ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन रहा है।
विज्ञापन


इसके अलावा भी इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी चैंपियनशिप अपने नाम रखी है। वहीं सागर ने नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल प्राप्त किया है। बता दें सागर ने मुक्केबाज नरेंद्र को ट्रायल में हराकर कॉमनवेल्थ मे प्रवेश किया था। वहीं उन्होंने आर्मी के मुक्केबाज सतीश कुमार को भी ओलंपिक चैंपियनशिप में हराकर अपना लोहा मनवाया है। गौरतलब है कि सतीश कुमार को पिछले बारह सालो में कोई भी नही हरा पाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


सागर के कोच हितेश देशवाल ने बताया कि सागर की फिटनेस और लंबाई अच्छी है। इसे देखते हुए उन्होंने 4 साल पहले मुक्केबाज सीखने के लिए कहा था। सागर ने उनकी बात मानीं और मुक्केबाजी सीखनी शुरू कर दी। उस वक्त उसकी उम्र 18 साल थी। सागर के पंच काफी मजबूत थे। लंबाई का वह फायदा उठाता था।

उन्हें लगने लगा था कि मुक्केबाजी में सागर एक दिन बुलंदियों तक पहुंचेगा। उसने पूरी मेहनत की। कम समय में सागर ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और चंडीगढ़ चैंपियन बना। उसके बाद लगातार दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना और दो बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना। इसके साथ ही राष्ट्रीय मुक्केबाजी में पदक जीता। इसके बाद उसका देश की टीम के लिए चले कैंप में चयन हो गया।

कोरोना काल में भी अभ्यास नहीं छोड़ा
कोरोना काल के दौरान जब कैंप बंद हुए तो कोच हितेश देशवाल ने सागर को अकेले भी प्रेक्टिस कराई। कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में सागर ने शानदार प्रदर्शन किया और उसने पहले ट्रायल में ओलंपिक 2020 प्रतिभागी सतीश कुमार को हराया, फिर फाइनल में नरेंद्र को मात दी। सागर के प्रदर्शन की बदौलत उसका चयन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक इंग्लैंड के बर्मिंघम आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में हो गया।


परिजनों को भरोसा देश का मान बढ़ाएगा उनका बेटा
सागर के पिता राजेश अहलावत एक किसान हैं और गांव में जमीन लेकर खेती करते हैं। उन्होंने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया है। उसकी माता मुकेश गृहिणी है और उसकी एक बहन है। पिता राजेश व माता मुकेश का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि उनका बेटा राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर देश का मान बढ़ाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed