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बच्चों ने निकाली राधा-कृष्ण के जीवन पर आधारित झांकिंयां
Updated Fri, 01 Sep 2017 01:25 AM IST
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राधा-कृष्ण के जीवन पर आधारित झांकियां निकाली
चरखी दादरी।
गांधी नगर स्थित चेतनराम सत्संग भवन परिसर में श्री गणेश महोत्सव मंडल के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने वीरवार को श्री कृष्ण के जीवन को चित्रित करती हुई कन्हैया बाल रूप, गोपियों के संग रास सहित अन्य झांकियां निकालीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गणेश महोत्सव मंडल प्रधान बजरंग लाल व संरक्षक नवीन ने संयुक्त रूप से की। एचडी शिक्षण संस्थान संचालक बलराज फौगाट ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने दो सितंबर को झांकियां निकालने वाले बच्चों को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को भगवान का दूसरा रूप कहा गया हैं, इसके पीछे बहुत ही बड़ा कारण निहित है। बचपन वह समय होता है जबकि हमारे हृदय के अंदर निश्छल भाव विराजमान होता है। इस समय पर किसी भी राग, द्वेष, घृणा का कोई अंश अंतर में नहीं होता बल्कि समर्पण व प्रेम की भावना से ही हृदय लबरेज रहता है। शास्त्रों में भी प्रभु को पाने का सबसे सरल मार्ग प्रेम व समर्पण ही बताया गया है। इस तरह से परमात्मा व बाल मन को हम एक दूसरे का पूरक भी कह सकते हैं। अगर जीवन में वास्तविक खुशी को पाना चाहते हैं तो हमें अपने मन व विचारों को बच्चों की भांति ही राग, द्वेष, घृणा आदि भावों से मुक्त करना होगा तभी हम सही मायनों में परमात्मा को पाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इस अवसर पर अशोक फौगाट, सुनील, मनीष, कृष्ण गोयल, सुनील, दलीप गर्ग, नरेंद्र, नितिन, मुकेश, राहुल, कार्तिक अग्रवाल, जतिन, मोहित गाबा, साहिल, रामगोपाल, ओमप्रकाश, अनिल आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।
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चरखी दादरी।
गांधी नगर स्थित चेतनराम सत्संग भवन परिसर में श्री गणेश महोत्सव मंडल के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने वीरवार को श्री कृष्ण के जीवन को चित्रित करती हुई कन्हैया बाल रूप, गोपियों के संग रास सहित अन्य झांकियां निकालीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गणेश महोत्सव मंडल प्रधान बजरंग लाल व संरक्षक नवीन ने संयुक्त रूप से की। एचडी शिक्षण संस्थान संचालक बलराज फौगाट ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने दो सितंबर को झांकियां निकालने वाले बच्चों को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को भगवान का दूसरा रूप कहा गया हैं, इसके पीछे बहुत ही बड़ा कारण निहित है। बचपन वह समय होता है जबकि हमारे हृदय के अंदर निश्छल भाव विराजमान होता है। इस समय पर किसी भी राग, द्वेष, घृणा का कोई अंश अंतर में नहीं होता बल्कि समर्पण व प्रेम की भावना से ही हृदय लबरेज रहता है। शास्त्रों में भी प्रभु को पाने का सबसे सरल मार्ग प्रेम व समर्पण ही बताया गया है। इस तरह से परमात्मा व बाल मन को हम एक दूसरे का पूरक भी कह सकते हैं। अगर जीवन में वास्तविक खुशी को पाना चाहते हैं तो हमें अपने मन व विचारों को बच्चों की भांति ही राग, द्वेष, घृणा आदि भावों से मुक्त करना होगा तभी हम सही मायनों में परमात्मा को पाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इस अवसर पर अशोक फौगाट, सुनील, मनीष, कृष्ण गोयल, सुनील, दलीप गर्ग, नरेंद्र, नितिन, मुकेश, राहुल, कार्तिक अग्रवाल, जतिन, मोहित गाबा, साहिल, रामगोपाल, ओमप्रकाश, अनिल आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।
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