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Jhajjar-Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ में 3 हजार आवारा कुत्तों का होगा बधियाकरण
Sun, 09 Nov 2025 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 09 Nov 2025 02:17 AM IST
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-फोटो 59 : सरोज राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद बहादुरगढ़।
- फोटो : samvad
बहादुरगढ़। शहर की गलियों में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए नगर परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत परिषद ने तीन हजार कुत्तों का बधियाकरण (नसबंदी) कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए संबंधित एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। इस काम पर नगर परिषद की ओर से करीब 36 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों को परेशानी हो रही थी और कुत्तों के काटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थी। परिषद का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यह पूरी प्रक्रिया मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से पूरी की जाए, जिससे न तो पशुओं को कष्ट हो और न ही शहरवासियों को असुविधा। प्रत्येक कुत्ते का बधियाकरण 1189 रुपये की दर से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी करके जींद की नैन एजेंसी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। टेंडर शर्तों के मुताबिक एजेंसी को वेटनरी डॉक्टर, दवाइयों की उपलब्धता, कुत्तों को पकडऩे और रखने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।
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सरोज राठी ने बताया कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उनकी पहचान के लिए कान पर टी मार्क टैग लगाया जाएगा। साथ ही, एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि छह माह से कम उम्र के कुत्तों और छोटे पिल्लों वाली मादा कुत्तों की नसबंदी न की जाए। बीमार या घायल कुत्तों की देखभाल के लिए अलग व्यवस्था अनिवार्य होगी।
नसबंदी के बाद प्रत्येक कुत्ते को कम से कम चार दिन के लिए निगरानी (होम स्टे) में रखा जाएगा। चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि कार्य शुरू करने से पहले एजेंसी को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
इसके साथ ही नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी की ओर से एक ऑर्गन काउंटिंग व मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारी और दो वेटनरी डॉक्टर भी शामिल होंगे। यह कमेटी पूरे अभियान की निगरानी करेगी। पूरा कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
टैगिंग और रिकॉर्डिंग की डिजिटल रिपोर्ट भी परिषद को सौंपी जाएगी। चेयरपर्सन सरोज राठी ने कहा कि यदि एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं पाया गया तो ठेका तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। उनका उद्देश्य शहरवासियों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों है। उन्होंने विश्वास जताया कि छह माह की समय अवधि में इस अभियान को पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद बहादुरगढ़ में आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
-फोटो 59 : सरोज राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद बहादुरगढ़।
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नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों को परेशानी हो रही थी और कुत्तों के काटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थी। परिषद का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यह पूरी प्रक्रिया मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से पूरी की जाए, जिससे न तो पशुओं को कष्ट हो और न ही शहरवासियों को असुविधा। प्रत्येक कुत्ते का बधियाकरण 1189 रुपये की दर से किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी करके जींद की नैन एजेंसी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। टेंडर शर्तों के मुताबिक एजेंसी को वेटनरी डॉक्टर, दवाइयों की उपलब्धता, कुत्तों को पकडऩे और रखने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।
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सरोज राठी ने बताया कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उनकी पहचान के लिए कान पर टी मार्क टैग लगाया जाएगा। साथ ही, एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि छह माह से कम उम्र के कुत्तों और छोटे पिल्लों वाली मादा कुत्तों की नसबंदी न की जाए। बीमार या घायल कुत्तों की देखभाल के लिए अलग व्यवस्था अनिवार्य होगी।
नसबंदी के बाद प्रत्येक कुत्ते को कम से कम चार दिन के लिए निगरानी (होम स्टे) में रखा जाएगा। चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि कार्य शुरू करने से पहले एजेंसी को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से अनुमति प्राप्त करनी होगी।
इसके साथ ही नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी की ओर से एक ऑर्गन काउंटिंग व मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारी और दो वेटनरी डॉक्टर भी शामिल होंगे। यह कमेटी पूरे अभियान की निगरानी करेगी। पूरा कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
टैगिंग और रिकॉर्डिंग की डिजिटल रिपोर्ट भी परिषद को सौंपी जाएगी। चेयरपर्सन सरोज राठी ने कहा कि यदि एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं पाया गया तो ठेका तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। उनका उद्देश्य शहरवासियों की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों है। उन्होंने विश्वास जताया कि छह माह की समय अवधि में इस अभियान को पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद बहादुरगढ़ में आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
-फोटो 59 : सरोज राठी, चेयरपर्सन, नगर परिषद बहादुरगढ़।