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अनाज मंडी के लिए भूमि अधिग्रहण हाईकोर्ट ने किया रद्द
Updated Wed, 06 Sep 2017 01:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
बालौर के किसानों द्वारा एक साल तक संघर्ष किए जाने के बाद सरकार द्वारा अनाज मंडी के लिए अधिग्रहीत की गई 56 एकड़ भूमि को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इससे बालौर के किसानों में खुशी का माहौल है। एक साल पहले हाईकोर्ट में करीब दो दर्जन किसानों की ओर से अपनी जमीन सरकार से बचाने के लिए याचिका दायर की गई थी। जिसमें अब उन्हें पूरी तरह राहत मिली है।
बालौर के किसान रामहेर, मामचंद, हरि, ईश्वर, संदीप, महेंद्र, दानीराम, अनिल, सुनील, अरुण, तरुण, रामपाल, कृष्ण, धर्मपाल, रामकिशन व लहरी सिंह के अलावा अन्य किसानों ने वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी कि सरकार उनके गांव की करीब 56 एकड़ भूमि अनाज मंडी के लिए अधिग्रहीत कर रही है। वर्ष 2013 में सेक्शन-4 और वर्ष 2014 में सेक्शन-6 के तहत किसानों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद वर्ष 2016 में बालौर गांव के किसानों ने हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने किसानों की अपील को जायज ठहराते हुए अनाज मंडी के 56 एकड़ भूमि के अधिग्रहण मामले को रद्द कर दिया। इससे किसानों में खुशी का माहौल है। फैसला आने के बाद गांव में किसानों ने लड्डू बांटे।
कुछ किसानों ने लिया था मुआवजा
जानकारी के अनुसार बालौर के कुछ किसानों ने वर्ष 2015-16 में कुछ जमीन के अधिग्रहण का मुआवजा सरकार से लिया था। जबकि 20-25 किसानों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूरी जमीन अधिग्रहण के मामले को रद्द कर दिया है।
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क्या कहते हैं वकील
किसानों के पक्ष में केस की पैरवी कर रहे वकील तुषार शर्मा ने बताया कि किसानों की जमीन अधिग्रहण मामले में उन्होंने पूरी पैरवी की और अब इस केस में हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के पूर्ण मामले को रद्द कर दिया है। इससे किसानों को काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण का नया विधेयक कानून बनाया था। जबकि बालौर के किसानों की जमीन वर्ष 2013 में अधिग्रहण की गई थी। जिसमें सेक्शन-4 का नोटिस दिया गया था। जबकि सेक्शन-6 के नोटिस जमीन अधिग्रहण से संबधित नया कानून आने के बाद दिए गए। इसी को आधार मानकर हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण मामले को रद्द किया है।
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बहादुरगढ़।
बालौर के किसानों द्वारा एक साल तक संघर्ष किए जाने के बाद सरकार द्वारा अनाज मंडी के लिए अधिग्रहीत की गई 56 एकड़ भूमि को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इससे बालौर के किसानों में खुशी का माहौल है। एक साल पहले हाईकोर्ट में करीब दो दर्जन किसानों की ओर से अपनी जमीन सरकार से बचाने के लिए याचिका दायर की गई थी। जिसमें अब उन्हें पूरी तरह राहत मिली है।
बालौर के किसान रामहेर, मामचंद, हरि, ईश्वर, संदीप, महेंद्र, दानीराम, अनिल, सुनील, अरुण, तरुण, रामपाल, कृष्ण, धर्मपाल, रामकिशन व लहरी सिंह के अलावा अन्य किसानों ने वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी कि सरकार उनके गांव की करीब 56 एकड़ भूमि अनाज मंडी के लिए अधिग्रहीत कर रही है। वर्ष 2013 में सेक्शन-4 और वर्ष 2014 में सेक्शन-6 के तहत किसानों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद वर्ष 2016 में बालौर गांव के किसानों ने हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने किसानों की अपील को जायज ठहराते हुए अनाज मंडी के 56 एकड़ भूमि के अधिग्रहण मामले को रद्द कर दिया। इससे किसानों में खुशी का माहौल है। फैसला आने के बाद गांव में किसानों ने लड्डू बांटे।
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कुछ किसानों ने लिया था मुआवजा
जानकारी के अनुसार बालौर के कुछ किसानों ने वर्ष 2015-16 में कुछ जमीन के अधिग्रहण का मुआवजा सरकार से लिया था। जबकि 20-25 किसानों ने जमीन अधिग्रहण का विरोध करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूरी जमीन अधिग्रहण के मामले को रद्द कर दिया है।
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क्या कहते हैं वकील
किसानों के पक्ष में केस की पैरवी कर रहे वकील तुषार शर्मा ने बताया कि किसानों की जमीन अधिग्रहण मामले में उन्होंने पूरी पैरवी की और अब इस केस में हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के पूर्ण मामले को रद्द कर दिया है। इससे किसानों को काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण का नया विधेयक कानून बनाया था। जबकि बालौर के किसानों की जमीन वर्ष 2013 में अधिग्रहण की गई थी। जिसमें सेक्शन-4 का नोटिस दिया गया था। जबकि सेक्शन-6 के नोटिस जमीन अधिग्रहण से संबधित नया कानून आने के बाद दिए गए। इसी को आधार मानकर हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण मामले को रद्द किया है।