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ओवरटाइम बंद करने के फॉर्मूले से गड़बड़ाई सेवाएं, लंबे रूटों में विभाग ने की कटौती
Updated Wed, 21 Nov 2018 01:15 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। सप्ताह में 48 घंटे ड्यूटी वर्क का फार्मूला लागू होने पर रोडवेज डिपो से लंबे रूटों की दूरी में अब कटौती करनी पड़ रही है। यह नई पॉलिसी लागू होने के बाद डिपो में इस समय 35 चालक और 80 परिचालकों की कमी हो गई है। इसके लिए हेड ऑफिस पत्र लिखकर इन पदों को भरने की मांग डिपो अधिकारियों ने की है। चालक- परिचालकों का ओवरटाइम बंद होने से डिपो को प्रति माह करीब 50 लाख रुपये अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। वहीं, पहले ही दिन यह फार्मूला अपनाने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नारनौल-दादरी-चंडीगढ़ और पुष्कर-दादरी-भिवानी के रूट चार्ट में फेरबदल होने से यात्रियों को बसें बदलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। इससे पहले उन्हें बस आने का काफी समय तक इंतजार भी करना पड़ा।
राज्य सरकार द्वारा रोडवेज विभाग में चालक- परिचालकों की ओवरटाइम पॉलिसी खत्म करने पर डिपो में बसों की सेवा अव्यवस्थित हो गई है। अधिकारी नए सिरे से बसों का टाइमटेबल सेट करने के काम में जुटे हैं ताकि यात्रियों को आवागमन में परेशानी न होने पाए। एक सप्ताह में 48 घंटे वर्क सुनिश्चित करने के लिए डिपो अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके लिए अधिकारी ट्रिप मिस करवाने को विवश है क्योंकि फिलहाल चालक- परिचालकों की कमी हो जाने की वजह से सभी रूट 48 घंटे वर्क के अनुपात में कवर नहीं हो पा रहे हैं। नया नियम लागू होने से पहले डिपो से रोजाना सभी बसें करीब 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करती थी जो अब फिलहाल पांच-छह हजार किलोमीटर की दूरी घट गई है क्योंकि लंबे रूट की बसों के रोजाना के किलोमीटर कम किए जा रहे हैं।
मंगलवार को यूं वैकल्पिक व्यवस्था कर चला गया काम
चंडीगढ़ से नारनौल तक जाने वाली बस को अब नारनौल की बजाय चरखी दादरी तक रखा जा रहा है। चंडीगढ़ रूट पर कम से कम छह घंटे का ओवरटाइम बनता है। इसी प्रकार पुष्कर से भिवानी तक चलने वाली बस को अब दादरी तक कर किया जा रहा है। इससे अब भिवानी तक की करीब 35 किलोमीटर कम हो गई है। दिल्ली से दादरी रूट पर चलने वाली बस को दादरी पहुंचने पर भिवानी भेजा जाता था लेकिन अब इस बस का दादरी - भिवानी का लोकल रूट कम किए जाने की प्लानिंग की जा रही है। फिलहाल चंडीगढ़ के लिए चार की बजाय दो बसें चलाई जा रही हैं। इसी प्रकार दादरी- रोहतक रूट, लोहारू रूट सहित अन्य कई रूटों पर ट्रिप कम करके व्यवस्था बनाए जाने की प्लानिंग बनाई जा रही हैं। अधिकारियों की मानें तो फिलहाल यह अस्थाई व्यवस्था है। आने पांच-सात रोज में नए सिरे से बसों का टाइमटेबल सेट किए जाने की प्लानिंग है।
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उचित व्यवस्था के लिए चाहिए 35 चालक व परिचालक
डिपो में 48 घंटे वर्क का फार्मूला लागू होने के बाद अब 35 चालक व 80 परिचालकों की और जरूरत पड़ेगी। फिलहाल डिपो में 235 चालक व 186 परिचालक हैं। जो चालक व परिचालक इस समय डिपो की अन्य शाखाओं में दूसरे कार्य कर रहे थे उनको भी अब बसें चलाए जाने को कहा जा रहा है ताकि नई व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। करीब 35 चालक व परिचालकों से बस चलवाने की बजाय दूसरी शाखाओं में काम लिया जा रहा था। डिपो मेें ओवरटाइम बंद कर दिए जाने पर प्रति माह करीब 50 लाख रुपये के अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी।
कोट
कुछ बसों की दूरी हमने घटा दी है। सरकार के जो निर्देश जारी हुए हैं उनके मुताबिक ही हम व्यवस्थाएं कर रहे हैं। चालकों और परिचालकों की कमी का हवाला देकर हमने डिमांड ऊपर भेज दी है। धनराज कुंडू, जीएम
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चरखी दादरी। सप्ताह में 48 घंटे ड्यूटी वर्क का फार्मूला लागू होने पर रोडवेज डिपो से लंबे रूटों की दूरी में अब कटौती करनी पड़ रही है। यह नई पॉलिसी लागू होने के बाद डिपो में इस समय 35 चालक और 80 परिचालकों की कमी हो गई है। इसके लिए हेड ऑफिस पत्र लिखकर इन पदों को भरने की मांग डिपो अधिकारियों ने की है। चालक- परिचालकों का ओवरटाइम बंद होने से डिपो को प्रति माह करीब 50 लाख रुपये अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी। वहीं, पहले ही दिन यह फार्मूला अपनाने से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नारनौल-दादरी-चंडीगढ़ और पुष्कर-दादरी-भिवानी के रूट चार्ट में फेरबदल होने से यात्रियों को बसें बदलकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। इससे पहले उन्हें बस आने का काफी समय तक इंतजार भी करना पड़ा।
राज्य सरकार द्वारा रोडवेज विभाग में चालक- परिचालकों की ओवरटाइम पॉलिसी खत्म करने पर डिपो में बसों की सेवा अव्यवस्थित हो गई है। अधिकारी नए सिरे से बसों का टाइमटेबल सेट करने के काम में जुटे हैं ताकि यात्रियों को आवागमन में परेशानी न होने पाए। एक सप्ताह में 48 घंटे वर्क सुनिश्चित करने के लिए डिपो अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसके लिए अधिकारी ट्रिप मिस करवाने को विवश है क्योंकि फिलहाल चालक- परिचालकों की कमी हो जाने की वजह से सभी रूट 48 घंटे वर्क के अनुपात में कवर नहीं हो पा रहे हैं। नया नियम लागू होने से पहले डिपो से रोजाना सभी बसें करीब 30 हजार किलोमीटर की दूरी तय करती थी जो अब फिलहाल पांच-छह हजार किलोमीटर की दूरी घट गई है क्योंकि लंबे रूट की बसों के रोजाना के किलोमीटर कम किए जा रहे हैं।
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मंगलवार को यूं वैकल्पिक व्यवस्था कर चला गया काम
चंडीगढ़ से नारनौल तक जाने वाली बस को अब नारनौल की बजाय चरखी दादरी तक रखा जा रहा है। चंडीगढ़ रूट पर कम से कम छह घंटे का ओवरटाइम बनता है। इसी प्रकार पुष्कर से भिवानी तक चलने वाली बस को अब दादरी तक कर किया जा रहा है। इससे अब भिवानी तक की करीब 35 किलोमीटर कम हो गई है। दिल्ली से दादरी रूट पर चलने वाली बस को दादरी पहुंचने पर भिवानी भेजा जाता था लेकिन अब इस बस का दादरी - भिवानी का लोकल रूट कम किए जाने की प्लानिंग की जा रही है। फिलहाल चंडीगढ़ के लिए चार की बजाय दो बसें चलाई जा रही हैं। इसी प्रकार दादरी- रोहतक रूट, लोहारू रूट सहित अन्य कई रूटों पर ट्रिप कम करके व्यवस्था बनाए जाने की प्लानिंग बनाई जा रही हैं। अधिकारियों की मानें तो फिलहाल यह अस्थाई व्यवस्था है। आने पांच-सात रोज में नए सिरे से बसों का टाइमटेबल सेट किए जाने की प्लानिंग है।
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उचित व्यवस्था के लिए चाहिए 35 चालक व परिचालक
डिपो में 48 घंटे वर्क का फार्मूला लागू होने के बाद अब 35 चालक व 80 परिचालकों की और जरूरत पड़ेगी। फिलहाल डिपो में 235 चालक व 186 परिचालक हैं। जो चालक व परिचालक इस समय डिपो की अन्य शाखाओं में दूसरे कार्य कर रहे थे उनको भी अब बसें चलाए जाने को कहा जा रहा है ताकि नई व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। करीब 35 चालक व परिचालकों से बस चलवाने की बजाय दूसरी शाखाओं में काम लिया जा रहा था। डिपो मेें ओवरटाइम बंद कर दिए जाने पर प्रति माह करीब 50 लाख रुपये के अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी।
कोट
कुछ बसों की दूरी हमने घटा दी है। सरकार के जो निर्देश जारी हुए हैं उनके मुताबिक ही हम व्यवस्थाएं कर रहे हैं। चालकों और परिचालकों की कमी का हवाला देकर हमने डिमांड ऊपर भेज दी है। धनराज कुंडू, जीएम