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Hisar News: खेतों में मुरझाई उम्मीदें, गूंजीं किसानों की वेदनाएं
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सिवानी में एसडीएम कार्यालय के बाहर सूखे से बर्बाद फसलों के मुआवजे के लिए धरने पर बैठे किसान सभा
सिवानी मंडी। सूखे की मार से खेतों में फसलें मुरझाईं तो किसानों की उम्मीदें भी सूखने लगीं। उजड़ती फसल के साथ उपजी पीड़ा अब धरने के रूप में सामने आ गई है। नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा सिवानी के बैनर तले उपमंडल परिसर स्थित एसडीएम कार्यालय के बाहर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
किसानों ने सरकार से सिवानी तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने, खेतों में मौके पर जाकर विशेष गिरदावरी करवाने और प्रभावित किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।
धरने की अध्यक्षता करते हुए किसान सभा के वरिष्ठ नेता रामेश्वर धुआं ने कहा कि इस बार बारिश कम होने के कारण भिवानी जिले के साथ ही सिवानी तहसील में सूखे की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की खरीफ फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। कपास, धान, मूंग, ग्वार और मूंगफली की फसलों में भारी नुकसान हुआ है जबकि बाजरे की फसल भी कई गांवों में पूरी तरह प्रभावित हुई है।
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किसान सभा के नेता जंगबीर ढांडा ने संचालन किया। इस मौके पर विद्याधर पिलाणिया, सुभाष श्योराण एडवोकेट, रामचंद्र फौजी, दारा सिंह गोरा, सुरेश बड़वा, राजबीर सिंह सिंधु, मास्टर उमराव सिंह, रोहतास पूनिया आदि किसान मौजूद रहे।
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किसानों ने सरकार से सिवानी तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने, खेतों में मौके पर जाकर विशेष गिरदावरी करवाने और प्रभावित किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।
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धरने की अध्यक्षता करते हुए किसान सभा के वरिष्ठ नेता रामेश्वर धुआं ने कहा कि इस बार बारिश कम होने के कारण भिवानी जिले के साथ ही सिवानी तहसील में सूखे की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की खरीफ फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। कपास, धान, मूंग, ग्वार और मूंगफली की फसलों में भारी नुकसान हुआ है जबकि बाजरे की फसल भी कई गांवों में पूरी तरह प्रभावित हुई है।
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किसान सभा के नेता जंगबीर ढांडा ने संचालन किया। इस मौके पर विद्याधर पिलाणिया, सुभाष श्योराण एडवोकेट, रामचंद्र फौजी, दारा सिंह गोरा, सुरेश बड़वा, राजबीर सिंह सिंधु, मास्टर उमराव सिंह, रोहतास पूनिया आदि किसान मौजूद रहे।