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Hisar News: सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का भेद नहीं होता
Sat, 03 Oct 2026 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:21 AM IST
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हिसार। तारानगर रोड स्थित सेक्टर 9-11 में मां अंबे सेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सातवें और अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा के मिलन प्रसंग के साथ समापन हुआ। झांकी देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा वाचक पूज्य रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं होता। शास्त्री ने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता बचपन से थी। समय के साथ दोनों अलग-अलग परिस्थितियों में जीवन जीने लगे, लेकिन उनके प्रेम और मित्रता में कोई बदलाव नहीं आया।
आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद सुदामा की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा अटूट रही। पत्नी के आग्रह पर सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। वह भेंट के रूप में चावल की पोटली लेकर गए। सुदामा के पहुंचने की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उन्हें लेने दौड़े और अपने बाल सखा को गले लगा लिया।
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कथा वाचक ने कहा कि भगवान भक्त की स्थिति नहीं, बल्कि उसके मन के भाव देखते हैं। सच्ची भक्ति में दिखावे के बजाय श्रद्धा, विश्वास और समर्पण जरूरी है।
झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और भजनों पर झूमते हुए भक्ति में सहभागिता की। सात दिवसीय कथा में विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, प्रेम, सेवा, सदाचार और संस्कारों का पाठ पढ़ाया गया।
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कथा वाचक पूज्य रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं होता। शास्त्री ने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता बचपन से थी। समय के साथ दोनों अलग-अलग परिस्थितियों में जीवन जीने लगे, लेकिन उनके प्रेम और मित्रता में कोई बदलाव नहीं आया।
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आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद सुदामा की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा अटूट रही। पत्नी के आग्रह पर सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। वह भेंट के रूप में चावल की पोटली लेकर गए। सुदामा के पहुंचने की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उन्हें लेने दौड़े और अपने बाल सखा को गले लगा लिया।
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कथा वाचक ने कहा कि भगवान भक्त की स्थिति नहीं, बल्कि उसके मन के भाव देखते हैं। सच्ची भक्ति में दिखावे के बजाय श्रद्धा, विश्वास और समर्पण जरूरी है।
झांकी के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और भजनों पर झूमते हुए भक्ति में सहभागिता की। सात दिवसीय कथा में विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, प्रेम, सेवा, सदाचार और संस्कारों का पाठ पढ़ाया गया।