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Hisar News: जिला नागरिक अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य व आत्महत्या रोकथाम पर प्रशिक्षण
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अस्पताल हिसार में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम प्रशिक्षण शिविर के प्रतिभागी।
हिसार। जिला नागरिक अस्पताल परिसर स्थित सोसायटी कार्यालय में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डिप्टी सिविल सर्जन, डीएमएचपी व डीडीसी डाॅ. सुशील गर्ग ने की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रशांत कुमार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणालियों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इससे विद्यार्थियों में बढ़ रही मानसिक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर संज्ञान ले चुका है। इसके तहत पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) का गठन किया गया है, जो रोकथाम और संस्थागत सुधार के उपायों पर सुझाव दे रहा है।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों में सामने आने वाली वास्तविक जीवन की चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की समय रहते पहचान और परामर्श की व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया।
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कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रशांत कुमार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणालियों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इससे विद्यार्थियों में बढ़ रही मानसिक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोका जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर संज्ञान ले चुका है। इसके तहत पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) का गठन किया गया है, जो रोकथाम और संस्थागत सुधार के उपायों पर सुझाव दे रहा है।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों में सामने आने वाली वास्तविक जीवन की चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की समय रहते पहचान और परामर्श की व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया।