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Hisar News: गोअभयारण्य में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए खिला रहे गुड़, बाड़े में बिछाई रेतीली मिट्टी
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गोअभयारण्य में बीमारा पशुओं के लिए बनाया गया अलग बाड़ा। अमर उजाला
हिसार। हाड़ कंपकंपाने वाली ठंड का असर मानव के साथ-साथ पशुओं पर भी पड़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोअभयारण्य में जहां पहले हर माह करीब 150 पशुओं की मौत हो रही थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 200 तक पहुंच गई है। हालांकि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उन्हें गुड़ भी दिया जा रहा है। इसके अलावा उनके बाड़े में भी रेतीली मिट्टी भी डलवाई जा रही है ताकि बाड़ा सूखा रहे। बता दें कि नगर निगम के गोअभयारण्य के रखरखाव का जिम्मा गोसेवा फाउंडेशन को दिया हुआ है। इस तहत निगम फाउंडेशन को प्रति पशु के हिसाब से भुगतान कर रहा है।
पॉलिथीन खाकर कमजोर हुए पशु नहीं झेल पा रहे ठंड
गोअभयारण्य के कर्मचारियों की मानें तो बेसहारा होने के कारण पशुओं को पूर्ण रूप से चारा नहीं मिल पाता। इस अवस्था में वह पॉलिथीन आदि भी खा लेते हैं। पॉलिथीन खाने से उनके अंदरूनी अंग कमजोर हो जाते हैं। जब ऐसे पशु गोअभयारण्य में आते हैं तो उन्हें पूरा चारा मिलता है। मगर वह इसे पचा नहीं पाते और उनकी मौत हो जाती है। चूंकि इन दिनों काफी ज्यादा ठंड है। अधिक आयु वाले व कमजोर पशु ऐसे मौसम को नहीं झेल पाते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। कर्मचारियों के मुताबिक कई बार मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया जाता है तो उनके पेट से काफी पॉलिथीन निकलता है।
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बीमार पशुओं के लिए है अलग व्यवस्था
गोअभयारण्य में बीमार पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था भी की हुई है। जब कभी पशु बैठ जाता है और फिर से उठता नहीं तो ऐसे पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग कर दिया जाता है। इन पशुओं को अलग से चारा व पानी दिया जाता है। सर्दी के मौसम में इन पशुओं को गर्म पानी पिलाया जाता है। गोअभयारण्य में तैनात पशु चिकित्सक समय-समय इन पशुओं की जांच भी करते हैं।
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गोअभयारण्य में क्षमता से ज्यादा पशु
फिलहाल गोअभयारण्य में क्षमता से ज्यादा पशु रखे हुए हैं। कर्मचारियों की मानें तो फिलहाल यहां करीब 6500 पशु हैं, जिनमें गाय व नंदी शामिल हैं, जबकि यहां की क्षमता करीब 4500 की है। अभी हाल ही हाउस की बैठक में भी यह मामला उठा था। इस दौरान फैसला लिया गया था कि यहां से कुछ पशु आसपास की गोशालाओं में स्थानांतरित किए जाएंगे। क्षमता से ज्यादा पशु होने के कारण निगम ने भी बेसहारा पशुओं को पकड़ने की गति धीमी कर दी है।
पशुओं को शिफ्ट करने से पहले एक बार गोशालाओं के साथ बैठक की जाएगी। पशुओं को ठंड से बचाने व उनकी मौत की संख्या को कम करने के लिए और कदम उठाए जाएंगे। प्रदीप दहिया, निगमायुक्त
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पॉलिथीन खाकर कमजोर हुए पशु नहीं झेल पा रहे ठंड
गोअभयारण्य के कर्मचारियों की मानें तो बेसहारा होने के कारण पशुओं को पूर्ण रूप से चारा नहीं मिल पाता। इस अवस्था में वह पॉलिथीन आदि भी खा लेते हैं। पॉलिथीन खाने से उनके अंदरूनी अंग कमजोर हो जाते हैं। जब ऐसे पशु गोअभयारण्य में आते हैं तो उन्हें पूरा चारा मिलता है। मगर वह इसे पचा नहीं पाते और उनकी मौत हो जाती है। चूंकि इन दिनों काफी ज्यादा ठंड है। अधिक आयु वाले व कमजोर पशु ऐसे मौसम को नहीं झेल पाते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। कर्मचारियों के मुताबिक कई बार मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया जाता है तो उनके पेट से काफी पॉलिथीन निकलता है।
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बीमार पशुओं के लिए है अलग व्यवस्था
गोअभयारण्य में बीमार पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था भी की हुई है। जब कभी पशु बैठ जाता है और फिर से उठता नहीं तो ऐसे पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग कर दिया जाता है। इन पशुओं को अलग से चारा व पानी दिया जाता है। सर्दी के मौसम में इन पशुओं को गर्म पानी पिलाया जाता है। गोअभयारण्य में तैनात पशु चिकित्सक समय-समय इन पशुओं की जांच भी करते हैं।
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गोअभयारण्य में क्षमता से ज्यादा पशु
फिलहाल गोअभयारण्य में क्षमता से ज्यादा पशु रखे हुए हैं। कर्मचारियों की मानें तो फिलहाल यहां करीब 6500 पशु हैं, जिनमें गाय व नंदी शामिल हैं, जबकि यहां की क्षमता करीब 4500 की है। अभी हाल ही हाउस की बैठक में भी यह मामला उठा था। इस दौरान फैसला लिया गया था कि यहां से कुछ पशु आसपास की गोशालाओं में स्थानांतरित किए जाएंगे। क्षमता से ज्यादा पशु होने के कारण निगम ने भी बेसहारा पशुओं को पकड़ने की गति धीमी कर दी है।
पशुओं को शिफ्ट करने से पहले एक बार गोशालाओं के साथ बैठक की जाएगी। पशुओं को ठंड से बचाने व उनकी मौत की संख्या को कम करने के लिए और कदम उठाए जाएंगे। प्रदीप दहिया, निगमायुक्त