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शिक्षक दिवस : स्टेट टीचर अवार्डी भाई-बहन की प्रेरणा से अशोक बने शिक्षक, पिता की सीख से कुलदीप बने डीईओ
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हिसार। हरियाणा सरकार व विद्यालय शिक्षा निदेशालय द्वारा सोमवार को शिक्षकों को स्टेट टीचर अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। इन शिक्षकों में किसी को भाई-बहन से प्रेरणा मिली तो कोई अपने जुनून से विद्यार्थियों को शिक्षक से लेफ्टिनेंट बना रहा है। वहीं पिता की सीख से कुलदीप सिहाग डीईओ के पद तक पहुंच गए।
प्रदेश के 47 सरकारी स्कूल के शिक्षकों को यह अवॉर्ड राज्यपाल द्वारा दिया जाएगा। इसमें हिसार जिले के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय के हिंदी प्राध्यापक अशोक वशिष्ठ, मोहला गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के हैड मास्टर राफमल शर्मा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भाटोल खरकड़ा के अंग्रेजी विषय की शिक्षिका डॉ. संतोष देवी व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मंगाली में पीजीटी होम साइंस इंद्रावती सांगवान का नाम शामिल है।
जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने बताया कि मेरे पिता सूरत सिंह जेबीटी अध्यापक थे। शिक्षक बनने की प्रेरणा मुझे उन्हीं से मिली है। वैसे तो सभी शिक्षक मेरे लिए पूज्यनीय हैं, लेकिन मैं सबसे ज्यादा मेरा आदर्श शिक्षक छाज्जू राम को मानता हूं। राजकीय विद्यालय गोरखपुर से मैंने मेरे गुरु छाज्जू राम से मैैथ व अंग्रेजी की पढ़ाई की है। प्राइमरी शिक्षा मैंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला सिवानी बोलान से प्राप्त की है। प्राइमरी स्कूल में जेबीटी अध्यापक धूप सिंह से मुझे प्रेरणा मिली। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं मेरे पिता, मेरे गुरु छाज्जू राम व धूप सिंह से प्रेरित होकर जिला शिक्षा अधिकारी की पोस्ट तक पहुंचा हूं।
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सकारात्मक सोच से स्कूल को दिलवाया सम्मान
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नलवा में कार्यरत हिंदी प्रवक्ता अशोक वशिष्ठ को शिक्षक बनने की प्रेरणा अपने स्टेट टीचर अवॉर्डी भाई-बहन से मिली। उनके भाई राजेश जींद में शिक्षक हैं जबकि बहन नीलम शर्मा राजस्थान के डूंगरपुरा के स्कूल में प्रिंसिपल हैं। सकारात्मक सोच, शिक्षण के प्रति समर्पण, शिक्षण के साथ नवीन विधियां सीखने व इनका प्रयोग कक्षा में करने वाले प्रवक्ता अशोक वशिष्ठ एनएसएस, स्काउटिंग, कानूनी साक्षरता व अन्य गतिविधियों से जुड़े एवं प्रतियोगिताओं में छात्र छात्राओं की भागीदारी करवा कर राज्य स्तर तक पुरस्कृत करवाया। उन्होंने सीसवाल व मंडी आदमपुर के विद्यालयों में सेवाएं देते हुए खंड स्तरीय बाल कवि सम्मेलनों का स्वयं के खर्चे पर आयोजन करवाया है।
विद्यार्थियों को हमेशा आगे लाने का किया प्रयास
राजकीय उच्च विद्यालय मोहला से सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक रामफल शर्मा गांव बास के रहने वाले हैं। बचपन की शिक्षा गांव में ली तथा उच्च शिक्षा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से प्राप्त की। सन 1991 में हिंदी अध्यापक के पद पर गांव पुट्ठी में नियुक्ति हुई। विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में आगे ले जाने का प्रयास किया। इनके नेतृत्व में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने शिक्षा के साथ साथ हर क्षेत्र में समाज व विद्यालय का नाम रोशन किया है।
15 साल से निष्ठा से निभा रहीं फर्ज
डॉ. संतोष देवी मार्च 1993 से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। जिन्होंने 15 वर्ष सामाजिक अध्यापिका के रूप में 4 विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। डॉ. संतोष देवी एडवेंचर कैंप स्काउट एंड गाइड कैंप, रक्तदान शिविर, पौधरोपण और अन्य बहुत सी गतिविधियों में भाग लेकर नियमित रूप से अपने अध्यापन कार्य ईमानदारी व निष्ठा से कर रही है। स्कूल हित, छात्र हित, समाज हित, महिला उत्थान, पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्र में अपना बेहतरीन योगदान देने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा डॉ. संतोष देवी को स्टेट टीचर अवॉर्ड से नवाजा जाएगा।
विद्यार्थियों को शिक्षक से लेफ्टिनेंट बनने में की मदद
सीआरएम जाट कॉलेज हिसार के प्रो. डॉ. राकेश किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बतौर एनसीसी अधिकारी डॉ. राकेश कई विद्यार्थियों को भारतीय सेना में ज्वाइन होने की ट्रेनिंग दे चुके हैं। इनके पढ़ाए विद्यार्थी शिक्षक से लेकर आर्मी में ज्वाइन करके देशसेवा कर रहे हैं। डॉ. राकेश के हर वर्ष करीब 5 से 10 एनसीसी एयरविंग कैडेट्स आर्मी में लेफ्टिनेंट से लेकर सीआईएसएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ में ज्वाइन करते हैं। डॉ. राकेश उचाना के काकड़ौद गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में सीआरएम जाट कॉलेज हिसार में बतौर हिंदी प्रोफेसर के रूप में अपना कार्यभार संभाला था। 2007 में उनके कॉलेज एनसीसी एयरविंग का प्रभार सौंपा गया था। फिलहाल डॉ. राकेश एनसीसी एयरविंग के फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
मैं आज जिस मुकाम पर हूं, इसके पीछे मेरे माता-पिता का ही हाथ है। वही मेरे आदर्श शिक्षक रहे हैं। हालांकि स्कूल व कॉलेज में जिन शिक्षकों ने मुझे पढ़ाया, उन्होंने भी मुझे सफलता का मार्ग दिखाया। बचपन से ही मेरे माता-पिता ने मुझे मेहनत से काम करना सिखाया। उन्होंने मुझे बताया कि जिस भी काम को करो, उसे पूरी मेहनत के साथ करो। मैं अभी तक उनकी सीख चलता आया हूं। यही वजह है कि आज मैं इस सम्मानजनक ओहदे पर हूं।
- प्रदीप दहिया, नगर निगम आयुक्त
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प्रदेश के 47 सरकारी स्कूल के शिक्षकों को यह अवॉर्ड राज्यपाल द्वारा दिया जाएगा। इसमें हिसार जिले के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय के हिंदी प्राध्यापक अशोक वशिष्ठ, मोहला गांव के राजकीय उच्च विद्यालय के हैड मास्टर राफमल शर्मा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भाटोल खरकड़ा के अंग्रेजी विषय की शिक्षिका डॉ. संतोष देवी व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मंगाली में पीजीटी होम साइंस इंद्रावती सांगवान का नाम शामिल है।
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जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप सिहाग ने बताया कि मेरे पिता सूरत सिंह जेबीटी अध्यापक थे। शिक्षक बनने की प्रेरणा मुझे उन्हीं से मिली है। वैसे तो सभी शिक्षक मेरे लिए पूज्यनीय हैं, लेकिन मैं सबसे ज्यादा मेरा आदर्श शिक्षक छाज्जू राम को मानता हूं। राजकीय विद्यालय गोरखपुर से मैंने मेरे गुरु छाज्जू राम से मैैथ व अंग्रेजी की पढ़ाई की है। प्राइमरी शिक्षा मैंने राजकीय प्राथमिक पाठशाला सिवानी बोलान से प्राप्त की है। प्राइमरी स्कूल में जेबीटी अध्यापक धूप सिंह से मुझे प्रेरणा मिली। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं मेरे पिता, मेरे गुरु छाज्जू राम व धूप सिंह से प्रेरित होकर जिला शिक्षा अधिकारी की पोस्ट तक पहुंचा हूं।
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सकारात्मक सोच से स्कूल को दिलवाया सम्मान
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नलवा में कार्यरत हिंदी प्रवक्ता अशोक वशिष्ठ को शिक्षक बनने की प्रेरणा अपने स्टेट टीचर अवॉर्डी भाई-बहन से मिली। उनके भाई राजेश जींद में शिक्षक हैं जबकि बहन नीलम शर्मा राजस्थान के डूंगरपुरा के स्कूल में प्रिंसिपल हैं। सकारात्मक सोच, शिक्षण के प्रति समर्पण, शिक्षण के साथ नवीन विधियां सीखने व इनका प्रयोग कक्षा में करने वाले प्रवक्ता अशोक वशिष्ठ एनएसएस, स्काउटिंग, कानूनी साक्षरता व अन्य गतिविधियों से जुड़े एवं प्रतियोगिताओं में छात्र छात्राओं की भागीदारी करवा कर राज्य स्तर तक पुरस्कृत करवाया। उन्होंने सीसवाल व मंडी आदमपुर के विद्यालयों में सेवाएं देते हुए खंड स्तरीय बाल कवि सम्मेलनों का स्वयं के खर्चे पर आयोजन करवाया है।
विद्यार्थियों को हमेशा आगे लाने का किया प्रयास
राजकीय उच्च विद्यालय मोहला से सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक रामफल शर्मा गांव बास के रहने वाले हैं। बचपन की शिक्षा गांव में ली तथा उच्च शिक्षा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से प्राप्त की। सन 1991 में हिंदी अध्यापक के पद पर गांव पुट्ठी में नियुक्ति हुई। विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में आगे ले जाने का प्रयास किया। इनके नेतृत्व में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने शिक्षा के साथ साथ हर क्षेत्र में समाज व विद्यालय का नाम रोशन किया है।
15 साल से निष्ठा से निभा रहीं फर्ज
डॉ. संतोष देवी मार्च 1993 से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। जिन्होंने 15 वर्ष सामाजिक अध्यापिका के रूप में 4 विद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। डॉ. संतोष देवी एडवेंचर कैंप स्काउट एंड गाइड कैंप, रक्तदान शिविर, पौधरोपण और अन्य बहुत सी गतिविधियों में भाग लेकर नियमित रूप से अपने अध्यापन कार्य ईमानदारी व निष्ठा से कर रही है। स्कूल हित, छात्र हित, समाज हित, महिला उत्थान, पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्र में अपना बेहतरीन योगदान देने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा डॉ. संतोष देवी को स्टेट टीचर अवॉर्ड से नवाजा जाएगा।
विद्यार्थियों को शिक्षक से लेफ्टिनेंट बनने में की मदद
सीआरएम जाट कॉलेज हिसार के प्रो. डॉ. राकेश किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बतौर एनसीसी अधिकारी डॉ. राकेश कई विद्यार्थियों को भारतीय सेना में ज्वाइन होने की ट्रेनिंग दे चुके हैं। इनके पढ़ाए विद्यार्थी शिक्षक से लेकर आर्मी में ज्वाइन करके देशसेवा कर रहे हैं। डॉ. राकेश के हर वर्ष करीब 5 से 10 एनसीसी एयरविंग कैडेट्स आर्मी में लेफ्टिनेंट से लेकर सीआईएसएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ में ज्वाइन करते हैं। डॉ. राकेश उचाना के काकड़ौद गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में सीआरएम जाट कॉलेज हिसार में बतौर हिंदी प्रोफेसर के रूप में अपना कार्यभार संभाला था। 2007 में उनके कॉलेज एनसीसी एयरविंग का प्रभार सौंपा गया था। फिलहाल डॉ. राकेश एनसीसी एयरविंग के फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
मैं आज जिस मुकाम पर हूं, इसके पीछे मेरे माता-पिता का ही हाथ है। वही मेरे आदर्श शिक्षक रहे हैं। हालांकि स्कूल व कॉलेज में जिन शिक्षकों ने मुझे पढ़ाया, उन्होंने भी मुझे सफलता का मार्ग दिखाया। बचपन से ही मेरे माता-पिता ने मुझे मेहनत से काम करना सिखाया। उन्होंने मुझे बताया कि जिस भी काम को करो, उसे पूरी मेहनत के साथ करो। मैं अभी तक उनकी सीख चलता आया हूं। यही वजह है कि आज मैं इस सम्मानजनक ओहदे पर हूं।
- प्रदीप दहिया, नगर निगम आयुक्त