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Hisar News: 150 करोड़ से बनेंगे टैंक... नौ अपग्रेड होंगे, छह नए बनेंगे
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हांसी। भूजल की बढ़ता स्तर गांवों की पेयजल व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है। जमीन की सतह के करीब पहुंचा भूजल ग्रामीण जलापूर्ति के टैंकों में रिसकर पेयजल में मिल रहा है जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। समस्या से निपटने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने करीब 150 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया है।
इसके तहत ईंटों के पुराने टैंकों की जगह आरसीसी ((प्रबलित सीमेंट कंक्रीट)) टैंक बनाए जाएंगे और जरूरत के अनुसार नए आरसीसी टैंकों का निर्माण भी किया जाएगा। पहले से चल रहे कार्य में 15 टैंकों में नौ आरसीसी किए जाएंगे जबकि छह नए टैंक बनाए जाएंगे। इसके अलावा पांच अलग-अलग कार्यों के तहत 10 और आरसीसी टैंक प्रस्तावित हैं।
जनस्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गत दो वर्ष में कई भूजल स्तर तेजी से ऊपर आया है। पहले भूजल 20 से 25 फीट नीचे था जो अब आठ से 10 फीट तक पहुंच गया है। कई जलापूर्ति टैंकों की गहराई आठ से 12 फीट है। ऐसे में भूजल टैंकों में रिसकर पेयजल में मिल रहा है।
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विभाग ने पानी की लैबोरेटरी और सब-सॉइल टेस्टिंग कराई। जांच में सामने आया कि भूजल के टैंकों में मिलने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। भूजल में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य रासायनिक तत्वों के कारण पानी निर्धारित पेयजल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा।
इन-इन गांवों में टैंक बनने हैं प्रस्तावित :
हांसी क्षेत्र के बकलाना, जमावड़ी, सिंघवा खास, उगालन, मदनहेड़ी, पुथी मंगलखा, मामनपुरा, सोरखी, सुल्तानपुर और जामनीखेड़ा में आरसीसी टैंक प्रस्तावित हैं। उमरा, गढ़ी, गुराना, पुट्ठी सामन और रामायण में मौजूदा ईंटों के टैंक आरसीसी में बदले जाएंगे।
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एस्टीमेट को प्राथमिक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। अब सॉयल बेयरिंग कैपेसिटी टेस्ट सहित अन्य तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। टेस्ट से यह जांच होगी कि प्रस्तावित आरसीसी टैंक के लिए जमीन कितनी भार वहन कर सकती है। अगले वर्ष तक आरसीसी टैंक तैयार होने की उम्मीद है। इससे टैंकों में भूजल के रिसाव की समस्या कम होगी और ग्रामीणों को बेहतर गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। -संजीव त्यागी, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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इसके तहत ईंटों के पुराने टैंकों की जगह आरसीसी ((प्रबलित सीमेंट कंक्रीट)) टैंक बनाए जाएंगे और जरूरत के अनुसार नए आरसीसी टैंकों का निर्माण भी किया जाएगा। पहले से चल रहे कार्य में 15 टैंकों में नौ आरसीसी किए जाएंगे जबकि छह नए टैंक बनाए जाएंगे। इसके अलावा पांच अलग-अलग कार्यों के तहत 10 और आरसीसी टैंक प्रस्तावित हैं।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गत दो वर्ष में कई भूजल स्तर तेजी से ऊपर आया है। पहले भूजल 20 से 25 फीट नीचे था जो अब आठ से 10 फीट तक पहुंच गया है। कई जलापूर्ति टैंकों की गहराई आठ से 12 फीट है। ऐसे में भूजल टैंकों में रिसकर पेयजल में मिल रहा है।
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विभाग ने पानी की लैबोरेटरी और सब-सॉइल टेस्टिंग कराई। जांच में सामने आया कि भूजल के टैंकों में मिलने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। भूजल में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य रासायनिक तत्वों के कारण पानी निर्धारित पेयजल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा।
इन-इन गांवों में टैंक बनने हैं प्रस्तावित :
हांसी क्षेत्र के बकलाना, जमावड़ी, सिंघवा खास, उगालन, मदनहेड़ी, पुथी मंगलखा, मामनपुरा, सोरखी, सुल्तानपुर और जामनीखेड़ा में आरसीसी टैंक प्रस्तावित हैं। उमरा, गढ़ी, गुराना, पुट्ठी सामन और रामायण में मौजूदा ईंटों के टैंक आरसीसी में बदले जाएंगे।
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एस्टीमेट को प्राथमिक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। अब सॉयल बेयरिंग कैपेसिटी टेस्ट सहित अन्य तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। टेस्ट से यह जांच होगी कि प्रस्तावित आरसीसी टैंक के लिए जमीन कितनी भार वहन कर सकती है। अगले वर्ष तक आरसीसी टैंक तैयार होने की उम्मीद है। इससे टैंकों में भूजल के रिसाव की समस्या कम होगी और ग्रामीणों को बेहतर गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। -संजीव त्यागी, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।