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धर्मार्थ की जमीन बेची, 70 साल पुराने मंदिर को जड़ा ताला, धरने पर बैठे लोग तो पुलिस ने खुलवाया मंदिर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Dec 2021 11:51 PM IST
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Sold charitable land, 70 year old temple was locked, people sitting on dharna then the police opened the temple
हिसार। शहर में राजगुरु मार्केट में धर्मार्थ की जमीन को बेच दिया गया। यही नहीं जमीन पर बने 70 साल पुराने मंदिर को भी ताला लगा दिया गया। छह दिनों से मंदिर के बंद रहने पर वीरवार को आसपास के दुकानदारों व संगठनों से जुड़े लोगों ने विरोध स्वरूप धरना शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर को खुलवाया गया। शाम को मार्केट के व्यापारियों ने मंदिर में महा आरती भी की। इस दौरान छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया, जो मंदिर का संचालन करेगी। वहीं हिंदू जागरण मंच का विधि विभाग मामले की कानूनी लड़ाई लड़ेगा। इस मामले को लेकर विजिलेंस की टीम भी जांच के लिए निगम कार्यालय गई थी।
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वीरवार सुबह हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी व स्थानीय दुकानदार राजगुरु मार्केट स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के आगे धरने पर बैठ गए। इस दौरान हिंदू जागरण मंच के विभाग संयोजक एडवोकेट मनोज कौशिक चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि यह मंदिर धर्मार्थ की जमीन पर बना हुआ है और करीब 70 साल पुराना है। देवराज तायल ने यह जमीन दान में दी थी। मगर उनके परिजनों ने इस जमीन को करनाल निवासी राहुल हवेलिया को बेच दिया। यह मंदिर, धर्मशाला व दुकानें करीब 1400 गज जमीन पर बने हैं। यही नहीं खरीदार ने धर्मशाला को तोड़कर यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस मंदिर को भी तोड़े जाने की तैयारी की जा रही थी। इसी कारण से यह मंदिर पिछले छह दिनों से बंद पड़ा था। मनोज कौशिक ने आरोप लगाते हुए कहा कि वीरवार सुबह स्थानीय दुकानदार जब पुलिस के पास मामले की शिकायत करने पहुंचे तो उलटा पुलिस कर्मचारियों ने उन्हें धमकाया और कहा कि जमीन का मालिक अपनी जमीन को बेच सकता है। इस पर दुकानदार वापस आए और उन्हें मामले से अवगत कराया। मनोज कौशिक के अनुसार कागजों में इस जमीन को 74 लाख रुपये में बेचा गया है, जबकि असलियत में इस जमीन का 22 करोड़ रुपये का सौदा हुआ है।
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दान में दी गई जमीन को नहीं बेचा जा सकता
एडवोकेट मनोज कौशि के अनुसार दान में दी गई जमीन को किसी भी सूरत में नहीं बेचा जा सकता, बल्कि यहां तो मंदिर भी बना हुआ है। अयोध्या का मामला भी इसका एक उदाहरण है। इस मामले में रामलला भी एक पार्टी थे।
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तहसील कार्यालय के रजिस्टर में नहीं थी रजिस्ट्री की कॉपियां
दुकानदारों ने बताया कि 1400 गज जमीन की आठ टुकड़ों में रजिस्ट्री कराई गई। करीब 15 दिन पहले वह जब तहसील कार्यालय में इन रजिस्ट्री की कॉपी लेने गए तो रजिस्टर में इनका रिकॉर्ड नहीं था। इस पर उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। यह देख अधिकारियों ने उन्हें रजिस्ट्री की कॉपी उपलब्ध कराई। दुकानदारों की मानें तो श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट में देवराज तायल, उनकी पत्नी व पांच बेटे ट्रस्टी थे। इन सभी की मौत हो गई। मगर ऐसा कोई नियम नहीं होता कि ट्रस्ट में परिवार के लोग ही सदस्य रहेंगे। इस साल 22 सितंबर को फर्जीवाड़ा कर ट्रस्ट में नए लोगों को शामिल किया गया। बाद में निगम व तहसील कार्यालय से सेटिंग कर अलग-अलग रजिस्ट्री करवा गई और फिर जमीन बेच दी। यही नहीं पिछले छह माह से ट्रस्ट की दुकानों का किराया भी नहीं लिया जा रहा है। इस अवसर पर हिंदू जागरण मंच से आत्म प्रकाश रहेजा, रविंद्र गोयल मौजूद रहे।

मंच इस लड़ाई को आखिर तक लड़ेगा। यह मामला लोगों की धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। इस जमीन को फर्जी तरीके से बेचा गया है। - मनोज कौशिक चंद्रवंशी, विभाग संयोजक, हिंदू जागरण मंच
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