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Hisar: ऐसा स्कूल जहां 13 सालों से मिल रही निशुल्क शिक्षा, अब बेटियां कर रही इंजीनियरिंग और सीए की पढ़ाई
Wed, 22 Jan 2025 05:05 PM IST
नवीन दलाल
संवाद न्यूज एजेंसी, मनोज कौशिक (हिसार)
संवाद न्यूज एजेंसी, मनोज कौशिक (हिसार)
Published by: नवीन दलाल
Updated Wed, 22 Jan 2025 05:05 PM IST
सार
हिसार के उमेश शर्मा 2012 से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। 23 बच्चों के साथ स्कूल शुरू किया था जिसमें अब 250 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल ड्रेस, किताबें भी निशुल्क दी जाती रही हैं।
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विद्यार्थियों के साथ शिक्षक
- फोटो : संवाद
विस्तार
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। हिसार के उमेश शर्मा पर मजरुह सुल्तानपुरी की ये पक्तियां सटीक बैठती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा से वंचित होता देख उनके दिल में ऐसी टीस उठी कि उन्होंने अनोखा उदाहरण पेश किया जो दूसरों के लिए मिसाल बन गया। 2012 में 23 बच्चों के साथ शुरू किया गया नई राहें स्कूल आज उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है जो सुविधाओं के अभाव में पढ़ नहीं पाते।
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पहली से पांचवीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा देने वाले इस स्कूल में वर्तमान में 250 बच्चे पढ़ रहे हैं। उमेश शर्मा बताते हैं ये सफर आसान नहीं था। शिक्षकों को वेतन देने, स्कूल बिल्डिंग का किराया व स्कूल शिक्षा सामग्री उपलब्ध करवाने समेत कई तरह की चुनौतियां थी, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और साथ देने के लिए अन्य लोग भी जुड़ते गए। एक दिन ऐसा आया और कारवां बन गया। आज उनके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बड़ी यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।
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दो बेटियां इंजीनियरिंग तो एक कर रही सीए की पढ़ाई
उमेश शर्मा ने बताया उनके नई राहें स्कूल के पहले बैच की छात्रा रजनी और निशा ने जेईई मेंस की परीक्षा पास की और जीजेयू में बीटेक की पढ़ाई कर रही हैं। रजनी के पिता का बचपन में ही देहांत हो गया था और मां सफाई कर्मचारी हैं। निशा के पिता चालक हैं और मां फैक्टरी में काम करती हैं। मनुप्रिया ने 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और सीए कर रही है। वहीं नीतू ने 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे लेकिन वो आगे नहीं पढ़ पाई थी। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को आज इस मुकाम पर देखकर मन खुशी से भर जाता है।
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शुरू किया सुपर 100 प्रोजेक्ट, निशुल्क इवनिंग ट्यूशन
उमेश शर्मा ने बताया वे शिक्षा की अलख जगाने के लिए शुरू से ही लड़ाई लड़ते आए हैं। उनके स्कूल से पांचवीं कक्षा पास करने वाले बच्चों का पहले वे 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिला करवाते थे तो इस नियम को खत्म करने के बाद खुद खर्च वहन कर या फीस में कटौती करवाकर निजी स्कूलों में शिक्षा दिलवाने का काम कर रहे हैं। नई राहें स्कूल के अलावा उन्होंने सरकारी स्कूल के बच्चों को निशुल्क टयूशन दिया तो वहीं, कैमरी, गंगवा गांव और पटेल नगर में दो साल तक निशुल्क ट्यूशन पढ़ाया। इसके साथ ही सुपर 100 प्रोजेक्ट शुरू किया। जिसका उद्देश्य होनहार बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करना था। वर्तमान में कई ऐसे विद्यार्थी हैं जो भविष्य में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं।
बड़े स्कूलों जैसा दिया जा रहा माहौल
उमेश शर्मा ने बताया पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में सांस्कृतिक गतिविधियां भी करवाई जाती हैं, ताकि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़े। स्कूल में पढ़ाई करने वाले सभी बच्चे कमजोर वर्ग से आते हैं, इसलिए मंच देना जरूरी है। वार्षिक समारोह के लिए कई दिनों तक नृत्य और गायन और नाटक की तैयारी भी करवाई जाती है और किसी सभागार में कार्यक्रम आयोजित करवाया जाता है। अब तक बच्चों को किताबें, स्कूल ड्रेस और बैग्स निशुल्क देते आए हैं लेकिन अब संख्या बढ़ने से थोड़ी दिक्कत आ रही है, लेकिन हम प्रयासरत हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा और सुविधाओं से वंचित न रहे।