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Hisar News: रामपाल की जमानत याचिका पर 4 अगस्त को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई, 6 अनुयायियों की हुई थी मौत
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हिसार। हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में सतलोक आश्रम प्रकरण से जुड़े देशद्रोह मामले में आरोपी रामपाल की जमानत याचिका की सुनवाई बुधवार को होनी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त तक स्थगित कर दिया। रामपाल ने यह याचिका अपने खिलाफ दर्ज देशद्रोह के केस में दायर की है जो नवंबर 2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में हुई हिंसा के बाद दर्ज किया गया था।
इससे पहले हिसार की निचली अदालत ने लगभग चार महीने पहले रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद रामपाल ने हाईकोर्ट का रुख किया। वह नवंबर 2014 से लगातार जेल में बंद हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने उनसे जुड़े दो मामलों में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर आंशिक राहत प्रदान की थी।
14 आपराधिक मामले थे, 11 में बरी
सतलोक आश्रम हिंसा में छह अनुयायियों की मौत हुई थी, जिनमें मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु शामिल थे। इस हिंसा के बाद रामपाल समेत 22 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अवैध रूप से दवाइयों व गैस सिलेंडरों का भंडारण करने जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। रामपाल पर कुल 14 आपराधिक मामले थे जिनमें से 11 में उसे बरी किया जा चुका है। मुकदमा नंबर 429 और 430 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी थी जबकि देशद्रोह से जुड़ा मुकदमा नंबर 428 अभी लंबित है और इसमें करीब एक हजार से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है।
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इससे पहले हिसार की निचली अदालत ने लगभग चार महीने पहले रामपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद रामपाल ने हाईकोर्ट का रुख किया। वह नवंबर 2014 से लगातार जेल में बंद हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने उनसे जुड़े दो मामलों में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सस्पेंड कर आंशिक राहत प्रदान की थी।
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14 आपराधिक मामले थे, 11 में बरी
सतलोक आश्रम हिंसा में छह अनुयायियों की मौत हुई थी, जिनमें मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु शामिल थे। इस हिंसा के बाद रामपाल समेत 22 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अवैध रूप से दवाइयों व गैस सिलेंडरों का भंडारण करने जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। रामपाल पर कुल 14 आपराधिक मामले थे जिनमें से 11 में उसे बरी किया जा चुका है। मुकदमा नंबर 429 और 430 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी थी जबकि देशद्रोह से जुड़ा मुकदमा नंबर 428 अभी लंबित है और इसमें करीब एक हजार से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है।
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