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झुग्गी-झोपड़ियों से महानगर तक हुआ राखीगढ़ी का विस्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Apr 2022 11:33 PM IST
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Rakhigarhi expanded from slum to metropolis
जयकुमार
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नारनौंद। अब तक मिले पुरातात्विक अवशेषों से यह साबित हो चुका है कि आठ हजार साल पहले साफ-सुथरा व सुनियोजित तरीके से राखीगढ़ी को बसाया गया था। उस समय यहां के लोगों का रहन-सहन बहुत ही साधारण था। शुरुआत में लोग झोपड़ी बनाकर रहते थे, लेकिन बाद मकान भी बने। धीरे-धीरे हड़प्पाकालीन सभ्यता का शहरीकरण हुआ और राखीगढ़ी ने उस वक्त महानगर का रूप ले लिया था। हर साल 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस एवं विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूकता लाई जा सके।
नेशनल मेरिटाइम हेरिटेज कांप्लेक्स गांधी नगर के डायरेक्टर जनरल व पुणे डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर वसंत शिंदे ने बताया कि राखीगढ़ी में साइट नंबर तीन पर पहली बार, एक नंबर साइट पर दूसरी बार और सात नंबर साइट पर तीसरी बार खोदाई हो रही है। पहली बार एएसआई के डायरेक्टर डॉ. अमरेंद्र नाथ ने 1998 से 2000 तक खोदाई कराई थी। दूसरी बार डेक्कन यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर प्रोफेसर वसंत शिंदे ने 2011 से 2016 तक खोदाई कराई। फिलहाल पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर डॉ संजय मंजूल की देखरेख में खोदाई हो रही है। राखीगढ़ी को आईकॉनिक साइट के रूप में विकसित करने का प्रयास हो रहा है, जिससे कि यहां पर देखने के लिए आने वाले लोगों को कुछ अलग मिले। इसलिए खोदाई की जाने वाले साइट को ओपन रखा जाएगा। पहले हुई दो बार की खोदाई में खुदाई पूरी होने के बाद साइट को मिट्टी से ढक दिया जाता था। (संवाद)
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संग्रहालय में रखे जाएंगे यहां मिले अवशेष
प्रदेश सरकार की तरफ से यहां 23.85 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय, कैफेटेरिया, हॉस्टल व रेस्ट हाउस का निर्माण कराया जा रहा है। हॉस्टल, रेस्ट हाउस व कैफेटेरिया का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। संग्रहालय का निर्माण पूरा होने के बाद खोदाई के दौरान मिले सामान को रखा जाएगा। इस स्थल व मिले सामान देखकर हड़प्पा कालीन सभ्यता के बारे में जानकारी मिलेगी। इससे आने वाले समय में राखीगढ़ी अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा।
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हड़प्पा काल में बनने लगे थे मिट्टी के बर्तन
राखीगढ़ी से मिले सामानों से पता लगता है कि हड़प्पाकालीन सभ्यता के समय लोग मिट्टी के बर्तन बनाने, खाना पकाने व खाने का प्रयोग करते थे। उस वक्त चाक पर बर्तन बनने लगे थे। इसके अलावा यहां भट्ठियों के अवशेष भी मिले हैं। इतिहासकारों का बताना है कि उस वक्त के राखीगढ़ी में लोग दूध व दूध से बनी वस्तुओं का प्रयोग करते थे। उसी समय की परंपरा आज भी पूरे भारत में चली आ रही है।
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