{"_id":"655264117f4a319067007d57","slug":"pollution-explodes-on-diwali-aqi-reaches-66-to-303-hisar-news-c-21-hsr1020-258693-2023-11-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: दिवाली पर प्रदूषण का धमाका, एक्यूआई 66 से 303 पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: दिवाली पर प्रदूषण का धमाका, एक्यूआई 66 से 303 पहुंचा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। दिवाली के मौके पर जलाए गए पटाखों के कारण प्रदूषण का स्तर करीब 5 गुना बढ़ गया। शनिवार को हिसार का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सिर्फ 66 था जो सोमवार को 303 पर पहुंच गया। दिवाली की शाम होते-होते मिठाई की दुकान से लेकर सब्जी की रेहड़ी तक हर जगह प्रतिबंधित पटाखे बिकते नजर आए। रात 12 बजे के बाद तक आतिशबाजी होती रही। उधर, प्रशासन या प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की ओर से कहीं कोई छापा नहीं मारा गया। इस दौरान न कहीं प्रतिबंधित पटाखे बरामद हुए न ही कोई केस दर्ज हुआ। दिवाली के दिन पराली जलाने के चार केस मिले, जबकि सोमवार को कोई केस सामने नहीं आया।
प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन की ओर से पराली जलाने से रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। जिले में अब तक 89 स्थानों पर पराली जलाने के केस दर्ज किए गए हैं, जिसमें किसानों पर दो लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। पराली जलाने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने हर जिले में एक अधिकारी भी निगरानी के लिए भेजा है। इसके बावजूद केवल पटाखों के कारण प्रदूषण का स्तर करीब 5 गुना तक बढ़ गया। शनिवार को एक्यूआई लेवल 66 रहा, जबकि रविवार रात को यह स्तर 450 से अधिक तक दर्ज किया गया। पुरानी सब्जी मंडी चौक पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक पटाखों की ब्रिकी होती रही। ग्रीन पटाखों के बारे में अधिकतर दुकानदारों को जानकारी नहीं थी। सभी जगह प्रतिबंधित पटाखे ही बिक रहे थे।
चिकित्सकों के अनुसार पटाखे जलाने से उनमें से कई तरह की खतरनाक गैसें निकलती हैं। इनमें मुख्य रूप से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और हेवी मेटल्स सल्फर, लेड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी मैग्निशियम शामिल हैं। इससे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजिज (सीओपीडी) जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन की ओर से पराली जलाने से रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। जिले में अब तक 89 स्थानों पर पराली जलाने के केस दर्ज किए गए हैं, जिसमें किसानों पर दो लाख से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। पराली जलाने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने हर जिले में एक अधिकारी भी निगरानी के लिए भेजा है। इसके बावजूद केवल पटाखों के कारण प्रदूषण का स्तर करीब 5 गुना तक बढ़ गया। शनिवार को एक्यूआई लेवल 66 रहा, जबकि रविवार रात को यह स्तर 450 से अधिक तक दर्ज किया गया। पुरानी सब्जी मंडी चौक पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक पटाखों की ब्रिकी होती रही। ग्रीन पटाखों के बारे में अधिकतर दुकानदारों को जानकारी नहीं थी। सभी जगह प्रतिबंधित पटाखे ही बिक रहे थे।
विज्ञापन
चिकित्सकों के अनुसार पटाखे जलाने से उनमें से कई तरह की खतरनाक गैसें निकलती हैं। इनमें मुख्य रूप से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और हेवी मेटल्स सल्फर, लेड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी मैग्निशियम शामिल हैं। इससे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजिज (सीओपीडी) जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन